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नागरिकता कानून और एनआरसी के विरोध में ककराला बंद, विरोध प्रदर्शन में हजारों लोग शामिल
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ककराला। नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर मंगलवार को ककराला का माहौल गरम रहा। कस्बे के बाजार बंद रहे। ज्यारत शरीफ पर सुबह से ही लोग जमा होने लगे। यहां से हजारों लोग मार्च के रूप में नगर पालिका के सामने स्थित मैदान में पहुंचे और सीएए व एनआरसी के साथ जामिया यूनिवर्सिटी में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के विरोध में जमकर नारेबाजी की। हाजी मुमताज मियां के नेतृत्व में अधिकारियों को राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।
मंगलवार को मौसम काफी ठंडा रहा। इसके बावजूद शाह सकलैन एकेडमी के आह्वान पर सुबह से ही लोग ज्यारत शरीफ पर जमा होना शुरू हो गए। कस्बे के बाजार खुले ही नहीं। करीब 11 बजे तक मैदान पब्लिक से खचाखच भर चुका था। यहां से लोग मार्च के रूप में नगर पालिका के सामने स्थित मैदान में पहुंचे। लोगों के हाथों में तिरंगा था। वे नागरिक संशोधन एक्ट, राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के विरोध में नारेबाजी कर रहे थे। इस मौके पर शाह सकलैन एकेडमी के अध्यक्ष हाजी मुमताज सकलैन ने कहा कि केंद्र सरकार ने सीएए में मुसलमानों को नजरअंदाज किया है। उन्होंने जामिया यूनिवर्सिटी में घुसकर छात्रों को पीटने संबंधी पुलिस कार्रवाई की भी निंदा की। कहा कि शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करना लोकतंत्र में सभी का अधिकार है। इसके बाद यहां राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एडीएम प्रशासन राम निवास शर्मा, एसडीएम सदर पारस नाथ मौर्य और एसपी सिटी जितेंद्र श्रीवास्तव को दिया गया। ज्ञापन में सीएए पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है।
एहतियातन लगाई गई कई थानों की पुलिस, अफसर बनाए रहे नजर
नागरिकता संशोधन एक्ट और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के विरोध में प्रदर्शन और ककराला बंद के मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने बेहतर सतर्कता से काम लिया। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए रिजर्व फोर्स को तो तैयार रखा ही गया, इसके साथ ही एहतियात के तौर पर सात थानों की पुलिस को भी ककराला में लगाया गया। एसओ अलापुर कृष्ण गोपाल शर्मा के अलावा इंस्पेक्टर हजरतपुर धीरज सोलंकी, उसहैत एसओ अमृतलाल, उसावां एसओ प्रयागराज, मूसाझाग के ललित भाटी, कुंवरगांव के प्रमोद कुमार विरोध प्रदर्शन के दौरान ककराला में मुस्तैद रहे। एसपी सिटी जितेंद्र श्रीवास्तव के साथ सीओ दातागंज एसके सिंह भी दिन भर ककराला में जमे रहे।
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सुबह से ही पुलिस ने शुरू कर दी तैयारी
- विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस ने सुबह से ही तैयारी शुरू कर दी थी। कस्बे के संवेदनशील इलाकों में फोर्स की तैनाती कर दी गई। ककराला के सभी रोड पर बैरियर लगा दिए गए। आने-जाने वाले वाहनों की चेकिंग की गई। सब कुछ शांतिपूर्ण निपटने के बाद पुलिस-प्रशासन ने राहत की सांस ली। दोपहर बाद कस्बे के कुछ बाजार खुल भी गए।
डीएम, एसएसपी भी बनाए रहे नजर
डीएम कुमार प्रशांत और एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी भी पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए रहे। दोनों अधिकारी करीब 11 बजे ककराला पहुंच गए। इनकी गाड़ियां कस्बे में मटका वाली मस्जिद के पास खड़ी रहीं। ज्ञापन दिए जाने और विरोध प्रदर्शन खत्म होने के बाद जब साफ हो गया कि स्थिति अब पूरी तरह सामान्य है तब दोनों अधिकारी अपने अधीनस्थों को जरूरी दिशा निर्देश देने के बाद यहां से निकले।
शहर में भी दिखा असर
