{"_id":"5d272d368ebc3e6cd8781183","slug":"other-badaun-news-bly368171499","type":"story","status":"publish","title_hn":"...नुमाइंदों को खुद साफ कराने होंगे अपने %चेहरे%","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...नुमाइंदों को खुद साफ कराने होंगे अपने %चेहरे%
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उझानी (बदायूं)। चुनाव आचार संहिता के दौरान स्वागत द्वार और यात्री शेड पर लगे पोस्टर तो हवा के झोंकों के साथ खुद ही फटकर उड़ गए लेकिन दिक्कत अधिकतर उन स्थानों पर बढ़ी जहां कर्मचारियों ने उन्हें कवर से ढकने की बजाय रंग लगाकर बेतरतीब तरीके से पोत डाला। दो महीने गुजरने वाले हैं लेकिन नुमाइंदों के चेहरे साफ नजर नहीं आते। ऐसे में अब नुमाइंदों को खुद ही अपने चेहरे साफ कराने होंगे।
आचार संहिता के पालन के लिए जो स्वागत द्वार और यात्री शेड पेपर रोल या पॉलीथिन के कवर से ढकवाए गए थे, वह अब पूरी तरह साफ नजर आ रहे हैं। उनके ऊपर से कवर हटाने की जिम्मेदारी सरकारी कर्मचारियों ने नहीं निभाई, बल्कि वह तो हवा के झोंके से चीथड़े की तरह गायब हो गए। बावजूद इसके, ज्यादातर यात्री शेड पर छपे फोटो रंग से पोत दिए गए थे। रंग भी ऐसा इस्तेमाल किया गया कि हाल में ही हुई बारिश से भी नहीं धुल पाया। ऐसे यात्री शेड पर नुमाइंदों के नाम तो साफ नजर आते हैं लेकिन उनके चेहरे को गौर करने पर भी पहचाना नहीं जा सकता। ऐसे में उन्हें अपना चेहरा साफ दिखाने के लिए सफाई करानी होगी।
सफाई कराने को नहीं अतिरिक्त कोष, खुद ही उठाना होगा खर्चा
उझानी। लोकसभा और राज्यसभा सदस्य, विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य आदि अपनी निधि से स्वागत द्वार और यात्री शेड का निर्माण करा सकते हैं लेकिन उनके रखरखाव से लेकर सफाई के लिए अतिरिक्त कोष की व्यवस्था नहीं होती। आचार संहिता के दौरान रंगे-पुते यात्री शेड और स्वागत द्वार साफ कराने के लिए निर्माण कराने वाले को ही खर्चा उठाना पड़ेगा।
विज्ञापन
भ्रमण के दौरान यात्री शेड के फोटो पर पुते रंग को देख लिया है। हां, यह सही है कि कवर से ढके जाने पर दिक्कत नहीं होती लेकिन अब हम अपने स्तर से यात्री शेड की सफाई कराएंगे।
- आरके शर्मा, विधायक, बिल्सी।
लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के आदेश पर कार्रवाई की गई थी। कवर हटवाने और रंग की धुलाई कराने की जिम्मेदारी प्रशासन की नहीं है, इसके लिए क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों को ही कदम उठाने होंगे।
- रामनिवास शर्मा, एडीएम, प्रशासन।
विज्ञापन
आचार संहिता के पालन के लिए जो स्वागत द्वार और यात्री शेड पेपर रोल या पॉलीथिन के कवर से ढकवाए गए थे, वह अब पूरी तरह साफ नजर आ रहे हैं। उनके ऊपर से कवर हटाने की जिम्मेदारी सरकारी कर्मचारियों ने नहीं निभाई, बल्कि वह तो हवा के झोंके से चीथड़े की तरह गायब हो गए। बावजूद इसके, ज्यादातर यात्री शेड पर छपे फोटो रंग से पोत दिए गए थे। रंग भी ऐसा इस्तेमाल किया गया कि हाल में ही हुई बारिश से भी नहीं धुल पाया। ऐसे यात्री शेड पर नुमाइंदों के नाम तो साफ नजर आते हैं लेकिन उनके चेहरे को गौर करने पर भी पहचाना नहीं जा सकता। ऐसे में उन्हें अपना चेहरा साफ दिखाने के लिए सफाई करानी होगी।
विज्ञापन
सफाई कराने को नहीं अतिरिक्त कोष, खुद ही उठाना होगा खर्चा
उझानी। लोकसभा और राज्यसभा सदस्य, विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य आदि अपनी निधि से स्वागत द्वार और यात्री शेड का निर्माण करा सकते हैं लेकिन उनके रखरखाव से लेकर सफाई के लिए अतिरिक्त कोष की व्यवस्था नहीं होती। आचार संहिता के दौरान रंगे-पुते यात्री शेड और स्वागत द्वार साफ कराने के लिए निर्माण कराने वाले को ही खर्चा उठाना पड़ेगा।
विज्ञापन
भ्रमण के दौरान यात्री शेड के फोटो पर पुते रंग को देख लिया है। हां, यह सही है कि कवर से ढके जाने पर दिक्कत नहीं होती लेकिन अब हम अपने स्तर से यात्री शेड की सफाई कराएंगे।
- आरके शर्मा, विधायक, बिल्सी।
लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के आदेश पर कार्रवाई की गई थी। कवर हटवाने और रंग की धुलाई कराने की जिम्मेदारी प्रशासन की नहीं है, इसके लिए क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों को ही कदम उठाने होंगे।
- रामनिवास शर्मा, एडीएम, प्रशासन।