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Budaun News: सड़कों पर बिखरी प्लास्टिक, लेकिन गांवों से नदारद बैंक

Wed, 11 Dec 2024 11:37 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 11 Dec 2024 11:37 AM IST
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Plastic is scattered on the roads, but banks are missing from the villages
कादरचौक के भमुईया में रखा प्ला​स्टिक बैंक। संवाद
बदायूं। ग्राम पंचायतों में प्लास्टिक को एकत्र करने के उद्देश्य से बनाए गए प्लास्टिक बैंकों का महज एक साल में ही अस्तित्व खत्म हो गया। सात लाख रुपये खर्च करके जिले की 100 ग्राम पंचायतों में बनाए गए प्लास्टिक बैंक अब गांवों से नदारद हैं। कुछेक जगह हैं भी तो वहां इनका इस्तेमाल नहीं हो रहा।
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प्लास्टिक से होने वाले नुकसान को देखते हुए सरकार ने प्लास्टिक एकत्र करने के लिए व्यवस्था की थी। इस योजना के तहत जिले की 100 ग्राम पंचायतों में जालीदार छह फुट लंबे और दो मीटर चौड़े प्लास्टिक के डिब्बे (प्लास्टिक बैंक) बनवाकर गांवों के चौराहों पर रखवाए गए थे।
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इनमें ठोस और तरल कूड़े को एकत्र कर उपयोगी बनाने के अलावा निस्तारण भी किया जाना था। प्लास्टिक का कूड़ा इन्हीं में डालने के लिए ग्रामीणों को जागरूक भी किया गया था। यह बैंक वर्ष 2022-23 में बनवाए गए। बाद में एक साल में भी यह योजना अधिकारियों और ग्राम प्रधानों की लापरवाही से दम तोड़ गई। अधिकांश गांवों से प्लास्टिक बैंक नदारद हो गए। ऐसे में सरकार के खर्च किए रुपये अधिकारियों की अनदेखी के चलते बर्बाद हो गए। अब किसी अधिकारी का इस तरफ ध्यान तक नहीं जा रहा है।
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--नहीं दिखे प्लास्टिक एकत्र करने के लिए रखे डिब्बे
जिले में ऐसे तमाम गांव है जहां से प्लास्टिक बैंक नदारद हैं। पड़ताल के दौरान सामने आया कि गांव खेड़ा नवादा में प्लास्टिक बैंक बना था, लेकिन अब इस गांव में डिब्बे तक नहीं हैं। इतना ही नहीं रमजानपुर, बेहटा, जलालपुर, लभारी, सकरी कासमपुर समेत अधिकतर गांवों में प्लास्टिक बैंक नदारद मिले। जबकि ग्राम पंचायत भमुईया में जाकर देखा तो वहां पर बैंक तो था, लेकिन यहां प्लास्टिक एकत्र नहीं की जा रही थी।

प्लास्टिक निस्तारण के लिए लगी फैक्टरी भी बंद
गांवों में प्लास्टिक बैंक लगवाने के अलावा ब्लाॅक सलारपुर क्षेत्र के गांव देहमी में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन इकाई बनाई गई थी। इस फैक्टरी में गांवों से निकलने वाली प्लास्टिक को पहुंचाना था लेकिन गांवों से प्लास्टिक नहीं आई। क्योंकि कुछ ग्राम पंचायतों में यह बैंक बने ही नहीं और जहां पर बनें वहां पर प्लास्टिक को एकत्र नहीं किया गया। ऐसे में फैक्टरी में प्लास्टिक नहीं पहुंची जिसके चलते इसको बंद करना पड़ा।



जहां पर प्लास्टिक बैंक नहीं हैं। वहां पर दिखवाया जाएगा। लोगों में जागरूकता की कमी है। लोगों को जागरूक भी किया जाएगा। जिससे बैंक में ही प्लास्टिक एकत्र करें।
-याबर अब्बास, डीपीआरओ
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