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रोजी-रोटी कमाने के लिए बिसौली पहुंचे नेपाली
बिसौली
Updated Fri, 19 Dec 2014 11:58 PM IST
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जब पेट में भूख की ज्वाला धधकती है तो देशों की सीमाएं भी छोटी हो जाती हैं। अपना वतन तो छूट ही जाता है, अपने भी छूट जाते हैं। समीप के देश नेपाल के 40-50 लोग नगर और क्षेत्र में हींग और शिलाजीत बेचने आए हैं।
शुक्रवार को भोर में चंदौसी से आने वाली एक बस से जब 40-50 लोग नगर के रोडवेज पर उतरे तो सभी की निगाहें अनायास ही उठ गईं। कंधे पर भारी बोझ तो चेहरे पर कपड़े गरीबी को बयां कर रहे थे। अपने वतन को छोड़कर आया यह नेपाली दल नगर में सिर छुपाने का जगह ढूंढ रहा था। पेट की आग उन्हें हजारों किमी दूर खींचकर ले आई थी। जब एक-एक से पूछा गया तो लाचारी जुबां पर आ गई। कहा कि बाबू साब! पेट जहां ले जाए। बताया कि यहां पर हींग और शिलाजीत बेचकर कुछ धन कमाएंगे। चेहरे पर खिचीं कुछ रेखाएं अपनों से दूर होने के दर्द को बयां कर रही थीं। भीषण ठंड में कांप रहे नेपालियों में काम के जज्बे की गर्मी जरूर दिखाई दी। नेपाल के जियोली जिले से आए ये लोग भारत में कुछ दिन ठहरकर लौट जाते हैं।
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शुक्रवार को भोर में चंदौसी से आने वाली एक बस से जब 40-50 लोग नगर के रोडवेज पर उतरे तो सभी की निगाहें अनायास ही उठ गईं। कंधे पर भारी बोझ तो चेहरे पर कपड़े गरीबी को बयां कर रहे थे। अपने वतन को छोड़कर आया यह नेपाली दल नगर में सिर छुपाने का जगह ढूंढ रहा था। पेट की आग उन्हें हजारों किमी दूर खींचकर ले आई थी। जब एक-एक से पूछा गया तो लाचारी जुबां पर आ गई। कहा कि बाबू साब! पेट जहां ले जाए। बताया कि यहां पर हींग और शिलाजीत बेचकर कुछ धन कमाएंगे। चेहरे पर खिचीं कुछ रेखाएं अपनों से दूर होने के दर्द को बयां कर रही थीं। भीषण ठंड में कांप रहे नेपालियों में काम के जज्बे की गर्मी जरूर दिखाई दी। नेपाल के जियोली जिले से आए ये लोग भारत में कुछ दिन ठहरकर लौट जाते हैं।
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