{"_id":"69b31a9e2fae17de3701a0ef","slug":"on-the-second-day-of-the-international-conference-discussions-were-held-on-the-indian-knowledge-tradition-badaun-news-c-123-1-sbly1001-159169-2026-03-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुआ मंथन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुआ मंथन
विज्ञापन
वक्ताओं ने कार्यक्रम को संबोधित किया। स्रोत कॉलेज
बदायूं। राजकीय महाविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “आईसी-ग्लोबल डायलॉग्स” के दूसरे दिन विभिन्न अकादमिक सत्रों का आयोजन किया गया। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्य, राजनीति, अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
सम्मेलन का आयोजन महाविद्यालय और एकेडमिक सोसाइटी फॉर ह्यूमैनिटीज एंड लिटरेरी रिसर्च के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। पहले सत्र की अध्यक्षता बरेली कॉलेज की डॉ. वंदना शर्मा ने की। इस सत्र में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. कीर्ति पांडेय ने भारतीय ज्ञान परंपरा की ऐतिहासिक समृद्धि और आधुनिक संदर्भों में उसकी प्रासंगिकता पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय विचारधारा आज भी वैश्विक बौद्धिक विमर्श को दिशा देने की क्षमता रखती है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दर्शन एवं धर्म विभाग के प्रो. सच्चिदानंद मिश्र ने दर्शन, इतिहास और संस्कृति के अंतर्संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने भारतीय चिंतन परंपरा के वैश्विक महत्व को रेखांकित किया। इस सत्र में विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थियों ने राजनीति विज्ञान विषय से संबंधित 32 शोध पत्र प्रस्तुत किए।
विज्ञापन
दूसरे सत्र में पोलैंड की जगिलोनियन यूनिवर्सिटी की प्रो. हलीना मारलेविच ने ऑनलाइन माध्यम से वैश्विक साहित्यिक विमर्श पर व्याख्यान दिया। इसके अलावा साहित्य और सांस्कृतिक अध्ययन से जुड़े 13 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। तीसरे सत्र में अर्थशास्त्र और वाणिज्य विषय से जुड़े समकालीन आर्थिक मुद्दों पर नौ शोध पत्र प्रस्तुत हुए। सम्मेलन में दो समानांतर सत्र भी आयोजित किए गए। कॉन्फ्रेंस चेयरमैन डॉ. सतीश सिंह यादव ने कहा कि यह सम्मेलन वैश्विक समस्याओं पर संवाद का महत्वपूर्ण मंच बन रहा है।
विज्ञापन
सम्मेलन का आयोजन महाविद्यालय और एकेडमिक सोसाइटी फॉर ह्यूमैनिटीज एंड लिटरेरी रिसर्च के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। पहले सत्र की अध्यक्षता बरेली कॉलेज की डॉ. वंदना शर्मा ने की। इस सत्र में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. कीर्ति पांडेय ने भारतीय ज्ञान परंपरा की ऐतिहासिक समृद्धि और आधुनिक संदर्भों में उसकी प्रासंगिकता पर व्याख्यान दिया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय विचारधारा आज भी वैश्विक बौद्धिक विमर्श को दिशा देने की क्षमता रखती है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दर्शन एवं धर्म विभाग के प्रो. सच्चिदानंद मिश्र ने दर्शन, इतिहास और संस्कृति के अंतर्संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने भारतीय चिंतन परंपरा के वैश्विक महत्व को रेखांकित किया। इस सत्र में विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थियों ने राजनीति विज्ञान विषय से संबंधित 32 शोध पत्र प्रस्तुत किए।
विज्ञापन
दूसरे सत्र में पोलैंड की जगिलोनियन यूनिवर्सिटी की प्रो. हलीना मारलेविच ने ऑनलाइन माध्यम से वैश्विक साहित्यिक विमर्श पर व्याख्यान दिया। इसके अलावा साहित्य और सांस्कृतिक अध्ययन से जुड़े 13 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। तीसरे सत्र में अर्थशास्त्र और वाणिज्य विषय से जुड़े समकालीन आर्थिक मुद्दों पर नौ शोध पत्र प्रस्तुत हुए। सम्मेलन में दो समानांतर सत्र भी आयोजित किए गए। कॉन्फ्रेंस चेयरमैन डॉ. सतीश सिंह यादव ने कहा कि यह सम्मेलन वैश्विक समस्याओं पर संवाद का महत्वपूर्ण मंच बन रहा है।