ककराला में विरोध प्रदर्शन का असर शहर तक दिखाई दिया। यहां होन वाले प्रदर्शन के मद्देनजर शहर में भी सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रखी गई। शहर के प्रमुख चौराहों समेत मुख्य जगहों पर पुुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। अधिकारी भी घूम-घूम कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे।
सीएए संविधान का उल्लंघन: मुमताज मियां सकलैन
नागरिकता संशोधन कानून पूरी तरह से संविधान का उल्लंघन है। यह देश को बांटने की साजिश है। इसे पूरा नहीं होने दिया जाएगा। मुल्क की आजादी के लिए हमारे बुजुर्गों ने भी कुर्बानियां दी हैं। हिंदुस्तान धार्मिक एकता के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। सरकार को यह कानून वापस लेना चाहिए। अगर सरकार नागरिकता संशोधन कानून को वापस नहीं लेती तो हम किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं।
धर्म निरपेक्ष देश में यह ठीक नहीं: नजीरुल हसन खां
भारत धर्म निरपेक्ष देश है। नागरिकता संशोधन कानून संविधान की धारा 14 और 21 का खुला उल्लंघन है। हमारे देश में सभी धर्मों के लोगों को बराबर का अधिकार है। नागरिकता संशोधन कानून में मुस्लिमों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। इस कानून को किसी भी दशा में लागू नहीं होने दिया जाएगा।
जबरदस्ती कर रही हुकूमत: मौलाना अजहर
हुकूमत जबरदस्ती कर रही है। कोई भी कानून ऐसे ही नहीं थोपा जा सकता। पुलिस ने जामिया यूनिवर्सिटी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिस तरह से छात्रों से बर्बरता की वह निंदनीय है। हम इस कानून के विरोध में खड़े हैं। अगर कानून वापस नहीं लिया गया तो हम आंदोलन को और तेज करेंगे। फिर कदम पीछे खींचने की कोई वजह नहीं होगी।
सीएए एक काला कानून: मौलाना रिफाकत नईमी
भारत के सभी धर्मों को समान अधिकार हैं। सीएए काला कानून है। यह देश को बांटने वाला साबित होगा। इस काले कानून के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा। सीएए के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके बावजूद सरकार फैसले पर पुनर्विचार करने के स्थान पर प्रदर्शन करने वालों पर बल प्रयोग कर रही है। इससे विश्व में भारत की छवि खराब हो रही है।
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मंगलवार को मौसम काफी ठंडा रहा। इसके बावजूद शाह सकलैन एकेडमी के आह्वान पर सुबह से ही लोग ज्यारत शरीफ पर जमा होना शुरू हो गए। कस्बे के बाजार खुले ही नहीं। करीब 11 बजे तक मैदान पब्लिक से खचाखच भर चुका था। यहां से लोग मार्च के रूप में नगर पालिका के सामने स्थित मैदान में पहुंचे। लोगों के हाथों में तिरंगा था। वे नागरिक संशोधन एक्ट, राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के विरोध में नारेबाजी कर रहे थे। इस मौके पर शाह सकलैन एकेडमी के अध्यक्ष हाजी मुमताज सकलैन ने कहा कि केंद्र सरकार ने सीएए में मुसलमानों को नजरअंदाज किया है। उन्होंने जामिया यूनिवर्सिटी में घुसकर छात्रों को पीटने संबंधी पुलिस कार्रवाई की भी निंदा की। कहा कि शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करना लोकतंत्र में सभी का अधिकार है। इसके बाद यहां राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एडीएम प्रशासन राम निवास शर्मा, एसडीएम सदर पारस नाथ मौर्य और एसपी सिटी जितेंद्र श्रीवास्तव को दिया गया। ज्ञापन में सीएए पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है।
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एहतियातन लगाई गई कई थानों की पुलिस, अफसर बनाए रहे नजर
