फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   protest of agricultural law

‘समय को देखते हुए नाकाफी हैं न्यूनतम समर्थन मूल्य’

Tue, 01 Dec 2020 01:47 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 01 Dec 2020 01:47 AM IST
विज्ञापन
protest of agricultural law
बदायूं। कृषि बिल कानून का किसान लगातार विरोध कर रहे हैं। यहां भी किसान संगठनों समेत विपक्षी दल आंदोलन कर चुके हैं, साथ ही इसका विरोध भी किया जा रहा है। भाकियू इस संबंध में धरना प्रदर्शन कर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन भी दे चुकी है। किसानों का कहना है कि आज जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) किसानों को दिया जा रहा है, वह समय को देखते हुए नाकाफी है। उस पर बिल पारित कर किसानों की कमर तोड़ने का काम कर दिया गया है। इस बिल से किसानों को नहीं बल्कि उद्योगपतियों को लाभ होगा।
विज्ञापन

केंद्र सरकार की ओर से पिछले दिनों कृषि बिल पारित किया गया था। जिसमें लेकर किसान संगठन शुरू से ही विरोध करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि ये बिल किसानों के हित को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है। इस बिल से किसानों को बिल्कुल भी फायदा नहीं होने वाला है। इस बिल की वजह से छोटे और मध्यम वर्ग के किसान पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। भारतीय किसान यूनियन भी इस बिल का पूरी तरह से विरोध कर रही है। किसानों का कहना है कि इस कृषि बिल में बड़े उद्योगपति को फायदा होता नजर आ रहा है। नए प्राविधान के तहत व्यापारी कितना भी भंडारण कर सकते हैं। ऐसे में कालाबाजारी होने के भी ज्यादा उम्मीद रहेगी।
विज्ञापन

कौन से बिल हैं
1 कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल
2 आवश्यक वस्तु (संशोधन) बिल
3 मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता बिल।
क्यों हो रहा है विरोध-
बिल का विरोध करने वालों का कहना है कि इसका पूरा नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा। इससे किसान और उसकी उपज पर प्राइवेट कंपनियों का कब्जा हो जाएगा और सारा फायदा बड़ी कंपनियों को मिलेगा। कृषि उत्पाद मार्केट कानून के तहत किसानों को फ्री व्यापार की सुविधा मिलती है। इससे मंडियां खत्म हो जायेगी। अध्यादेश से मंडी एक्ट केवल मंडी तक ही सीमित कर दिया गया है और मंडी में खरीद-फरोख्त पर शुल्क लगेगा जबकि बाहर बेचने-खरीदने पर इससे छूट मिलेगी। इसके अलावा बड़ी कंपनियां की मनमानी बढ़ेगी और छोटे व्यापारी संकट में आ जायेंगे। कंपनियां किसानों की जमीन पर नियंत्रण करने लगेंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

सरकार कह रही कि उसका लक्ष्य किसानों की आय दोगुनी करना
सरकार शुरू से ही कह रही है कि उसका लक्ष्य किसानों की आय दोगुना करना है। सरकार का कहना है कि ये विधेयक सही मायने में किसानों को बिचौलियों से मुक्त कर देगा। कृषि सुधार से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नये अवसर मिलेंगे, जिनसे उनका मुनाफा बढ़ेगा। किसानों को आधुनिक टेक्नोलॉजी का लाभ मिलेगा और वे मजबूत होंगे।
-क्या बोले किसान-
फोटो- 27
-इस बिल से किसानों को सीधा-सीधा नुकसान है। सरकार की ओर से मंडी को खत्म किया जा रहा है। ऐसे में किसान को अपनेे फसल को कैस न्यूनतम मूल्य मिल सकेगा। इस कानून में यह साफ नहीं किया गया है कि मंडी के बाहर किसानों को न्यूनतम मूल्य मिलेगा या नहीं। ऐसे में हो सकता है कि किसी फसल का ज्यादा उत्पादन होने पर व्यापारी किसानों को कम कीमत पर फसल बेचने पर मजबूर करें।

-सौदान सिंह
--------------------
फोटो- 28
-सरकार को अगर कोई किसान के हित में बिल लाना था तो वह किसानों की राय भी ले सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि सरकार फसल के भंडारण का अनुमति दे रही है, लेकिन किसानों के पास इतने संसाधन नहीं होते हैं कि वो सब्जियों या फलों का भंडारण कर सकें। ऐसे में वो व्यापारियों को कम कीमत पर अपनी फसल बेचेंगे। व्यापारी अपने पास उनकी फसल जमा कर सकते हैं, क्योंकि उनके पास भंडारण की सुविधा अच्छी होती है। बाद में वह अपने हिसाब से बाजार में फसल को बेचेंगे। ऐसे में फसल की कीमत तय करने का अधिकार बड़े व्यापारियों या कंपनियों के पास आ जाएगा
-कृष्णपाल सिंह राठौर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed