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पिछले साल का मुनाफा देख कर बैठे आलू का भंडारण, अब रेट में गिरावट से परेशान
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उझानी (बदायूं)। सब्जियों के राजा आलू की बेकदरी शुरू हो गई है। पिछले साल इन दिनों रेट में चमक पर किसानों के साथ थोक के व्यापारियों को आगे चलकर अच्छे मुनाफा की उम्मीद जग गई थी। किसानों ने उत्पादन के दौरान बिक्री के बजाय कोल्ड स्टोरेज की ओर रुख किया तो थोक व्यापारी उनसे चार कदम आगे निकल गए। दोनों ने जमकर भंडारण किया। अब निकासी शुरू हुई तो रेट गिरने लग गया है।
इलाके में आलू का थोक व्यापार खासकर आगरा और दिल्ली की मंडियों के रेट पर काफी हद तक निर्भर है। रेट बढ़ते हैं तो आलू पर चमक, नहीं तो घाटे की आशंका बढ़ जाती है। कमोबेश ऐसे ही दौर से गुजर रहे आलू के थोक व्यापार के जानकारों की मानें तो इस साल आलू की बेकदरी की दूसरी वजह कोल्ड स्टोरेजों में अत्यधिक भंडारण रही है। पिछले साल खोदाई के समय से ही आलू के रेट ठीक ठाक मिले तो उत्पादकों ने खेतों से 80 फीसदी तक माल बेच दिया। थोक के व्यापारियों ने कोल्ड स्टोरेजों से निकासी के दौरान दोगुने तक मुनाफा कमा लिया। इस हकीकत से रूबरू किसानों ने इस बार खुद ही मुनाफा कमाने की आस में सर्वाधिक मात्रा में भंडारण किया। थोक के व्यापारियों ने भंडारण तो किया लेकिन वह व्यापार की नजाकत को समझते हुए ज्यादा आगे नहीं बढ़े।
फिलहाल आलू का रेट थोक में करीब नौ सौ रुपया प्रति क्विंटल है। भंडारण करते समय अच्छी गुणवत्ता का आलू छह सौ रुपये तक, उसमें भंडारण का खर्चा जोड़ कर देखें तो नौ सौ रुपया प्रति क्विंटल तक पहुंचा। थोक का बाजार भी नौ सौ रुपया प्रति क्विंटल पर पहुंचकर ठहर गया है। पिछले साल जुलाई महीना में कोल्ड स्टोरेज से निकासी के दौरान ही थोक में आलू 15 सौ रुपया प्रति क्विंटल बिका था। थोक व्यापारियों को अक्तूबर और नवंबर में भी रेट में कोई खास वृद्धि की उम्मीद नहीं है। थोक व्यापार करने में माहिर व्यापारी कोल्ड स्टोरेजों से निकासी को लेकर कोई जोखिम भी उठना नहीं चाहते। थोक व्यापारियों ने करीब 65 फीसदी तक निकासी कराके आलू बेच दिया है। उत्पादक इस उम्मीद में है कि आने वाले दिनों में शादियों के सीजन में रेट बढ़ा तो बोआई से बचे आलू को मार्केट में बेच देंगे।
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लाल आलू का भाव भी पहले के मुकाबले नौ रुपये कम
उझानी। करीब दो दशक पहले तक लाल आलू को बहुत कम पसंद करने वाले लोगों पर धीरे-धीरे जायका सवार हुआ तो उसके रेट भी बढ़ते चले गए। पांच-छह साल से लाल आलू का रेट सफेद से अधिक ही रहता है। पिछले साल इन दिनों में लाल आलू दो हजार रुपया प्रति क्विंटल तक बिक गया। इसका उत्पादन इलाके में काफी है। इस बार कोल्ड स्टोरेज से निकासी के दौरान 11 सौ रुपया प्रति क्विंटल का रेट चल रहा है। लाल आलू के उत्पादक भी परेशान हैं। शादी समारोह और दावतों में इसका इस्तेमाल सीमित है। घरेलू इस्तेमाल में उसकी डिमांड है पर सफेद के रेट में गिरावट की वजह से लाल आलू पर गौर नहीं किया जा रहा है। सफेद आलू फुटकर में 10-11 रुपये का किलो बिक रहा है।
कोल्ड स्टोरेजों में किसानों का आलू बहुतायत में भंडारित है। बोआई का सीजन शुरू होने पर निकासी जोर पकड़ेगी लेकिन जिन किसानों ने मुनाफे के लिए भंडारण किया, उन्हें कोई खास फायदे की उम्मीद नजर नहीं आती। किसान फिलहाल पसोपेश में हैं। - नितिन गुप्ता, कोल्ड स्टोरेज मालिक।
थोक के व्यापारियों ने कोल्ड स्टोरेजों से आलू की निकासी पिछले महीने ही शुरू कर दी। अधिकतर मात्रा में आलू की निकासी हो चुकी है। दिशावर में डिमांड कम है। पैदावार भी अधिक हुई थी। जिस साल रेट ज्यादा होता है, उसके अगले साल रकबा बढ़ जाता है। - अशोक जैन, कोल्ड स्टोरेज मालिक।
इस साल थोक के व्यापार में घाटा रहा है। किसानों की तरह उन्हें भी छंटाई से लेकर किराए तक पर खर्चा उठाना पड़ा है। निकासी के बाद भी खराब आलू की छंटाई होती है। दिल्ली-आगरा में रेट बढ़ नहीं रहे हैं। जिले में खपत है लेकिन कोल्ड स्टोरेजों में मौजूद पूरा आलू खप नहीं सकता। - प्रवेश शर्मा, थोक व्यापारी।
