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नजूल की संपत्ति के ब्योरे में मिली तमाम अनियमितताएं, कार्रवाई तय
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बदायूं। नगर पालिका में एडीएम प्रशासन ने गुरुवार को छापा मारा था। इस दौरान उन्हें तमाम कमियां मिलीं। इसकी रिपोर्ट उन्होंने डीएम को दी। रिपोर्ट देखने के बाद डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट को नजूल संपत्ति रजिस्टर और हाउस/ वाटर टैक्स मामले में जांच कर कार्रवाई करने को 10 दिन का समय दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि नजूल लिपिक पर जल्द ही गाज गिर सकती है, वहीं तत्कालीन ईओ भी कार्रवाई के लपेटे में आएंगे।
एडीएम प्रशासन ऋतु पुनिया ने डीएम कुमार प्रशांत के निर्देश पर गुरुवार को नगर पालिका में छापा मारा था। इस दौरान पुराना रिकॉर्ड तलब किया तो पाया कि नजूल की संपत्ति रजिस्टर में घोर अनियमितताएं थीं। नजूल के पटल पर एक ही लिपिक 10 सालों से तैनात है। ऐसे में उसके स्तर से जमकर धांधली की गई है। शहर नगरपालिका में अभी तक नजूल की केवल 41 संपत्ति ही ऑनलाइन हैं जबकि नजूल संपत्ति की संख्या बहुत ज्यादा है। एडीएम की रिपोर्ट पर डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट/ ईओ को इसकी जांच करने के लिए 10 दिन का समय दिया है, साथ ही संबंधित लिपिक के खिलाफ कार्रवाई कर अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।
एडीएम की रिपोर्ट पर सिटी मजिस्ट्रेट को एक और जांच सौंपी गई है। एडीएम ऋतु पूनिया ने बताया कि जांच के दौरान पालिका में 24 हजार 280 मकान पंजीकृत मिले, जबकि पालिका के रिकॉर्ड के मुताबिक महज आठ हजार मकानों से हाउस/ वाटर टैक्स की वसूली हो रही है। इससे राजस्व का घाटा हो रहा है। ऐसे में जिन ईओ और कर्मचारी के द्वारा लापरवाही बरती गई है, सिटी मजिस्ट्रेट उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर अवगत कराएंगे।
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एडीएम प्रशासन ऋतु पुनिया ने डीएम कुमार प्रशांत के निर्देश पर गुरुवार को नगर पालिका में छापा मारा था। इस दौरान पुराना रिकॉर्ड तलब किया तो पाया कि नजूल की संपत्ति रजिस्टर में घोर अनियमितताएं थीं। नजूल के पटल पर एक ही लिपिक 10 सालों से तैनात है। ऐसे में उसके स्तर से जमकर धांधली की गई है। शहर नगरपालिका में अभी तक नजूल की केवल 41 संपत्ति ही ऑनलाइन हैं जबकि नजूल संपत्ति की संख्या बहुत ज्यादा है। एडीएम की रिपोर्ट पर डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट/ ईओ को इसकी जांच करने के लिए 10 दिन का समय दिया है, साथ ही संबंधित लिपिक के खिलाफ कार्रवाई कर अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।
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एडीएम की रिपोर्ट पर सिटी मजिस्ट्रेट को एक और जांच सौंपी गई है। एडीएम ऋतु पूनिया ने बताया कि जांच के दौरान पालिका में 24 हजार 280 मकान पंजीकृत मिले, जबकि पालिका के रिकॉर्ड के मुताबिक महज आठ हजार मकानों से हाउस/ वाटर टैक्स की वसूली हो रही है। इससे राजस्व का घाटा हो रहा है। ऐसे में जिन ईओ और कर्मचारी के द्वारा लापरवाही बरती गई है, सिटी मजिस्ट्रेट उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर अवगत कराएंगे।
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