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Budaun News: कोरोना काल से ही यहां विवादों में घिरे रहे प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता
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27-बीडीएन-06- पीडीएफ।
बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता कोरोना काल से ही विवादों में घिरे रहे। कोरोना की दूसरी लहर में दो-दो प्लांट होने के बाद भी आसपास के जिलों से ऑक्सीजन सिलिंडर खरीदने का मामला उजागर हुआ तो उसे दबाने की भी काफी कोशिश की गई लेकिन जब मामला शासन तक पहुंचा तो जांच शुरू हुई। ऑक्सीजन खरीद की जांच शुरू हुई तो तमाम अनियमितताएं पाई गईं। इसके बाद से ही उन पर कार्रवाई तय मानी जा रही थी।
जब कोरोना की दूसरी लहर शुरू हुई तो ऑक्सीजन के लिए मारामारी मची थी। हालांकि उस समय मेडिकल कॉलेज में दो ऑक्सीजन प्लांट चालू स्थिति में थे। इसके बाद भी बाहर से ऑक्सीजन सिलिंडरों की खरीद की गई। इसके बाद भी तमाम मरीजों ने मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ दिया था।
कोरोना काल के बाद ऑक्सीजन खरीद का मामला लगातार सुर्खियों में रहा। इस मामले की जांच के दौरान मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ऑक्सीजन खरीद का रिकाॅर्ड टीम को नहीं दे पाया था। इसके अलावा अन्य कई अनियमितताएं उजागर हुईं। मेडिकल कॉलेज में कुछ डॉक्टर और स्टाफ को बिना बायोमीट्रिक हाजिरी के वेतन हर माह दिया गया। कई डॉक्टरों से भी उनका विवाद चल रहा था।
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दो डॉक्टरों की तैनाती तो यहां थी, लेकिन वे दूसरे जिलों में अपने अस्पताल चला रहे हैं। चहेते डॉक्टरों को वेतन जारी करने के साथ ही मेडिकल कॉलेज में 115 डॉक्टरों को काफी समय से वेतन नहीं दिया गया। यह सब मामले शासन स्तर तक पहुंचते रहे। इन सभी शिकायतों की गाज प्राचार्य पर गिरी तो उनको यहां से हटाया गया।
115 डॉक्टरों ने वेतन न मिलने पर की थी हड़ताल
राजकीय मेडिकल कॉलेज में तैनात 115 डॉक्टरों को करीब सात महीने से वेतन नहीं दिया गया था। डॉक्टर लगातार वेतन की मांग कर रहे थे लेकिन मेडिकल कॉलेज प्राचार्य की ओर से उनको वेतन जारी नहीं किया जा रहा था। कई बार आश्वासन के बाद भी डॉक्टरों को वेतन नहीं मिला तो 19 मार्च को सभी 115 डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। तीन दिन तक रही हड़ताल की वजह से ओपीडी में मरीजों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ी थीं।
नहीं बंद हो रहा था रेफर करने का खेल
- मेडिकल कॉलेज से सैफई, अलीगढ़ और लखनऊ मेडिकल कॉलेज में मरीजों को रेफर करने का खेल बंद नहीं हो रहा था। रोजाना दस से 15 मरीज संबंधित मेडिकल कॉलेजों को रेफर किए जा रहे थे। इस बात का लेकर सैफई मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने नाराजगी भी जताई थी।
बढ़ने के बजाय कम होती गईं फैकल्टी
- मेडिक्ल कॉलेज में वर्ष 2021 में करीब 80 प्रतिशत फैकल्टी थी। एनएमसी के मानक के तहत न्यूनतम फैकल्टी यहां थीं। कई विभागों के एचओडी और प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर भी थे। विद्यार्थियों की पढ़ाई भी सही चल रही थी। इसके बाद प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता के कार्यकाल में फैकल्टी बढ़ने के बजाय लगातार कम होती चली गईं। कई प्रोफेसर यहां की व्यवस्थाओं से परेशान होकर चले गए।
एमबीबीएस छात्रों की मौत में भी उजागर हुई थी लापरवाही
