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फागुन में कराया सावन का अहसास
बदायूं।
Updated Sun, 01 Mar 2015 11:27 PM IST
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शनिवार रात से तेज हवाओं के साथ शुरू हुई रिमझिम बारिश सेे जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया। पूरे दिन सूर्य के दर्शन नहीं हुए। पारा भी धड़ाम हो गया। हाल में ही स्वेटर और कोट उतार रखने वाली गर्मी के बाद फिर से लोग इन्हें लादने को मजबूर हो गए। वहीं रिमझिम बरसात ने फाल्गुन में सावन का अहसास करा दिया।
पूरे दिन रुक-रुककर बारिश होने के कारण बाजार और नगर की सड़कों पर सन्नाटा रहा। ठंड लौट आने पर बुजुर्ग और रोगियों को फिर से घरों में दुबककर रहना पड़ा। स्कूलों और ऑफिसों का अवकाश होने के कारण बच्चों और कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। वैसे तो रविवार को बाजार बंदी रहती है, लेकिन बारिश ने इस बंदी को पूरी तरह कामयाब कर दिया। अधिकतर दुकानदारों ने दुकानें नहीं खोलीं।
संडे बाजार नहीं लगा, सन्नाटा पसरा
गांधी मैदान जो हर संडे को एक मेला जैसे माहौल का बाजार होता है। शनिवार रात से चल रही रिमझिम बारिश ने इस बाजार पर पानी फेर दिया। यह बाजार खुले आसमान के नीचे अस्थाई व्यवस्थओं के बीच लगता रहा है। कुछ फोल्डिंग पलंग तो पड़े दिखाई दिए, लेकिन न दुकानदार आए और न ग्राहक। यहां बरसात से गीली जमीन पर एक भी पदचिह्न दिखाई नहीं दिया। पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसरा रहा।
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जलभराव और गंदगी ने खोली पालिका की पोल
हल्की बरसात और फिर जलभराव और नालों से उफनती गंदगी के फैलने से नई सराय, ब्राह्मपुर इलाका एक बाद नगर पालिका की नाकामी की पोल खोलता दिखा। शहबाजपुर की गलियां गंदे पानी से भर गईं। लोगों को घरों से निकलना दूभर हो गया। शहबाजपुर मुराववाली गली की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं रही।
बारिश के साथ हवा से गिरीं गेहूं की फसलें
बारिश को गेहूं की फसल को वरदान, तेज हवा के कारण अभिशाप में बदल गया। बरसात से जड़ें ढीली हुईं तो तेज हवाओं ने फसलें गिरा दीं। गेहूं के खेतों में दूर-दूर तक फसलें बिछी दिखाई दे रहीं थीं।
जलभराव से कई जगह टेलीफोन लाइनें डेड
शहर में जलभराव के कारण अंडर ग्राउंड लाइनों तक पानी पहुंच जाने के कारण टेलीफोन लाइने डेड हो गईं। गांधी ग्राउंड के आसपास कई टेलीफोन डेड हो गए। विकास भवन के पास खुदी पड़ी सड़क के कारण और बारिश से कई टेलीफोन काफी देर बंद रहे।
गेहूं उत्पादक खुश, आलू काश्तकार मायूस
इलाके में बूंदाबांदी से सब्जी फसलों को फायदा
तेज हवा की चपेट में आकर गिरी सरसों की फसल
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)। गेहूं के लिए मुफीद साबित हो रही बरसात ने एक बार फिर संजीवनी का काम कर दिया है। बंपर पैदावार की उम्मीद से गेहूं उत्पादक खुश है, तो खेतों में खोदाई को तैयार आलू की फसल का देख किसान के चेहरे पर शिकन आ गई है।
शनिवार रात से शुरू हुई बरसात ने रविवार सुबह में तेजी दिखाई। तेज हवा के झोंके के साथ दोपहर बाद तक रुक-रुक कर बूंदाबांदी की वजह से खेतों में खड़ी सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। पौधे गिर भी गए। खुदाई को तैयार आलू की फसल में हालांकि अभी तक जलभराव की समस्या नहीं सामने नहीं आई, लेकिन तेज बरसात होने की स्थिति में आलू खेत में सड़ सकता है। कृषि वैज्ञानिक की सलाह है कि आलू के खेतों में पानी नहीं भरने दिया जाए, तो नुकसान से बचा जा सकता है।
सब्जी फसलों में तोरई, लौकी, कद्दू गोभी आदि को एक सिंचाई का फायदा हो गया। सबसे ज्यादा फायदे में गेहूं चल रहा है। बुवाई से लेकर बढ़वार के दिनों में गेहूं की फसल को तीन बार बरसात के रूप में संजीवनी मिल चुकी है। इस बार बरसात ने तो बंपर पैदावार का संकेत भी दे दिया। वैसे, मौसम विज्ञानी अगले दिन भी बरसात होने का संकेत दे रहे हैं।
दबतोरी। क्षेत्र के गांव परसिया, ललुआ नगला, जलालपुर आदि गावों में गेहूं की फसल चौपट हो गई है।
इस्लामनगर। बारिश और तेज हवाओं ने लोगों के बाहर निकलने पर पहरे लगा दिए। हवाओं से फसलें गिर जाने से किसान परेशान दिखे।
माहु का प्रकोप होगा कम
उझानी। बरसात होने की स्थिति में माहु का प्रकोप काफी कम हो जाता है। माहु इन दिनों सरसों और गेहूं की फसल को प्रभावित करने की ओर कदम बढ़ा चुकी थी। माहु सरसों के दाने को चूस लेती है। कीट सब्जी फसलों को भी प्रभावित नहीं कर पाएंगे।
