{"_id":"69c6d3b623526521130cc577","slug":"medicines-are-expected-to-become-more-expensive-increasing-the-problems-for-patients-badaun-news-c-123-1-sbly1001-160286-2026-03-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: दवाएं महंगी होने की आशंका, मरीजों की बढ़ेगी परेशानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: दवाएं महंगी होने की आशंका, मरीजों की बढ़ेगी परेशानी
Sat, 28 Mar 2026 12:30 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Sat, 28 Mar 2026 12:30 AM IST
विज्ञापन
सोहित उपाध्याय
बदायूं। ईरान-इजराइल युद्ध का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से दवाएं 20 से 30 प्रतिशत तक महंगी हो सकती हैं। इसका सीधा असर मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ेगा। ऐसे हालात में स्वास्थ्य सेवाएं और भी महंगी होने की संभावना है।
दवा निर्माण में उपयोग होने वाले कई जरूरी कच्चे पदार्थ विदेशों से आयात किए जाते हैं। युद्ध के चलते इनकी सप्लाई प्रभावित हो रही है। इससे कीमतों में तेजी देखी जा रही है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और परिवहन लागत में बढ़ोतरी भी दवाओं के दाम पर असर डाल रही है।
दवा विक्रेता हनी उपाध्याय, सोहित उपाध्याय का कहना है कि कई कंपनियों ने पहले ही दवाओं के दाम बढ़ाने के संकेत दे दिए हैं। यदि कच्चे माल और ट्रांसपोर्ट की लागत लगातार बढ़ती रही तो इसका सीधा असर बाजार में उपलब्ध दवाओं की कीमत पर पड़ेगा। इससे गंभीर और दीर्घकालिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को अधिक आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है। खासतौर पर ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य पुरानी बीमारियों की दवाएं महंगी होने से मरीजों की नियमित दवा लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -
फोटो-11
ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने का असर सीधे दवाओं पर पड़ता है। डीजल और अन्य खर्च बढ़ने से सप्लाई महंगी हो गई है। ऐसे में कंपनियां भी दाम बढ़ाने को मजबूर होंगी। इसका सबसे ज्यादा असर उन मरीजों पर पड़ेगा, जो नियमित दवाएं लेते हैं।
-अखिल रस्तोगी, अध्यक्ष बदायूं औषधि विक्रेता संघ
-- -- -- -- --
फोटो-12
कई जरूरी दवाओं के कच्चे पदार्थ विदेशों से आते हैं, जिनकी कीमत युद्ध के कारण बढ़ रही है। यदि यह स्थिति बनी रही तो दवाओं के रेट में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है। इससे मरीजों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।
-रंजीत सिंह, थोक दवा विक्रेता
-- -- -- -- -
फोटो-14
-दवाओं की कीमत बढ़ने से ग्राहकों की संख्या पर भी असर पड़ सकता है। कई लोग पहले ही महंगी दवाओं के कारण इलाज टालते हैं। अगर दाम और बढ़े तो मरीज सस्ती या वैकल्पिक दवाओं की तलाश करेंगे। जिससे स्वास्थ्य पर भी जोखिम बढ़ सकता है।
-हनी उपाध्याय, मेडिकल स्टोर मालिक
-- -- -- -
फोटो-13
-पिछले कुछ समय से दवा कंपनियों की ओर से लगातार कीमतें बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं। कच्चे माल की लागत बढ़ने के कारण कंपनियां नए रेट लागू कर सकती हैं। अगर ऐसा हुआ तो आम मरीजों को काफी परेशानी होगी, क्योंकि पहले से ही इलाज महंगा होता जा रहा है।
-सोहित उपाध्याय, मेडिकल स्टोर मालिक
-- -- -- -- -- -
विज्ञापन
दवा निर्माण में उपयोग होने वाले कई जरूरी कच्चे पदार्थ विदेशों से आयात किए जाते हैं। युद्ध के चलते इनकी सप्लाई प्रभावित हो रही है। इससे कीमतों में तेजी देखी जा रही है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और परिवहन लागत में बढ़ोतरी भी दवाओं के दाम पर असर डाल रही है।
विज्ञापन
दवा विक्रेता हनी उपाध्याय, सोहित उपाध्याय का कहना है कि कई कंपनियों ने पहले ही दवाओं के दाम बढ़ाने के संकेत दे दिए हैं। यदि कच्चे माल और ट्रांसपोर्ट की लागत लगातार बढ़ती रही तो इसका सीधा असर बाजार में उपलब्ध दवाओं की कीमत पर पड़ेगा। इससे गंभीर और दीर्घकालिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को अधिक आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है। खासतौर पर ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य पुरानी बीमारियों की दवाएं महंगी होने से मरीजों की नियमित दवा लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।
विज्ञापन
फोटो-11
ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने का असर सीधे दवाओं पर पड़ता है। डीजल और अन्य खर्च बढ़ने से सप्लाई महंगी हो गई है। ऐसे में कंपनियां भी दाम बढ़ाने को मजबूर होंगी। इसका सबसे ज्यादा असर उन मरीजों पर पड़ेगा, जो नियमित दवाएं लेते हैं।
-अखिल रस्तोगी, अध्यक्ष बदायूं औषधि विक्रेता संघ
फोटो-12
कई जरूरी दवाओं के कच्चे पदार्थ विदेशों से आते हैं, जिनकी कीमत युद्ध के कारण बढ़ रही है। यदि यह स्थिति बनी रही तो दवाओं के रेट में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है। इससे मरीजों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।
-रंजीत सिंह, थोक दवा विक्रेता
फोटो-14
-दवाओं की कीमत बढ़ने से ग्राहकों की संख्या पर भी असर पड़ सकता है। कई लोग पहले ही महंगी दवाओं के कारण इलाज टालते हैं। अगर दाम और बढ़े तो मरीज सस्ती या वैकल्पिक दवाओं की तलाश करेंगे। जिससे स्वास्थ्य पर भी जोखिम बढ़ सकता है।
-हनी उपाध्याय, मेडिकल स्टोर मालिक
फोटो-13
-पिछले कुछ समय से दवा कंपनियों की ओर से लगातार कीमतें बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं। कच्चे माल की लागत बढ़ने के कारण कंपनियां नए रेट लागू कर सकती हैं। अगर ऐसा हुआ तो आम मरीजों को काफी परेशानी होगी, क्योंकि पहले से ही इलाज महंगा होता जा रहा है।
-सोहित उपाध्याय, मेडिकल स्टोर मालिक

सोहित उपाध्याय