नागरिकता संशोधन एक्ट और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के विरोध में प्रदर्शन और ककराला बंद के मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने बेहतर सतर्कता से काम लिया। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए रिजर्व फोर्स को तो तैयार रखा ही गया, इसके साथ ही एहतियात के तौर पर सात थानों की पुलिस को भी ककराला में लगाया गया। एसओ अलापुर कृष्ण गोपाल शर्मा के अलावा इंस्पेक्टर हजरतपुर धीरज सोलंकी, उसहैत एसओ अमृतलाल, उसावां एसओ प्रयागराज, मूसाझाग के ललित भाटी, कुंवरगांव के प्रमोद कुमार विरोध प्रदर्शन के दौरान ककराला में मुस्तैद रहे। एसपी सिटी जितेंद्र श्रीवास्तव के साथ सीओ दातागंज एसके सिंह भी दिन भर ककराला में जमे रहे।
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सुबह से ही पुलिस ने शुरू कर दी तैयारी
- विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस ने सुबह से ही तैयारी शुरू कर दी थी। कस्बे के संवेदनशील इलाकों में फोर्स की तैनाती कर दी गई। ककराला के सभी रोड पर बैरियर लगा दिए गए। आने-जाने वाले वाहनों की चेकिंग की गई। सब कुछ शांतिपूर्ण निपटने के बाद पुलिस-प्रशासन ने राहत की सांस ली। दोपहर बाद कस्बे के कुछ बाजार खुल भी गए।
डीएम, एसएसपी भी बनाए रहे नजर
डीएम कुमार प्रशांत और एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी भी पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए रहे। दोनों अधिकारी करीब 11 बजे ककराला पहुंच गए। इनकी गाड़ियां कस्बे में मटका वाली मस्जिद के पास खड़ी रहीं। ज्ञापन दिए जाने और विरोध प्रदर्शन खत्म होने के बाद जब साफ हो गया कि स्थिति अब पूरी तरह सामान्य है तब दोनों अधिकारी अपने अधीनस्थों को जरूरी दिशा निर्देश देने के बाद यहां से निकले।
शहर में भी दिखा असर
ककराला में विरोध प्रदर्शन का असर शहर तक दिखाई दिया। यहां होन वाले प्रदर्शन के मद्देनजर शहर में भी सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रखी गई। शहर के प्रमुख चौराहों समेत मुख्य जगहों पर पुुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। अधिकारी भी घूम-घूम कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे।
सीएए संविधान का उल्लंघन: मुमताज मियां सकलैन
नागरिकता संशोधन कानून पूरी तरह से संविधान का उल्लंघन है। यह देश को बांटने की साजिश है। इसे पूरा नहीं होने दिया जाएगा। मुल्क की आजादी के लिए हमारे बुजुर्गों ने भी कुर्बानियां दी हैं। हिंदुस्तान धार्मिक एकता के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। सरकार को यह कानून वापस लेना चाहिए। अगर सरकार नागरिकता संशोधन कानून को वापस नहीं लेती तो हम किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं।
धर्म निरपेक्ष देश में यह ठीक नहीं: नजीरुल हसन खां
भारत धर्म निरपेक्ष देश है। नागरिकता संशोधन कानून संविधान की धारा 14 और 21 का खुला उल्लंघन है। हमारे देश में सभी धर्मों के लोगों को बराबर का अधिकार है। नागरिकता संशोधन कानून में मुस्लिमों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। इस कानून को किसी भी दशा में लागू नहीं होने दिया जाएगा।
जबरदस्ती कर रही हुकूमत: मौलाना अजहर
हुकूमत जबरदस्ती कर रही है। कोई भी कानून ऐसे ही नहीं थोपा जा सकता। पुलिस ने जामिया यूनिवर्सिटी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिस तरह से छात्रों से बर्बरता की वह निंदनीय है। हम इस कानून के विरोध में खड़े हैं। अगर कानून वापस नहीं लिया गया तो हम आंदोलन को और तेज करेंगे। फिर कदम पीछे खींचने की कोई वजह नहीं होगी।
सीएए एक काला कानून: मौलाना रिफाकत नईमी
भारत के सभी धर्मों को समान अधिकार हैं। सीएए काला कानून है। यह देश को बांटने वाला साबित होगा। इस काले कानून के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा। सीएए के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके बावजूद सरकार फैसले पर पुनर्विचार करने के स्थान पर प्रदर्शन करने वालों पर बल प्रयोग कर रही है। इससे विश्व में भारत की छवि खराब हो रही है।