किसानों ने इस उम्मीद के साथ आलू का भंडारण किया था कि निकासी के दिनों में अच्छा रेट मिलने पर अच्छा मुनाफा होगा। रेट नहीं बढ़ने से अब लागत भी निकलना मुश्किल है। अच्छा रहता कि वह खोदाई के समय ही आलू को खेतों से ही बेच देते। तब नुकसान नहीं होता। - गोविंद, किसान।
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इलाके में आलू का थोक व्यापार खासकर आगरा और दिल्ली की मंडियों के रेट पर काफी हद तक निर्भर है। रेट बढ़ते हैं तो आलू पर चमक, नहीं तो घाटे की आशंका बढ़ जाती है। कमोबेश ऐसे ही दौर से गुजर रहे आलू के थोक व्यापार के जानकारों की मानें तो इस साल आलू की बेकदरी की दूसरी वजह कोल्ड स्टोरेजों में अत्यधिक भंडारण रही है। पिछले साल खोदाई के समय से ही आलू के रेट ठीक ठाक मिले तो उत्पादकों ने खेतों से 80 फीसदी तक माल बेच दिया। थोक के व्यापारियों ने कोल्ड स्टोरेजों से निकासी के दौरान दोगुने तक मुनाफा कमा लिया। इस हकीकत से रूबरू किसानों ने इस बार खुद ही मुनाफा कमाने की आस में सर्वाधिक मात्रा में भंडारण किया। थोक के व्यापारियों ने भंडारण तो किया लेकिन वह व्यापार की नजाकत को समझते हुए ज्यादा आगे नहीं बढ़े।
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फिलहाल आलू का रेट थोक में करीब नौ सौ रुपया प्रति क्विंटल है। भंडारण करते समय अच्छी गुणवत्ता का आलू छह सौ रुपये तक, उसमें भंडारण का खर्चा जोड़ कर देखें तो नौ सौ रुपया प्रति क्विंटल तक पहुंचा। थोक का बाजार भी नौ सौ रुपया प्रति क्विंटल पर पहुंचकर ठहर गया है। पिछले साल जुलाई महीना में कोल्ड स्टोरेज से निकासी के दौरान ही थोक में आलू 15 सौ रुपया प्रति क्विंटल बिका था। थोक व्यापारियों को अक्तूबर और नवंबर में भी रेट में कोई खास वृद्धि की उम्मीद नहीं है। थोक व्यापार करने में माहिर व्यापारी कोल्ड स्टोरेजों से निकासी को लेकर कोई जोखिम भी उठना नहीं चाहते। थोक व्यापारियों ने करीब 65 फीसदी तक निकासी कराके आलू बेच दिया है। उत्पादक इस उम्मीद में है कि आने वाले दिनों में शादियों के सीजन में रेट बढ़ा तो बोआई से बचे आलू को मार्केट में बेच देंगे।
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लाल आलू का भाव भी पहले के मुकाबले नौ रुपये कम
उझानी। करीब दो दशक पहले तक लाल आलू को बहुत कम पसंद करने वाले लोगों पर धीरे-धीरे जायका सवार हुआ तो उसके रेट भी बढ़ते चले गए। पांच-छह साल से लाल आलू का रेट सफेद से अधिक ही रहता है। पिछले साल इन दिनों में लाल आलू दो हजार रुपया प्रति क्विंटल तक बिक गया। इसका उत्पादन इलाके में काफी है। इस बार कोल्ड स्टोरेज से निकासी के दौरान 11 सौ रुपया प्रति क्विंटल का रेट चल रहा है। लाल आलू के उत्पादक भी परेशान हैं। शादी समारोह और दावतों में इसका इस्तेमाल सीमित है। घरेलू इस्तेमाल में उसकी डिमांड है पर सफेद के रेट में गिरावट की वजह से लाल आलू पर गौर नहीं किया जा रहा है। सफेद आलू फुटकर में 10-11 रुपये का किलो बिक रहा है।
कोल्ड स्टोरेजों में किसानों का आलू बहुतायत में भंडारित है। बोआई का सीजन शुरू होने पर निकासी जोर पकड़ेगी लेकिन जिन किसानों ने मुनाफे के लिए भंडारण किया, उन्हें कोई खास फायदे की उम्मीद नजर नहीं आती। किसान फिलहाल पसोपेश में हैं। - नितिन गुप्ता, कोल्ड स्टोरेज मालिक।
थोक के व्यापारियों ने कोल्ड स्टोरेजों से आलू की निकासी पिछले महीने ही शुरू कर दी। अधिकतर मात्रा में आलू की निकासी हो चुकी है। दिशावर में डिमांड कम है। पैदावार भी अधिक हुई थी। जिस साल रेट ज्यादा होता है, उसके अगले साल रकबा बढ़ जाता है। - अशोक जैन, कोल्ड स्टोरेज मालिक।
इस साल थोक के व्यापार में घाटा रहा है। किसानों की तरह उन्हें भी छंटाई से लेकर किराए तक पर खर्चा उठाना पड़ा है। निकासी के बाद भी खराब आलू की छंटाई होती है। दिल्ली-आगरा में रेट बढ़ नहीं रहे हैं। जिले में खपत है लेकिन कोल्ड स्टोरेजों में मौजूद पूरा आलू खप नहीं सकता। - प्रवेश शर्मा, थोक व्यापारी।
किसानों ने इस उम्मीद के साथ आलू का भंडारण किया था कि निकासी के दिनों में अच्छा रेट मिलने पर अच्छा मुनाफा होगा। रेट नहीं बढ़ने से अब लागत भी निकलना मुश्किल है। अच्छा रहता कि वह खोदाई के समय ही आलू को खेतों से ही बेच देते। तब नुकसान नहीं होता। - गोविंद, किसान।