बरसात की वजह से तापमान तेजी से गिरा है। गेहूं की फसल अभी फायदे में है। चार-छह दिन तक मौसम खराब रहे, तब भी गेहूं पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरसों और आलू प्रभावित होने के कगार पर हैं। मौसम साफ होते ही किसान आलू की खुदाई में जुट जाएं तो अच्छा रहेगा।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक।
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पूरे दिन रुक-रुककर बारिश होने के कारण बाजार और नगर की सड़कों पर सन्नाटा रहा। ठंड लौट आने पर बुजुर्ग और रोगियों को फिर से घरों में दुबककर रहना पड़ा। स्कूलों और ऑफिसों का अवकाश होने के कारण बच्चों और कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। वैसे तो रविवार को बाजार बंदी रहती है, लेकिन बारिश ने इस बंदी को पूरी तरह कामयाब कर दिया। अधिकतर दुकानदारों ने दुकानें नहीं खोलीं।
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संडे बाजार नहीं लगा, सन्नाटा पसरा
गांधी मैदान जो हर संडे को एक मेला जैसे माहौल का बाजार होता है। शनिवार रात से चल रही रिमझिम बारिश ने इस बाजार पर पानी फेर दिया। यह बाजार खुले आसमान के नीचे अस्थाई व्यवस्थओं के बीच लगता रहा है। कुछ फोल्डिंग पलंग तो पड़े दिखाई दिए, लेकिन न दुकानदार आए और न ग्राहक। यहां बरसात से गीली जमीन पर एक भी पदचिह्न दिखाई नहीं दिया। पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसरा रहा।
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जलभराव और गंदगी ने खोली पालिका की पोल
हल्की बरसात और फिर जलभराव और नालों से उफनती गंदगी के फैलने से नई सराय, ब्राह्मपुर इलाका एक बाद नगर पालिका की नाकामी की पोल खोलता दिखा। शहबाजपुर की गलियां गंदे पानी से भर गईं। लोगों को घरों से निकलना दूभर हो गया। शहबाजपुर मुराववाली गली की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं रही।
बारिश के साथ हवा से गिरीं गेहूं की फसलें
बारिश को गेहूं की फसल को वरदान, तेज हवा के कारण अभिशाप में बदल गया। बरसात से जड़ें ढीली हुईं तो तेज हवाओं ने फसलें गिरा दीं। गेहूं के खेतों में दूर-दूर तक फसलें बिछी दिखाई दे रहीं थीं।
जलभराव से कई जगह टेलीफोन लाइनें डेड
शहर में जलभराव के कारण अंडर ग्राउंड लाइनों तक पानी पहुंच जाने के कारण टेलीफोन लाइने डेड हो गईं। गांधी ग्राउंड के आसपास कई टेलीफोन डेड हो गए। विकास भवन के पास खुदी पड़ी सड़क के कारण और बारिश से कई टेलीफोन काफी देर बंद रहे।
गेहूं उत्पादक खुश, आलू काश्तकार मायूस
इलाके में बूंदाबांदी से सब्जी फसलों को फायदा
तेज हवा की चपेट में आकर गिरी सरसों की फसल
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)। गेहूं के लिए मुफीद साबित हो रही बरसात ने एक बार फिर संजीवनी का काम कर दिया है। बंपर पैदावार की उम्मीद से गेहूं उत्पादक खुश है, तो खेतों में खोदाई को तैयार आलू की फसल का देख किसान के चेहरे पर शिकन आ गई है।
शनिवार रात से शुरू हुई बरसात ने रविवार सुबह में तेजी दिखाई। तेज हवा के झोंके के साथ दोपहर बाद तक रुक-रुक कर बूंदाबांदी की वजह से खेतों में खड़ी सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। पौधे गिर भी गए। खुदाई को तैयार आलू की फसल में हालांकि अभी तक जलभराव की समस्या नहीं सामने नहीं आई, लेकिन तेज बरसात होने की स्थिति में आलू खेत में सड़ सकता है। कृषि वैज्ञानिक की सलाह है कि आलू के खेतों में पानी नहीं भरने दिया जाए, तो नुकसान से बचा जा सकता है।
सब्जी फसलों में तोरई, लौकी, कद्दू गोभी आदि को एक सिंचाई का फायदा हो गया। सबसे ज्यादा फायदे में गेहूं चल रहा है। बुवाई से लेकर बढ़वार के दिनों में गेहूं की फसल को तीन बार बरसात के रूप में संजीवनी मिल चुकी है। इस बार बरसात ने तो बंपर पैदावार का संकेत भी दे दिया। वैसे, मौसम विज्ञानी अगले दिन भी बरसात होने का संकेत दे रहे हैं।
दबतोरी। क्षेत्र के गांव परसिया, ललुआ नगला, जलालपुर आदि गावों में गेहूं की फसल चौपट हो गई है।
इस्लामनगर। बारिश और तेज हवाओं ने लोगों के बाहर निकलने पर पहरे लगा दिए। हवाओं से फसलें गिर जाने से किसान परेशान दिखे।
माहु का प्रकोप होगा कम
उझानी। बरसात होने की स्थिति में माहु का प्रकोप काफी कम हो जाता है। माहु इन दिनों सरसों और गेहूं की फसल को प्रभावित करने की ओर कदम बढ़ा चुकी थी। माहु सरसों के दाने को चूस लेती है। कीट सब्जी फसलों को भी प्रभावित नहीं कर पाएंगे।
बरसात की वजह से तापमान तेजी से गिरा है। गेहूं की फसल अभी फायदे में है। चार-छह दिन तक मौसम खराब रहे, तब भी गेहूं पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरसों और आलू प्रभावित होने के कगार पर हैं। मौसम साफ होते ही किसान आलू की खुदाई में जुट जाएं तो अच्छा रहेगा।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक।