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बदायूं में कोविड-19 उल्लंघन के 1111 मामले वापस लेने की तैयारी
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बदायूं। चुनाव से पहले सरकार लोगों को मरहम लगाने का काम कर रही है। कोरोना संक्रमण काल में दर्ज मामलों को वापस लेने की सीएम ने घोषणा की है। इससे उस दौर में नियम तोड़ने वाले हजारों लोगों को राहत मिल सकती है। व्यापारी वर्ग भी इसमें शामिल है। जिले में 1111 ऐसे केस हैं, हालांकि इनमें से सभी मामलों में चार्जशीट हो चुकी है।
जिले में कोरोना संक्रमण फैलने की शुरुआत छह अप्रैल को हुई थी। पहला मामला सहसवान की मस्जिद में निकला था। उसके बाद एक-एक करके कोरोना संक्रमितों की संख्या करीब पंद्रह हजार पहुंच गई। जबकि करीब सौ लोगों की मौत हो चुकी है। सहसवान में कोरोना संक्रमित केस निकलने के बाद पुलिस-प्रशासन ने जिले में सख्ती बढ़ा दी थी। वहीं सरकार ने कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगाया था। इसके दो दिन बाद यानी 25 मार्च को देश भर में लॉकडाउन लगा दिया गया था। लोगों को घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी गई थी। धीरे-धीरे लॉकडाउन आगे बढ़ा तो लोगों की परेशानियां बढ़नी शुरू हो गईं। इससे लोगों को घर से निकलना पड़ा। उस समय जिले भर में हर तिराहे चौराहे पर पुलिस तैनात थी। लगातार अधिकारी भी शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक दौड़ लगा रहे थे। इससे जिले में लॉकडाउन का उल्लंघन करने के मामले बढ़ते चले गए। पूरे कोरोना काल में जिलेभर के थानों में 1111 मामले दर्ज हुए। इनमें 3482 लोगों को पकड़ा गया और अधिकांश को जेल भेजा गया। अब तक पुलिस कोविड-19 उल्लंघन के इन सभी मामलों में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इस बीच राहत देने वाली खबर ये है कि प्रदेश सरकार ने कोविड-19 के सभी मामलों को वापस लेने का ऐलान किया है। इस पर पुलिस ने मामलों को सूचीबद्ध करना शुरू कर दिया है।
सहसवान में दर्ज हुआ था पहला कोविड-19 उल्लंघन का मामला
- जिले के सहसवान कस्बे में कोविड-19 उल्लंघन का पहला मामला दर्ज हुआ था। यहीं पहला कोरोना संक्रमित भी निकला था। कोरोना काल के दौरान कुछ लोग दिल्ली से आकर एक मस्जिद में रुके थे। 14 अप्रैल को उनके सैंपल लेकर जांच को भेजे गए थे। जिनमें छह मार्च को मुंबई का पहला व्यक्ति संक्रमित पाया गया था। इनके आने की सूचना प्रशासन को नहीं दी गई थी। इस पर पुलिस ने ग्राम प्रधान समेत समेत कुछ जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
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कोविड-19 के 1111 मामले जिले में दर्ज हुए थे। सभी में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। उस समय करीब 3482 लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। मीडिया से पता चला है कि सरकार ये मामले वापस कर रही है लेकिन अभी हमारे पास लिखित में कोई पत्र नहीं आया है। पत्र आने के बाद इसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी जाएगी। -सिद्धार्थ वर्मा, प्रभारी एसएसपी
- राज्यपाल के स्तर से संस्तुति के बाद इस तरह के केस वापस लिए जा सकते हैं। हालांकि यह न्यायालय की इच्छा पर निर्भर है पर जनहित से जुड़े मामलों में न्यायालय की सहमति भी मिल सकती है। सरकार ऐसा कर रही है तो सराहनीय कदम है, लोग कोरोना की वजह से पहले से ही परेशान हैं। - संदीप मिश्रा, महासचिव जिला बार एसोसिएशन
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जिले में कोरोना संक्रमण फैलने की शुरुआत छह अप्रैल को हुई थी। पहला मामला सहसवान की मस्जिद में निकला था। उसके बाद एक-एक करके कोरोना संक्रमितों की संख्या करीब पंद्रह हजार पहुंच गई। जबकि करीब सौ लोगों की मौत हो चुकी है। सहसवान में कोरोना संक्रमित केस निकलने के बाद पुलिस-प्रशासन ने जिले में सख्ती बढ़ा दी थी। वहीं सरकार ने कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगाया था। इसके दो दिन बाद यानी 25 मार्च को देश भर में लॉकडाउन लगा दिया गया था। लोगों को घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी गई थी। धीरे-धीरे लॉकडाउन आगे बढ़ा तो लोगों की परेशानियां बढ़नी शुरू हो गईं। इससे लोगों को घर से निकलना पड़ा। उस समय जिले भर में हर तिराहे चौराहे पर पुलिस तैनात थी। लगातार अधिकारी भी शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक दौड़ लगा रहे थे। इससे जिले में लॉकडाउन का उल्लंघन करने के मामले बढ़ते चले गए। पूरे कोरोना काल में जिलेभर के थानों में 1111 मामले दर्ज हुए। इनमें 3482 लोगों को पकड़ा गया और अधिकांश को जेल भेजा गया। अब तक पुलिस कोविड-19 उल्लंघन के इन सभी मामलों में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इस बीच राहत देने वाली खबर ये है कि प्रदेश सरकार ने कोविड-19 के सभी मामलों को वापस लेने का ऐलान किया है। इस पर पुलिस ने मामलों को सूचीबद्ध करना शुरू कर दिया है।
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सहसवान में दर्ज हुआ था पहला कोविड-19 उल्लंघन का मामला
- जिले के सहसवान कस्बे में कोविड-19 उल्लंघन का पहला मामला दर्ज हुआ था। यहीं पहला कोरोना संक्रमित भी निकला था। कोरोना काल के दौरान कुछ लोग दिल्ली से आकर एक मस्जिद में रुके थे। 14 अप्रैल को उनके सैंपल लेकर जांच को भेजे गए थे। जिनमें छह मार्च को मुंबई का पहला व्यक्ति संक्रमित पाया गया था। इनके आने की सूचना प्रशासन को नहीं दी गई थी। इस पर पुलिस ने ग्राम प्रधान समेत समेत कुछ जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
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कोविड-19 के 1111 मामले जिले में दर्ज हुए थे। सभी में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। उस समय करीब 3482 लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। मीडिया से पता चला है कि सरकार ये मामले वापस कर रही है लेकिन अभी हमारे पास लिखित में कोई पत्र नहीं आया है। पत्र आने के बाद इसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी जाएगी। -सिद्धार्थ वर्मा, प्रभारी एसएसपी
- राज्यपाल के स्तर से संस्तुति के बाद इस तरह के केस वापस लिए जा सकते हैं। हालांकि यह न्यायालय की इच्छा पर निर्भर है पर जनहित से जुड़े मामलों में न्यायालय की सहमति भी मिल सकती है। सरकार ऐसा कर रही है तो सराहनीय कदम है, लोग कोरोना की वजह से पहले से ही परेशान हैं। - संदीप मिश्रा, महासचिव जिला बार एसोसिएशन