फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Nine types of medicines finished in medical college, sought from district hospital

मेडिकल कॉलेज में नौ प्रकार की दवाएं खत्म, जिला अस्पताल से मांगी

Tue, 27 Sep 2022 12:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 27 Sep 2022 12:52 AM IST
सार

अब मेडिकल कॉलेज ने जिला अस्पताल से नौ प्रकार की दवाएं उधार मांगी हैं।पैथोलॉजी जांच, अल्ट्रासाउंड, सर्जरी और अब दवाएं भी बाहर कीमेडिकल कॉलेज में तीन अल्ट्रासाउंड मशीन हैं और दो रेडियोलॉजिस्ट हैं, लेकिन यहां रोजाना 20 से 25 अल्ट्रासाउंड ही होते हैं। मेडिकल कॉलेज में 10 सर्जन हैं, लेकिन यहां सर्जरी के नाम पर औसतन आठ मेजर और माइनर सर्जरी ही रोजाना होती हैं। जनहित में यह दवाएं हम मेडिकल कॉलेज को उपलब्ध करा रहे हैं।

विज्ञापन
Nine types of medicines finished in medical college, sought from district hospital
बदायूं का राजकीय मेडिकल कॉलेज। संवाद - फोटो : BADAUN

विस्तार

बदायूं। दो ऑक्सीजन प्लांट होने के बावजूद हर महीने दस लाख रुपये की ऑक्सीजन खरीदने वाले राजकीय मेडिकल कॉलेज में इन दिनों दवाओं का भी टोटा हो गया है। मरीजों को बाहर की दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। जो दवाएं खत्म हुई हैं, नौ प्रकार की बताई जा रही हैं। इनमें से ज्यादातर दवाओं की जरूरत इमरजेंसी में पड़ती है। कॉलेज प्रबंधन ने फिलहाल ये दवाएं जिला अस्पताल से उधार मांगी हैं।
विज्ञापन

बेहतर इलाज की उम्मीद के साथ मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना तीन से चार हजार मरीज पहुंचते हैं। फिलहाल मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों को दवाएं भी बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। संचारी रोगों के सीजन में यहां आईवी फ्लूड दवा भी नहीं है। इसके अलावा इमरजेंसी सेवाओं में काम आने वाली नौ प्रकार की दवाओं की भी मेडिकल कॉलेज में किल्लत है।
विज्ञापन

सरकारी अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति मांग के अनुसार यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन करता है। मेडिकल कॉलेज चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत आता है, इसलिए दवाओं की खरीद के लिए अलग से बजट है। फिर भी यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन से भी मेडिकल कॉलेज करीब 70 लाख की दवाएं ले चुका है। अब मेडिकल कॉलेज ने जिला अस्पताल से नौ प्रकार की दवाएं उधार मांगी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पैथोलॉजी जांच, अल्ट्रासाउंड, सर्जरी और अब दवाएं भी बाहर की
मेडिकल कॉलेज में तीन अल्ट्रासाउंड मशीन हैं और दो रेडियोलॉजिस्ट हैं, लेकिन यहां रोजाना 20 से 25 अल्ट्रासाउंड ही होते हैं। जिला अस्पताल में एक अल्ट्रासाउंड मशीन और एक रेडियोलॉजिस्टर हैं, तब भी यहां प्रतिदिन औसतन 30 अल्ट्रासाउंड होते हैं। मेडिकल कॉलेज में 10 सर्जन हैं, लेकिन यहां सर्जरी के नाम पर औसतन आठ मेजर और माइनर सर्जरी ही रोजाना होती हैं।
वहीं, जिला अस्पताल में एक सर्जन है, लेकिन सात से आठ सर्जरी होती हैं। मेजर सर्जरी के लिए जिला अस्पताल से मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है और मेडिकल कॉलेज में भी इन्हेें कई-कई दिन इंतजार करना पड़ता है। मरीजों को अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी जांच भी बाहर से करानी होती हैं। अब दवाओं का संकट आ गया है। मेडिकल कॉलेज के बाहर खुली दवाओं की दुकानों पर तीमारदारों की भीड़ लगी रहती है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता का कहना है कि जरूरत के हिसाब से दवाओं की डिमांड भेजी जाती है। मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कोई कमी नहीं है। मरीजों को बाहर से दवाएं नहीं लिखी जा रही हैं। जो दवाएं जिला अस्पताल से मांगी गई हैं, उनमें ज्यादातर आईवी फ्लूड हैं। इनकी सप्लाई मिलने में कुछ देरी हुई है। डिमांड समय से भेज दी गई थी। दवाओं की सप्लाई मिलने में देरी को देखते हुए पहले से दवाओं की उपलब्धता के लिए जिला अस्पताल से दवाएं मांगी गई हैं। जब जिला अस्पताल को जरूरत होती तो वहां के लिए दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

राजकीय मेडिकल कॉलेज ने जिला अस्पताल से नौ प्रकार की दवाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। जनहित में यह दवाएं हम मेडिकल कॉलेज को उपलब्ध करा रहे हैं। जो नौ प्रकार की दवाएं मांगी गई हैं उनमें ज्यादातर दवाएं इमरजेंसी सेवाओं में काम आने वाली हैं। इनमें ज्यादातर आईवी फ्लूड हैं। - डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस, जिला अस्पताल।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed