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‘विलुप्त होने की कगार पर वन्य जीवों की प्रजातियां’
ब्यूरो/बदायूं
Updated Sat, 08 Oct 2016 12:23 AM IST
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नेहरू मेमोरियल शिव नारायण दास पीजी कॉलेज के सभागार में हुए वन्य प्राणी सप्ताह के अंतर्गत संगोष्ठी में वनों के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रभागीय निदेशक समीर कुमार ने कहा कि विकास की ओर तेजी से बढ़ते जा रहे मनुष्य ने जब सृजन के बजाय विघटन को प्राथमिकता देना शुरू किया तो चिंता होना स्वाभाविक हुआ। आज अनेक वन्य जीवों की प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं। वनों के घटते क्षेत्रफल ने वन्य जीवों के वजूद को संकट में डाल दिया है। इन्हें बचाना आज बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। यह हम सब का कर्तव्य भी है। कार्यक्रम अध्यक्ष प्राचार्य डॉ. जीएस रावत ने कहा कि आश्चर्य है, वन्य जीवों का आचरण कभी भी प्रकृति के विपरीत नहीं होता, जबकि मनुष्य संवेदनशील होकर वन और वन्य जीवों के प्रति लाभार्थी बनने के साथ-साथ स्वार्थी भी हो गया है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को आह्वान किया कि वे वन्य जीवों के प्रति संवेदनशील बनें। डॉ. शैलेंद्र कबीर ने कहा कि वन्य जीवों और हमारा नजदीकी संबंध है। यह संबंध जितना अधिक भावनात्मक होगा, उतना ही वन्य प्राणियों के अस्तित्व को बचाने में सहायक होगा। हम सब संकल्प लेकर, वन्य जीवों का महत्व समझकर, उन्हें बचाएं। क्षेत्रीय वन अधिकारी सतेंद्र कुमार ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से जागरूकता बढ़ती है और लोगों तक वन्य जीवों के महत्व और उनको बचाने की बात पहुंचती है।
इस दौरान 'वन्य जीवों की महत्ता' शीर्षक पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में निशा, मेहराज ने प्रथम स्थान पाया, जबकि कन्हैया लाल तिवारी द्वितीय तथा स्वाती सिंह तृतीय स्थान पर रहीं। रितु यादव, दीपक गुप्ता, सोना वर्मा, आकांक्षा, शिवम भारद्वाज ने भी स्थान अर्जित किया। कार्यक्रम में अन्य डिग्री कॉलेज के प्रतिभागी भी शामिल हुए। निर्णायक के रूप में डॉ. आरके शर्मा, डॉ. मुक्ता सक्सेना, डॉ. निरूपमा सिंह, विजय शंखधार, सतीश मिश्रा, राजीव वर्मा, ज्ञान सिंह, पुष्पेंद्र कुमार, प्रवेंद्र दीक्षित आदि रहे।
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सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रभागीय निदेशक समीर कुमार ने कहा कि विकास की ओर तेजी से बढ़ते जा रहे मनुष्य ने जब सृजन के बजाय विघटन को प्राथमिकता देना शुरू किया तो चिंता होना स्वाभाविक हुआ। आज अनेक वन्य जीवों की प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं। वनों के घटते क्षेत्रफल ने वन्य जीवों के वजूद को संकट में डाल दिया है। इन्हें बचाना आज बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। यह हम सब का कर्तव्य भी है। कार्यक्रम अध्यक्ष प्राचार्य डॉ. जीएस रावत ने कहा कि आश्चर्य है, वन्य जीवों का आचरण कभी भी प्रकृति के विपरीत नहीं होता, जबकि मनुष्य संवेदनशील होकर वन और वन्य जीवों के प्रति लाभार्थी बनने के साथ-साथ स्वार्थी भी हो गया है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को आह्वान किया कि वे वन्य जीवों के प्रति संवेदनशील बनें। डॉ. शैलेंद्र कबीर ने कहा कि वन्य जीवों और हमारा नजदीकी संबंध है। यह संबंध जितना अधिक भावनात्मक होगा, उतना ही वन्य प्राणियों के अस्तित्व को बचाने में सहायक होगा। हम सब संकल्प लेकर, वन्य जीवों का महत्व समझकर, उन्हें बचाएं। क्षेत्रीय वन अधिकारी सतेंद्र कुमार ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से जागरूकता बढ़ती है और लोगों तक वन्य जीवों के महत्व और उनको बचाने की बात पहुंचती है।
इस दौरान 'वन्य जीवों की महत्ता' शीर्षक पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में निशा, मेहराज ने प्रथम स्थान पाया, जबकि कन्हैया लाल तिवारी द्वितीय तथा स्वाती सिंह तृतीय स्थान पर रहीं। रितु यादव, दीपक गुप्ता, सोना वर्मा, आकांक्षा, शिवम भारद्वाज ने भी स्थान अर्जित किया। कार्यक्रम में अन्य डिग्री कॉलेज के प्रतिभागी भी शामिल हुए। निर्णायक के रूप में डॉ. आरके शर्मा, डॉ. मुक्ता सक्सेना, डॉ. निरूपमा सिंह, विजय शंखधार, सतीश मिश्रा, राजीव वर्मा, ज्ञान सिंह, पुष्पेंद्र कुमार, प्रवेंद्र दीक्षित आदि रहे।
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