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Budaun News: मुनाफे की आस में बहे आलू उत्पादकों के अरमान, शीतगृहों में छोड़े दो लाख बोरे
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उझानी में सूना पड़ा कोल्ड स्टोरेज। संवाद
उझानी। शीतगृहों में आलू का भंडारण करके अच्छे भाव की उम्मीद पाले बैठे उत्पादकों के अरमानों पर पानी फिर गया है। बोआई से पहले तक सिर्फ यही सोचकर व्यापारियों से सौदा नहीं किया कि भाव और बढ़ेगा। पिछले महीने के मुकाबले थोक भाव में प्रति क्विंटल तीन सौ रुपये तक की गिरावट की वजह से उत्पादकों ने करीब दो लाख बोरे आलू शीतगृहों में ही छोड़ दिया है।
जिले में कुल 129 शीतगृह हैं। अधिकतर शीतगृहों में इन दिनों उत्पादकों का आलू रखा हुआ है। बदायूं, उझानी, बिल्सी, बिसौली, सहसवान समेत ऐसा कोई इलाका नहीं, जहां के शीतगृह मालिक चिंतित न हों। उझानी निवासी शीतगृह मालिक अमित मित्तल ने बताया कि जिले में अब करीब एक दर्जन शीतगृह ही पूरी तरह खाली हो पाए हैं। स्थानीय स्तर पर ही शीतगृहों में करीब 50 हजार बोरे डंप हैं। पूरा माल उत्पादकों का है। भाव में गिरावट की वजह से वह शीतगृहों की ओर रुख नहीं कर रहे हैं।
इनमें कुछेक व्यापारी भी हैं, जिन्हें उत्पादकों की तरह अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी। उन्हें भी लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है। उत्पादक चंद्रपाल ने बताया कि तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल शीतगृह का भाड़ा है। वह अगर आलू बाहर निकालते हैं तो शीतगृह का भाड़ा चुकाना आसान नहीं होगा।
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बता दें कि पिछले महीने आलू का थोक भाव आठ-नौ सौ रुपये प्रति क्विंटल था। उस वक्त उत्पादक अगर व्यापारियों से सौदा कर लेते तो जमा- खर्चा निकल आने के साथ मुनाफा भी मिल जाता।
शीतगृहों में आलू मौजूद, कैसे करें गाइडलाइन का पालन
शीतगृहों में किसानों का आलू मौजूद होने से खासकर मालिकों के सामने अजीब उलझन आ गई है। उन्हें उम्मीद है कि इस सप्ताह कुछेक उत्पादक जरूर आएंगे, जबकि उद्यान विभाग की ओर से शीतगृहों को पूरी तरह खाली किए जाने की गाइडलाइन पहले से तय है। 30 नवंबर तक हरेक शीतगृह को खाली किया जाना होता है। ऐसे में शीतगृह मालिक फिलहाल आलू बाहर भी नहीं फिंकवा सकते।
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जिले में कुल 129 शीतगृह हैं। अधिकतर शीतगृहों में इन दिनों उत्पादकों का आलू रखा हुआ है। बदायूं, उझानी, बिल्सी, बिसौली, सहसवान समेत ऐसा कोई इलाका नहीं, जहां के शीतगृह मालिक चिंतित न हों। उझानी निवासी शीतगृह मालिक अमित मित्तल ने बताया कि जिले में अब करीब एक दर्जन शीतगृह ही पूरी तरह खाली हो पाए हैं। स्थानीय स्तर पर ही शीतगृहों में करीब 50 हजार बोरे डंप हैं। पूरा माल उत्पादकों का है। भाव में गिरावट की वजह से वह शीतगृहों की ओर रुख नहीं कर रहे हैं।
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इनमें कुछेक व्यापारी भी हैं, जिन्हें उत्पादकों की तरह अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी। उन्हें भी लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है। उत्पादक चंद्रपाल ने बताया कि तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल शीतगृह का भाड़ा है। वह अगर आलू बाहर निकालते हैं तो शीतगृह का भाड़ा चुकाना आसान नहीं होगा।
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बता दें कि पिछले महीने आलू का थोक भाव आठ-नौ सौ रुपये प्रति क्विंटल था। उस वक्त उत्पादक अगर व्यापारियों से सौदा कर लेते तो जमा- खर्चा निकल आने के साथ मुनाफा भी मिल जाता।
शीतगृहों में आलू मौजूद, कैसे करें गाइडलाइन का पालन
शीतगृहों में किसानों का आलू मौजूद होने से खासकर मालिकों के सामने अजीब उलझन आ गई है। उन्हें उम्मीद है कि इस सप्ताह कुछेक उत्पादक जरूर आएंगे, जबकि उद्यान विभाग की ओर से शीतगृहों को पूरी तरह खाली किए जाने की गाइडलाइन पहले से तय है। 30 नवंबर तक हरेक शीतगृह को खाली किया जाना होता है। ऐसे में शीतगृह मालिक फिलहाल आलू बाहर भी नहीं फिंकवा सकते।