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Budaun News: जिले में सिर्फ 10 पैथोलॉजी लैब पंजीकृत... कलेक्शन सेंटर गली-गली

Thu, 28 Mar 2024 04:04 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 28 Mar 2024 04:04 AM IST
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Only 10 pathology labs are registered in the district...Collection Center Gali-Gali
बदायूं। पिछले साल जिले में स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती के चलते डेंगू और मलेरिया ने कहर बरपाया था। तब डीएम मनोज कुमार ने जिले में चल रहीं अवैध पैथाेलॉजी लैब बंद कराने के आदेश दिए थे लेकिन स्वास्थ्य विभाग आज तक इन्हें बंद नहीं करा सका है। यही कारण है अवैध लैब संचालक बेरोकटोक गली-मोहल्लों में दुकानें सजाए बैठे हैं। जिले में कुल 10 लैब ही स्वास्थ्य विभाग से पंजीकृत हैं, जबकि जिले में एक हजार से अधिक लैब संचालित हो रही हैं। गांव से कस्बों तक अप्रशिक्षित कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है।
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जिला अस्पताल आए मरीज राजेश ने बताया कि एक पैथोलॉजी लैब से जांच कराई थी तो प्लेटलेट्स 80 हजार बताई गईं थीं। कुछ देर बाद दूसरी पैथोलॉजी से जांच कराई तो प्लेटलेट्स एक लाख निकलीं। चिकित्सक भी दो रिपोर्ट देख हैरत में पड़ गए। रोगी आनंदकर मिश्रा ने बताया कि उनको बुखार आ रहा था। डॉक्टर ने जांच कराने को लिखा। निजी लैब में जांच कराई तो रिपोर्ट में प्लेटलेट्स 40 हजार दर्शाई गईं। इसके बाद जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। यहां जांच हुई तो प्लेटलेट्स सही थीं, खून की कमी सामने आई।
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इन रिपोर्टों के हिसाब से इलाज होने पर कई बार मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है। यह हाल केवल शहर ही नहीं बल्कि पूरे जिले में है। कस्बों में तो हर गली-मोहल्ले में पैथोलॉजी की दुकानें हैं। रोजाना इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। सहसवान, उझानी, बिल्सी, बिसौली, सैदपुर, वजीरगंज, कुंवरगांव, बिनावर, दातागंज अलापुर म्याऊ, उसहैत, उसावां में तमाम लैब कलेक्शन सेंटर के नाम से चल रही हैं।
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डॉक्टर भी देते हैं बढ़ावा

इन पैथाेलॉजी के फलने-फूलने में झोलाछाप चिकित्सकों का भी आशीर्वाद रहता है। संचालक चिकित्सकों से जांच का कमीशन तय कर लेते हैं। इसके बाद अस्पताल आने वाले मरीजों को डॉक्टर इन्हीं पैथाेलॉजी पर भेजते हैं। इससे उनको मोटा कमीशन मिलता है। अब तो ये लोग एक फोन पर घर जाकर भी सेंपल कलेक्ट कर लेते हैं।

रेट भी अलग-अलग
इन पैथोलॉजी की जांच रिपोर्ट के दरें भी अलग-अलग हैं। कोई एलएफटी जांच के लिए पांच सौ लेता है तो कोई चार सौ में ही जांच कर देता है। मनमाने रेट व भरोसा न होने के चलते इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है।




जिले में अवैध पैथाेलॉजी लैब नहीं चलने दी जाएंगी। जल्द ही इनके खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। इनके रेट निर्धारण को लेकर कोई नियम नहीं है, जो लैब पंजीकृत है वही जांच कर सकती है। अवैध लैब संचालकों पर होली के बाद कठोर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. अब्दुल सलाम, सीएमओ
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