अब बगरैन में किसान ने फांसी लगाकर जान दी
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जिले में फसल बर्बाद होने से किसानों की सदमे से मौत और खुदकुशी करने का सिलसिला थम नहीं रहा है। वजीरगंज थाना क्षेत्र के गांव बगरैन में गुरुवार की रात (48) वर्षीय किसान कन्हई लाल ने फांसी लगाकर दी जान दे दी। दरअसल, उनकी साढ़े तीन बीघा गेहूं की फसल बारिश में प्रभावित हुई थी। उसका सर्वे भी नहीं हुआ था। ऊपर से उनको स्वीकृत लोहिया आवास की धनराशि भी उनके खाते में नहीं पहुंची थी। जबकि इसे फरवरी में रिलीज होना दर्शाया जा रहा था। आखिर अवसाद से घिरे कन्हई लाल ने मौत को गले लगा लिया। डीएम शंभूनाथ ने मौके पर जाकर परिवारीजनों से सांत्वना दी। उनको नियमानुसार मदद दिए जाने का भरोया भी दिया। उधर, गुरुवार की रात ही खेत पर गए वजीरगंज के ही गांव रामडांडी के किसान रामप्रसाद (65) और उसावां के बुधवा नगला के हरसहाय (62) की मौत हो गई। परिवार वाले बोले, फसल बर्बाद होने के सदमे में गई जान। दोनों किसानों पर बैंकों और साहूकारों का भी कर्ज था।
वजीरगंज। गांव बगरैन में शुक्रवार की सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब लोगों ने पाकड़ के पेड़ पर कन्हई लाल को फांसी पर लटके देखा। तत्काल घरवालों को सूचना दी गई। घरवाले ने मंजर देखा तो वह चीत्कार कर उठे। कुछ देर बाद आई पुलिस ने शव को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। एसडीएम गुलाब चंद मौके पर आ गए। उन्होंने पारिवारिक स्थिति और फसल की स्थिति के बारे में मालूमात की। घरवालों ने बताया कि कन्हई लाल के पास डेढ़ बीघा जमीन थीं। उनकी पत्नी चंद्रकली के नाम चार बीघा जमीन है। पूरी जमीन पर गेहूं की फसल बोई थी, जो कि बारिश ओलावृष्टि में बर्बाद हो गई। इसे वह आहत थे। दमसरा उन्हें इंदिरा आवास में झटका लगा था। सो तनाव के चलते उन्होंने गुरुवार की रात फांसी लगाकर उन्होेंने जान दे दी।
लोहिया आवास के चक्कर में आशियाना भी टूटा
मृतक कन्हई लाल की पत्नी चंद्रकली के नाम लोहिया आवास भी स्वीकृत हो चुका था। मगर कई बार ब्लाक और बैंक के चक्कर लगाने के बाद भी स्वीकृत धनराशि नहीं मिली और जो अपना घर था, वो भी नया बनाने के चक्कर में तुड़वा दिया।
कन्हई लाल के परिवार में दो बेटे तथा दो बेेटियां हैं। बडे़ बेटे और बेेटी की शादी उन्होंने कर दी थी। अब दो बच्चों की शादी करने का भी दबाव था। बडे़ बेटे राजवीर बीमार है, उसके इलाज के लिए कन्हई लाल ने लगभग तीन लाख रुपये का कर्जा साहूकारों से ले रखा था। मगर अपनी तंगहाली की वजह से वो चाहकर भी कर्जा अदा नहीं कर पा रहे थे। इस कारण वह कई दिनों से मानसिक रूप से परेशान थे। यही नहीं उन्होंने लोहिया आवास स्वीकृत होने पर अपना पुराना आवास भी गिरवा दिया था। लोहिया आवास बनवाने के लिए दो किस्तों में करीब पौने तीन लाख रुपया मिलता है, लेकिन उनको 27 फरवरी 2015 को स्वीकृत एक किस्त अभी तक नहीं मिली थी। इससे कन्हई परेशान थे। दो दिन पहले उनके बेटे की तबियत अधिक खराब हो गई थी। आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही थी, सो उन्होंने आखिर मौत को ही गले लगा लिया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
आवास मामले में डीएम ने दिए जांच के आदेश
वजीरगंज। जिलाधिकारी शंभूनाथ, एसडीएम गुलाब चंद तथा सीओ राजवीर सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे। डीएम ने जायजा लेने के बाद मृतक की विधवा को पारिवारिक योजना का लाभ दिलाने, बीमा का लाभ दिलाने तथा विधवा पेंशन स्वीकृत कराने के लिए एसडीएम को निर्देश दिए। साथ ही लोहिया आवास का पैसा खाते में न पहुंचने की प्राथमिकता से जांच कराने के आदेश दिए। डीएम को बताया गया कि कन्हई लाल का सर्व यूपी ग्रामीण बैंक में खाता था। खाते में उनका नाम कन्हैया लाल है और चेक कन्हई लाल के नाम आया था। इसके चलते उसका भुगतान नहीं हो सका। बताते हैं कि बुधवार को कन्हई लाल ने बैंक जाकर खाते के बारे में पता भी किया था।
वजीरगंज। फ सल की बर्बादी के सदमे से किसान के मरने की दूसरी घटना क्षेत्र के ग्राम रामडांडी में हुई। यहां 65 वर्ष के रामप्रसाद गुरुवार की रात अपने खेत पर गए थे। यहीं वह गश खाकर गिर गए। आसपास के किसानों की सूचना पर जब तक परिजन मौके पर पहुंचे, उनकी मौत हो गई। रामप्रसाद के पास मात्र पांच बीघा जमीन थी। उनकी गेहूं की फ सल बर्बाद हो गई थी। उनके चार बेटे मेहनत-मजदूरी करके अपनी गुजर-बसर कर रहे हैं। करीब डेढ़ साल पहले उन्होंने अपने छोटे बेटे की शादी के लिए लगभग 40 हजार का कर्जा लिया था, जिसे वो नहीं चुका पाए। कर्जदार का उनके ऊपर दबाव था। परिवारीजनों ने पुलिस और संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई, लेकिन मौके पर कोई नहीं पहुचा। बाद में अंतिम संस्कार कर दिया।
खेत में गश खाकर गिरे तो फिर नहीं उठे हर सहाय
उसावां। गांव बुधवा नगला के 62 वर्ष के हर सहाय गुरुवार को खेत पर गए थे, यहीं गश खाकर ऐसे गिरे कि फिर नहीं उठे। उनकी मौत की खबर सुनकर घर में कोहराम मच गया। बताते हैं कि चार भाइयों में उनके हिस्से करीब पांच-सात बीघा जमीन आई थी। उनके दो पुत्र सत्यपाल और सत्यवीर शादीशुदा हैं। वे दोनों खेती में हाथ बंटाते थे। इस बार फसल ठीक न होने से हर सहाय परेशान थे। उन पर पीएनबी का 33 हजार और क्षेत्रीय सहकारी बैंक का 15 हजार रुपया कर्ज था। ये भी चिंता उनको सता रही थी। किसान की मौत की खबर सुनकर शुक्रवार को दातागंज के एसडीएम ओपी तिवारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि मंडी समिति से करीब 50 हजार की सहायता के साथ पारिवारिक लाभ योजना से मदद कराई जाएगी।