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Budaun News: दो साल से स्पोर्ट्स स्टेडियम में फुटबॉल का कोच नहीं
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बदायूं। शहर के स्पोर्ट्स स्टेडियम में दो साल से फुटबॉल के कोच की तैनाती न होने से खिलाड़ी अभ्यास नहीं कर पा रहे। वहीं कोच के अभाव में नए खिलाड़ियों का पंजीकरण भी रोक दिया गया है, जिससे कई खिलाड़ी मैदान से दूर होते जा रहे हैं। स्टेडियम में हॉकी, क्रिकेट, एथलेटिक्स सहित अन्य खेलों के लिए कोच तैनात हैं, लेकिन फुटबॉल के लिए लंबे समय से कोई स्थायी कोच नहीं है।
दो साल पहले जिले में तैनात फुटबॉल कोच की बरेली में तैनाती कर दी गई थी। इसके बाद से जिले में फुटबॉल के कोच का पद खाली है। इसके लिए विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है। खिलाड़ियों का कहना है कि कोच न होने के कारण स्टेडियम में अभ्यास करना भी संंभव नहीं हो पा रहा है।
इससे खिलाड़ियों का फुटबॉल खेलना सपना बनकर रह गया है। कुछ खिलाड़ी कोच के बिना ही अन्य मैदानों पर अभ्यास करने को मजबूर हैं। तकनीक, रणनीति और फिटनेस से जुड़ा सही मार्गदर्शन नहीं मिलने से उनके खेल का स्तर गिर रहा है। दो साल पहले कई खिलाड़ी, जो जिला और मंडल स्तर पर प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे थे, अब प्रैक्टिस न कर पाने से निराश हैं।
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अभिभावकों में भी नाराजगी है। खेल प्रेमियों का कहना है कि बदायूं में फुटबॉल के प्रति युवाओं में काफी रुझान है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में प्रतिभाएं दबकर रह जाती हैं। स्टेडियम में मैदान तो है, लेकिन प्रशिक्षक न मिलने से उसका लाभ नहीं मिल पा रहा। वहीं नए खिलाड़ियों का पंजीकरण भी नहीं हो रहा है।
अभी वॉलीबाल के कोच के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। जल्द ही विभाग को फुटबॉल के कोच के लिए भी पत्र भेजा जाएगा। कोच के आने के बाद खिलाड़ियों की पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी। - अमित रिछारिया, जिला क्रीड़ाधिकारी
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दो साल पहले जिले में तैनात फुटबॉल कोच की बरेली में तैनाती कर दी गई थी। इसके बाद से जिले में फुटबॉल के कोच का पद खाली है। इसके लिए विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है। खिलाड़ियों का कहना है कि कोच न होने के कारण स्टेडियम में अभ्यास करना भी संंभव नहीं हो पा रहा है।
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इससे खिलाड़ियों का फुटबॉल खेलना सपना बनकर रह गया है। कुछ खिलाड़ी कोच के बिना ही अन्य मैदानों पर अभ्यास करने को मजबूर हैं। तकनीक, रणनीति और फिटनेस से जुड़ा सही मार्गदर्शन नहीं मिलने से उनके खेल का स्तर गिर रहा है। दो साल पहले कई खिलाड़ी, जो जिला और मंडल स्तर पर प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे थे, अब प्रैक्टिस न कर पाने से निराश हैं।
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अभिभावकों में भी नाराजगी है। खेल प्रेमियों का कहना है कि बदायूं में फुटबॉल के प्रति युवाओं में काफी रुझान है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में प्रतिभाएं दबकर रह जाती हैं। स्टेडियम में मैदान तो है, लेकिन प्रशिक्षक न मिलने से उसका लाभ नहीं मिल पा रहा। वहीं नए खिलाड़ियों का पंजीकरण भी नहीं हो रहा है।
अभी वॉलीबाल के कोच के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। जल्द ही विभाग को फुटबॉल के कोच के लिए भी पत्र भेजा जाएगा। कोच के आने के बाद खिलाड़ियों की पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी। - अमित रिछारिया, जिला क्रीड़ाधिकारी