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Budaun News: रस्म-अदायगी के गड्ढे में लगे पौधों की टूटीं सांसें

Tue, 14 Jul 2026 01:27 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Tue, 14 Jul 2026 01:27 AM IST
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Plants in the pits dug merely as a token gesture are gasping their last.
बदायूं। पिछले पांच साल में जनपद में 2,72,46,124 पौधे रोपे गए। इस दावे की पड़ताल की गई तो पौधरोपण करने वाली जगहों से पौधों का नामो-निशान ही नहीं मिला। नूरपुर झील, उसहैत, बिसौली सहित कई क्षेत्रों में लाखों पौधे अनदेखी के कारण नष्ट हो गए हैं। पिछले साल रोपे गए 53,76,125 पौधों के बाद अधिकारी जनपद में .34 प्रतिशत वन क्षेत्र बढ़ने का दावा जरूर कर रहे हैं। आंकड़ों के इस खेल की हकीकत कछला वन क्षेत्र में देखने को भी मिल रही है। वर्ष 2025 में कीर्तिमान स्थापित करने के लिए 64 हजार पौधे रोपे गए थे, लेकिन उनमें से आधे ही जीवित बचे हैं। इसकी मुख्य वजह विभागों के पास संसाधनों की कमी है, क्योंकि वन विभाग के पास जरूरी संसाधन होते हैं। ऐसे में वह 65 से 70 फीसदी पौधे बचा लेते हैं।
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लेकिन पौधरोपण अभियान के तहत अन्य 27 विभागों के पास पौधों की सुरक्षा और सिंचाई के लिए संसाधन नहीं है। नतीजा, लगभग 20 से 25 फीसदी फीसदी ही पौधे बच पाते हैं। 28 सरकारी विभागों के पास पौधे रोपने के बाद उनके संरक्षण की जिम्मेदारी रहती है।
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कुढ़ा शाहपुर से ककोड़ा तक बनी थी हरित पट्टी:- ब्लाॅक कादरचौक क्षेत्र के कुढ़ा शाहपुर से ककोड़ा तक हरित पट्टी पांच साल पहले बनाई गई थी, करीब चार किलोमीटर के इस मार्ग पर दोनों ओर पौधे लगे थे, लेकिन इस मार्ग की हालत यह है कि हरित पट्टी जैसा कुछ नजर नहीं आता है। कहीं-कहीं पर पेड़ सड़क किनारे नजर आते हैं। बाकी सड़क सूनी पड़ी है। अफसरों की अनदेखी की वजह से पौधे नष्ट हो गए।
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एक पौधे पर खर्च होते हैं साढ़े चार रुपये :- जिले में हर साल लाखों पौधे लगाए गए हैं। विभाग के अनुसार, प्रति पौधे पर करीब चार रुपये खर्च होते हैं।
इसमें दो रुपये पौधे पर, 50 पैसे प्रति गड्ढा, नराई-सिंचाई पर डेढ़ रुपये खर्च होंगे।
खुले में लगे थे पौधे, खा गए जानवर:उसहैत। पिछले वर्ष नगर पंचायत उसहैत की ओर गोशाला के पास पौधरोपण किया गया था, इसमें चारों तरफ से तारों की बाड़ बनाई गई थी।

उसमें कुछ पौधे जीवित हैं। वन विभाग की ओर से उसहैत कटरा मार्ग पर पौधरोपण हुआ था, वहां भी कुछ पौधे जीवित हैं। ग्राम पंचायतों की ओर से कराए पौधरोपण में भी ज्यादातर पौधे जीवित नहीं बचे हैं। ग्राम पंचायत कटरा सादतगंज के प्रधान का कहना था कि खुले में पौधे लगे थे, इसलिए जानवर खा गए। कुछ ही पौधे जीवित बचे हैं। संवाद
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