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दुष्कर्मों की सजा अवश्य मिलती है: शिखा

Sat, 16 May 2015 07:43 PM IST
belsi
belsi Updated Sat, 16 May 2015 07:43 PM IST
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गांव नगला जाटान में चल रही श्रीमदभागवत कथा में कथावाचक शिखा शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि संसार का प्रत्येक जीव कर्म करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन किए हुए कर्मों का फल भोगने के लिए परतंत्र है। मनुष्य मनमति के चक्कर में पड़ कर लोभ, मोह, अहंकार को धारण कर लेता है और दुष्कर्मों को कर डालता है। दुष्कर्मो की फल प्राप्ति भी उसे अवश्य ही कष्टों के रूप में मिलती है और मानव जीवन को व्यर्थ ही नष्ट गवां देते हैं। जबकि मानव जन्म की सार्थकता मानवीय प्रेम और मानव सेवा तथा सत्कर्मों में निहित है।

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उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य के पास चमक-दमक भरी जिंदगी है, तब तक सगे-संबंधी, रिश्ते-नातेदार, मित्र, परिचित घेरे रहते हैं। जैसे ही मनुष्य पर दुखों की घड़ी आती है, तो सभी उसका साथ छोड़ जाते हैं। तब परमात्मा ही उसके काम आता है। महाराज रामनरेश शास्त्री कहा कि आज चारों ओर जातिवाद, वर्गवाद का विष घुला हुआ है। धर्मानुयायी भी इससे अछूते नहीं है। ऐसे में माहौल में बड़े ही सोच विचार करके सत्य की शरण को ग्रहण करना चाहिए। कथा के बाद में आरती के बाद प्रसाद का वितरण किया गया। सोमवीर सिंह, श्यामसिंह, नरेश चंद्र, राजपाल, मनोहर लाल, देवेंद्र सिंह, गिरिराज सिंह, सुरेश राणा, पप्पू सिंह, गल्लर सिंह, प्रेमसिंह, वीरपाल, राजेंद्र सिंह, प्रेमसिंह, चंद्रपाल सिंह, दिनेश चंद्र, बंटी शर्मा, रविंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।

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