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Budaun News: अचानक सड़क पर आया बंदरों का झुंड, हुआ ऐसा हादसा, बाइक सवार की हो गई मौत

Sun, 08 Oct 2023 01:29 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 08 Oct 2023 01:29 PM IST
सार

बदायूं के उझानी कोतवाली क्षेत्र में वितरोई मोड़ के पास युवक बंदर से बचने के चक्कर में अनियंत्रित होकर उसकी बाइक फिसल गई। सड़क पर बाइक सहित गिरने से युवक की मौत हो गई। युवक की मौत से परिवार में कोहरा मच गया।  

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man dies due to bike slips while trying to escape from monkey on road in Budaun
सड़क पर बंदर, मृतक गौतम का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बदायूं के उझानी क्षेत्र में गंगा स्नान कर घर लौटते समय बंदर से बचने की कोशिश में बाइक सवार किशनपाल उर्फ गौतम फिसलकर गंभीर रूप से घायल हो गए। लहूलुहान गौतम को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाने में जाम की वजह से करीब एक घंटा लग गया। फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की इमरजेंसी में डॉक्टर नहीं मिले। मरहम-पट्टी कर उसे रेफर कर दिया गया, लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने के बाद गौतम की मौत गई।

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हादसा बरेली-मथुरा हाईवे पर रविवार सुबह करीब आठ बजे हुआ। मृतक किशनपाल (27) कोतवाली क्षेत्र के गांव चेतूनगला के स्वर्गीय रामपाल यादव का इकलौता बेटा था। गंगा स्नान से लौटते समय वितरोई मोड़ के पास हाईवे पर बंदर को बचाने की कोशिश में वह बाइक समेत सड़क पर जा गिरा। हेलमेट न होने की वजह से उसके सिर में गंभीर चोट आई। एंबुलेंस उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर चली तो मंडी मोड़ के पास जाम में फंस गई। 
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जैसे-तैसे करीब एक घंटे बाद एंबुलेंस अस्पताल पहुंची तो इमरजेंसी में डॉक्टर नदारद थे। स्वास्थ्य कर्मियों ने गौतम की हालत नाजुक बताते हुए चिकित्साधिकारी को दो बार कॉल की, लेकिन उन्हें इमरजेंसी तक पहुंचने में करीब आधा घंटा लग गया। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्साधिकारी के देर से पहुंचने के बारे में चिकित्सा अधीक्षक राजकुमार गंगवार को जानकारी मिली तो उन्होंने आकर उसे जिला अस्पताल रेफर किया। मृतक के परिजनों में सूरजपाल ने बताया कि समय रहते गौतम को इलाज मिल जाता तो जान बच सकती थी।

आठ महीने पहले हुई थी पिता की मृत्यु

चेतूनगला निवासी किशनपाल उर्फ गौतम के पिता रामपाल यादव की बीमारी के चलते करीब आठ महीना पहले मृत्यु हो गई थी। गौतम ही अपनी मां मार्गश्री का इकलौता सहारा था। गौतम की दो संतान में छह साल का बेटा रोहित और एक साल की मासूम शिवानी है। सड़क हादसे में उसकी मौत के बाद से पत्नी सत्यवती और मां मार्गश्री बदहवास है। मासूम बच्चों को तो यह भी नहीं बताया गया कि उनके सिर से पिता का साया उठ गया है।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजकुमार गंगवार ने बताया कि रविवार को चिकित्साधिकारी डॉ. आकांक्षा की इमरजेंसी ड्यूटी थीं। फार्मासिस्ट ने कॉल करके उन्हें बुला लिया था। रास्ते में थोड़ी देर जरूर लग गई, लेकिन उनसे पहले ही हम खुद घायल को देख चुके थे। एंबुलेंस जाम में फंस जाने से भी देर हो गई थी।

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