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Budaun News: अफसर कह रहे आवंटित नहीं की फिर भी बुटला समिति से बंट गई डीएपी
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उझानी के बुटला गांव में डीएपी के वितरण की जानकारी देते किसान। संवाद
उझानी (बदायूं)। बुटला क्षेत्रीय सहकारी समिति लिमिटेड से शुक्रवार को डीएपी का वितरण होने से अधिकारी सवालों के घेरे में आ गए हैं। गांव में मिले कई किसानों ने सुबह छह बजे से डीएपी बांटे जाने का दावा किया है, जबकि एआर कोऑपरेटिव महेंद्र सिंह कह रहे हैं कि जब विभाग की ओर से बुटला समिति को डीएपी आवंटित ही नहीं की गई है तो वितरण कैसे हो गया, इसकी जांच होगी।
समिति के गोदाम पर डीएपी के वितरण का मामला सभापति हीरालाल वर्मा के संज्ञान में आया तो वह मौके पर पहुंचे। तब तक डीएपी बांटी जा चुकी थी। इसके बाद उन्होंने समिति सचिव और कर्मियों से जानकारी ली। सभापति की ओर से शाम को एआर महेंद्र सिंह को अवगत कराया गया कि जब विभाग ने समिति को डीएपी का आवंटन ही नहीं किया है तो इसका वितरण कहां से कर दिया गया।
शनिवार सुबह गांव के मुन्नालाल, विशाल, रनवीर सिंह, रमेश और चंद्रपाल ने बताया कि उन्हें तड़के ही डीएपी के कट्टे मिल गए थे। डीएपी ट्रक से गोदाम पर पहुंची थी। कुछ ग्रामीणों को किसी तरह यह भी पता लगा कि विभाग ने समिति के लिए डीएपी आवंटित ही नहीं की है। इसके बावजूद डीएपी का वितरण होने से तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। समिति से बांटी गई डीएपी आखिर कहां से पहुंची थी।
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पीसीएफ के गोदाम सहायक सतीश चंद्र ने बताया कि बुटला समिति के लिए कई दिनों से डीएपी आंवटित नहीं की गई है। इसके बाद एआर महेंद्र सिंह भी हकीकत के बारे में जानकारी करने पर सकते में पड़ गए। कहा, अगर बुटला समिति के लिए डीएपी भेजी जाती तो उन्हें जरूर जानकारी होती। समिति पर डीएपी कहां से लाकर बांटी गई है, इसकी जांच कराएंगे। जांच के लिए उन्होंने एडीसीओ संजीव कुमार के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। कमेटी समिति कर्मियों और किसानों से भी जानकारी करेगी। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे।
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बुटला में मचा डीएपी में मिलावट का शोर
विभागीय स्तर से बिना आवंटन के डीएपी बांटे जाने के पीछे समिति के सचिव समेत कर्मचारियों की मंशा क्या थी, यह तो जांच पूरी होने के बाद सामने आएगा, लेकिन जिन किसानों को डीएपी मिली है वह उसकी गुणवत्ता को लेकर सशंकित हैं। डीएपी में मिलावट का शोर भी पूरे दिन मचता रहा। इसे लेकर सभापति भी कोई जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रहे हैं।
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इस गोलमाल के पीछे किसी धंधेबाज के होने का शक
बुटला क्षेत्रीय सहकारी समिति पर डीएपी मुहैया कराने के लिए समिति के सचिव समेत कर्मचारियों की भूमिका पर उठ रहे सवालोंं के बीच कोऑपरेटिव के अफसर भी फिलहाल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए हैं। समिति से जुड़े किसान इस गोलमाल के पीछे किसी धंधेबाज का हाथ होने का संदेह जता रहे हैैं। उनका कहना है कि धंधेबाज ने ही समिति स्टाफ से सांठगांठ कर डीएपी उपलब्ध कराई है।
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समिति के गोदाम पर डीएपी के वितरण का मामला सभापति हीरालाल वर्मा के संज्ञान में आया तो वह मौके पर पहुंचे। तब तक डीएपी बांटी जा चुकी थी। इसके बाद उन्होंने समिति सचिव और कर्मियों से जानकारी ली। सभापति की ओर से शाम को एआर महेंद्र सिंह को अवगत कराया गया कि जब विभाग ने समिति को डीएपी का आवंटन ही नहीं किया है तो इसका वितरण कहां से कर दिया गया।
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शनिवार सुबह गांव के मुन्नालाल, विशाल, रनवीर सिंह, रमेश और चंद्रपाल ने बताया कि उन्हें तड़के ही डीएपी के कट्टे मिल गए थे। डीएपी ट्रक से गोदाम पर पहुंची थी। कुछ ग्रामीणों को किसी तरह यह भी पता लगा कि विभाग ने समिति के लिए डीएपी आवंटित ही नहीं की है। इसके बावजूद डीएपी का वितरण होने से तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। समिति से बांटी गई डीएपी आखिर कहां से पहुंची थी।
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पीसीएफ के गोदाम सहायक सतीश चंद्र ने बताया कि बुटला समिति के लिए कई दिनों से डीएपी आंवटित नहीं की गई है। इसके बाद एआर महेंद्र सिंह भी हकीकत के बारे में जानकारी करने पर सकते में पड़ गए। कहा, अगर बुटला समिति के लिए डीएपी भेजी जाती तो उन्हें जरूर जानकारी होती। समिति पर डीएपी कहां से लाकर बांटी गई है, इसकी जांच कराएंगे। जांच के लिए उन्होंने एडीसीओ संजीव कुमार के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। कमेटी समिति कर्मियों और किसानों से भी जानकारी करेगी। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे।
बुटला में मचा डीएपी में मिलावट का शोर
विभागीय स्तर से बिना आवंटन के डीएपी बांटे जाने के पीछे समिति के सचिव समेत कर्मचारियों की मंशा क्या थी, यह तो जांच पूरी होने के बाद सामने आएगा, लेकिन जिन किसानों को डीएपी मिली है वह उसकी गुणवत्ता को लेकर सशंकित हैं। डीएपी में मिलावट का शोर भी पूरे दिन मचता रहा। इसे लेकर सभापति भी कोई जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रहे हैं।
इस गोलमाल के पीछे किसी धंधेबाज के होने का शक
बुटला क्षेत्रीय सहकारी समिति पर डीएपी मुहैया कराने के लिए समिति के सचिव समेत कर्मचारियों की भूमिका पर उठ रहे सवालोंं के बीच कोऑपरेटिव के अफसर भी फिलहाल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए हैं। समिति से जुड़े किसान इस गोलमाल के पीछे किसी धंधेबाज का हाथ होने का संदेह जता रहे हैैं। उनका कहना है कि धंधेबाज ने ही समिति स्टाफ से सांठगांठ कर डीएपी उपलब्ध कराई है।