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Budaun News: पारा 42 डिग्री, जेनरेटर में डीजल नहीं, मरीज बेहाल

Sat, 20 Apr 2024 03:55 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 20 Apr 2024 03:55 AM IST
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Mercury 42 degrees, no diesel in generator, patients in distress
तीमारदार हरप्यारी।
बदायूं। गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। शहर का पारा शुक्रवार को 42 डिग्री सेंटीग्रेड पहुंच गया। जिला अस्पताल में जेनरेटर हैं, लेकिन उनमें डीजल भरने के लिए बजट नहीं है। शुक्रवार को लाइन में फाल्ट की वजह से सुबह आठ बजे बिजली गुल हो गई। जेनरेटर न चलाए जाने से दो घंटे से अधिक मरीज और तीमारदार हाथ के पंखे से पसीना सुखाते रहे।
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जिला अस्पताल में बिजली न होने पर मरीजों की सुविधा के लिए तीन जेनरेटर लगाए गए हैं पर दो चलाए नहीं जाते। दो जेनरेटर से वार्डों और ऑक्सीजन प्लांट को आपूर्ति जाती है तो तीसरे की ब्लड बैंक में। ब्लड बैंक का जेनरेटर भी तभी चलाया जाता है जब ब्लड खराब होने की नौबत महसूस की जाने लगती है। जेनरेटर न चलाए जाने का मुख्य कारण बजट कम होना बताया जाता है।
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एक माह के लिए मिलता है 35 हजार का बजट
यहां बता दें कि एक जेनरेटर एक घंटे में लगभग दस लीटर डीजल खर्च करता है। दिन में अगर दो घंटे भी जेनरेटर चला तो दो हजार रुपये हर रोज का खर्चा आता है, जबकि जिला अस्पताल को एक माह में डीजल खर्च के लिए सिर्फ 35 हजार रुपये का ही बजट मिलता है। फाल्ट के बारे में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एसडीई अतुल कुमार का कहना है कि जिला अस्पताल को सुरक्षित फीडर से आपूर्ति मिलती है। सिर्फ दस मिनट के लिए ही बिजली गई होगी। अगर दो घंटे आपूर्ति ठप रही है तो अस्पताल के अंदर कोई फाल्ट रहा होगा।
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रोजाना गुल करती है दो से तीन घंटे बिजली
सहसवान के अकवराबाद निवासी हरप्यारी ने बताया कि चार दिन पहले बेटा तेजपाल सड़क हादसे में घायल हो गया था। जिला अस्पताल लाए, जिसे सर्जिकल वार्ड में भर्ती कराया गया। हर रोज दो से तीन घंटे बिजली गुल हो रही है। तब हाथ के पंखे का सहारा रहता है।


बिजली न होने पर गर्मी से बिलबिला उठते हैं मरीज
दातागंज के बकतपुर निवासी शिवराम ने बताया कि बेटी गुड़िया दो दिन पहले जिला अस्पताल में भर्ती है। बिजली न होने पर हाल बेहाल होता है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।


जिला अस्पताल में लगे जनरेटर में खर्च होने वाले डीजल के लिए प्रतिमाह 35 हजार रुपये का बजट मिलता है। इस बजट से जनरेटर जितना चलाया जा सकता है, उतना चलाया जाता है। इसके बाद भी ब्लड बैंक के जनरेटर को चलाने में बजट के अलावा भी पास से रुपये खर्च हो जाते हैं। तक कहीं जाकर ब्लड बैंक में ब्लड सुरक्षित रह पाता है। - डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल

तीमारदार हरप्यारी।

तीमारदार हरप्यारी।

तीमारदार हरप्यारी।

तीमारदार हरप्यारी।

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