राजकीय मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में रह रहे एमबीबीएस के पांच छात्र कछला गंगा में स्नान करने गए थे। स्नान के दौरान पांचों छात्र डूब गए थे, जिसमें तीन छात्रों की मौत हो गई थी। इसके बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठे थे। यहां पढ़ रहे छात्रों की सुरक्षा को लेकर उनके अभिभावक भी चिंतित दिखाई दे रहे थे। वजह थी कि छात्र हॉस्टल से कहीं भी चले जाते थे, उनको रोकने-टोकने वाला भी कोई नहीं था।
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जब कोरोना की दूसरी लहर शुरू हुई तो ऑक्सीजन के लिए मारामारी मची थी। हालांकि उस समय मेडिकल कॉलेज में दो ऑक्सीजन प्लांट चालू स्थिति में थे। इसके बाद भी बाहर से ऑक्सीजन सिलिंडरों की खरीद की गई। इसके बाद भी तमाम मरीजों ने मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ दिया था।
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कोरोना काल के बाद ऑक्सीजन खरीद का मामला लगातार सुर्खियों में रहा। इस मामले की जांच के दौरान मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ऑक्सीजन खरीद का रिकाॅर्ड टीम को नहीं दे पाया था। इसके अलावा अन्य कई अनियमितताएं उजागर हुईं। मेडिकल कॉलेज में कुछ डॉक्टर और स्टाफ को बिना बायोमीट्रिक हाजिरी के वेतन हर माह दिया गया। कई डॉक्टरों से भी उनका विवाद चल रहा था।
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दो डॉक्टरों की तैनाती तो यहां थी, लेकिन वे दूसरे जिलों में अपने अस्पताल चला रहे हैं। चहेते डॉक्टरों को वेतन जारी करने के साथ ही मेडिकल कॉलेज में 115 डॉक्टरों को काफी समय से वेतन नहीं दिया गया। यह सब मामले शासन स्तर तक पहुंचते रहे। इन सभी शिकायतों की गाज प्राचार्य पर गिरी तो उनको यहां से हटाया गया।
115 डॉक्टरों ने वेतन न मिलने पर की थी हड़ताल
राजकीय मेडिकल कॉलेज में तैनात 115 डॉक्टरों को करीब सात महीने से वेतन नहीं दिया गया था। डॉक्टर लगातार वेतन की मांग कर रहे थे लेकिन मेडिकल कॉलेज प्राचार्य की ओर से उनको वेतन जारी नहीं किया जा रहा था। कई बार आश्वासन के बाद भी डॉक्टरों को वेतन नहीं मिला तो 19 मार्च को सभी 115 डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। तीन दिन तक रही हड़ताल की वजह से ओपीडी में मरीजों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ी थीं।
नहीं बंद हो रहा था रेफर करने का खेल
- मेडिकल कॉलेज से सैफई, अलीगढ़ और लखनऊ मेडिकल कॉलेज में मरीजों को रेफर करने का खेल बंद नहीं हो रहा था। रोजाना दस से 15 मरीज संबंधित मेडिकल कॉलेजों को रेफर किए जा रहे थे। इस बात का लेकर सैफई मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने नाराजगी भी जताई थी।
बढ़ने के बजाय कम होती गईं फैकल्टी
- मेडिक्ल कॉलेज में वर्ष 2021 में करीब 80 प्रतिशत फैकल्टी थी। एनएमसी के मानक के तहत न्यूनतम फैकल्टी यहां थीं। कई विभागों के एचओडी और प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर भी थे। विद्यार्थियों की पढ़ाई भी सही चल रही थी। इसके बाद प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता के कार्यकाल में फैकल्टी बढ़ने के बजाय लगातार कम होती चली गईं। कई प्रोफेसर यहां की व्यवस्थाओं से परेशान होकर चले गए।
एमबीबीएस छात्रों की मौत में भी उजागर हुई थी लापरवाही
राजकीय मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में रह रहे एमबीबीएस के पांच छात्र कछला गंगा में स्नान करने गए थे। स्नान के दौरान पांचों छात्र डूब गए थे, जिसमें तीन छात्रों की मौत हो गई थी। इसके बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठे थे। यहां पढ़ रहे छात्रों की सुरक्षा को लेकर उनके अभिभावक भी चिंतित दिखाई दे रहे थे। वजह थी कि छात्र हॉस्टल से कहीं भी चले जाते थे, उनको रोकने-टोकने वाला भी कोई नहीं था।

27-बीडीएन-06- पीडीएफ।

27-बीडीएन-06- पीडीएफ।