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दूसरों की जिंदगी के लिए आगे आए महादानी
बदायूं/ उझानी।
Updated Mon, 02 Oct 2017 12:02 AM IST
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रक्तदान
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला फाउंडेशन का आयोजन, जिला अस्पताल और गूंज सामाजिक जनकल्याण शिक्षा समिति का रहा सहयोग
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से रविवार को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिला अस्पताल में लगे शिविर में ब्लड बैंक और उझानी में आयोजित शिविर में गूंज सामाजिक जनकल्याण शिक्षा समिति का सहयोग रहा। दोनों शिविरों में 40 लोगों ने रक्तदान किया। रक्तदान करने वालों को अमर उजाला फाउंडेशन और सहयोगी संस्थाओं की ओर से प्रशस्ति पत्र दिए गए।
जिला अस्पताल में सुबह दस बजे शिविर शुरू हुआ, जिसका उद्घाटन सीएमएस डॉ. आरएस यादव ने किया। यहां सबसे पहले मोहल्ला कल्याण नगर निवासी उमेश चंद्र सक्सेना ने खून दिया। जिला अस्पताल में शिविर दोपहर दो बजे तक चला। शिविर में सीनियर लैब टेक्नीशियन बीके शुक्ला, लैब टेक्नी शियन सोहराज खां, स्टाफ नर्स मीना सिंह आदि का सहयोग रहा।
उझानी स्थित एक बेंकट हाल में आयोजित हुए शिविर का उद्घाटन सुबह करीब 11 बजे मुख्य अतिथि डॉ. नईमउद्दीन ने फीता काटकर किया। सबसे पहले भदवार गर्ल्स इंटर कॉलेज की शिक्षिका दीक्षा छाबड़ा ने महादान किया। इसके बाद रक्तदान का सिलसिला चला जो दोपहर दो बजे तक जारी रहा। इस दौरान गूंज सामाजिक जनकल्याण शिक्षा समिति के उपाध्यक्ष किशनचंद्र शर्मा और सचिव राजन मेंदीरत्ता मौजूद रहे। महादानियों को मानवसेवा की शपथ भी दिलाई गई।
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ये रहे महादानी: प्रांजल वैश्य, संदीप गुप्ता, राम सरन, श्याम, ओमपाल, तिलक कुमार, अनुराग धींगड़ा, मयंक राज, सनी यादव, मधुकर मिश्रा, नीरज कुमार सचदेवा, अमित माथुर, शिवम, सोमिल, पंकज, पारस, मोहित गर्ग, विपुल, रवि थरेजा, शुभम, स्वनिल वर्मा, नितिन गुप्ता, रोहन शर्मा, मीरा यादव और दीक्षा छाबड़ा। अनुराग धींगड़ा ने भी खून दिया। वह अब तक 42 बार रक्तदान कर चुके हैं।
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क्या कहते हैं महादानी
खेलों को बढ़ावा देने में अहम योगदान निभाने वाले मधुकर मिश्र ने रक्तदान को एक ऐसा कार्य बताया जो जरूरतमंद की जिंदगी के लिए अहम साबित होता है। बोले, रक्तदान के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए सामूहिक कोशिश होनी चाहिए। इससे रक्तदाता का आत्मीय सुकून मिलता है।
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व्यापारी नीरज सचदेवा ने बताया कि इंसान को अपने जीवन में रक्तदान करते वक्त यह नहीं सोचना चाहिए कि वह पहले भी रक्तदान कर चुका है। इससे शारीरिक कमजोरी नहीं आती बल्कि रक्तदान करने से शरीर में ताजगी और स्फूर्ति का संचार रहता है। मन में सेवाभाव बरकरार रहना चाहिए।
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युवा समाजसेवी स्वनिल वर्मा ने रक्तदान करने से पहले लोगों को भी मानसेवा के लिए प्रेरित किया। उन्होंने रक्तदान का महादान बताते हुए शिविर के आयोजन कर्ताओं की तारीफ की। कहा- एक बार नहीं बल्कि बार-बार रक्तदान करता रहूंगा। जीवन का बार-बार रक्तदान का सुख मिलेगा।
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शहर के मोहल्ला कल्याण नगर निवासी उमेश चंद्र कश्यप ने कहा कि वह अमर उजाला के लिए नियमित रक्तदान करते आ रहे हैं। हर किसी को रक्तदान अवश्य करना चाहिए।
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अलापुर निवासी रबेल सिंह ने बताया कि उन्होंने पहली बार रक्तदान किया। रक्तदान करने से पहले मन में थोड़ा सा डर था, लेकिन पहली बार रक्तदान करके अपने आप को गौरवांवित महसूस कर रहा हूं।
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मढई चौक निवासी प्रखर सिंह ने बताया कि अब तक उनके पापा राहुल चौबे रक्तदान करते थे। अमर उजाला में रक्तदार शिविर की खबर पड़ने के बाद रक्तदान करने का फैसला लिया। रक्तदान करने के बाद काफी खुश हुई।
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मढई चौक निवासी दिशांत गुप्ता ने बताया कि वह इससे पहले भी रक्तदान कर चुके हैं। अमर उजाला की ओर से लगे शिविर की जानकारी मिली और रक्तदान करने चलाया आया। क्योंकि हमारा दान किया गया रक्त किसी की जान बचा सकता है। यह सबसे बड़ा पुण्य का काम है।
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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से रविवार को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिला अस्पताल में लगे शिविर में ब्लड बैंक और उझानी में आयोजित शिविर में गूंज सामाजिक जनकल्याण शिक्षा समिति का सहयोग रहा। दोनों शिविरों में 40 लोगों ने रक्तदान किया। रक्तदान करने वालों को अमर उजाला फाउंडेशन और सहयोगी संस्थाओं की ओर से प्रशस्ति पत्र दिए गए।
जिला अस्पताल में सुबह दस बजे शिविर शुरू हुआ, जिसका उद्घाटन सीएमएस डॉ. आरएस यादव ने किया। यहां सबसे पहले मोहल्ला कल्याण नगर निवासी उमेश चंद्र सक्सेना ने खून दिया। जिला अस्पताल में शिविर दोपहर दो बजे तक चला। शिविर में सीनियर लैब टेक्नीशियन बीके शुक्ला, लैब टेक्नी शियन सोहराज खां, स्टाफ नर्स मीना सिंह आदि का सहयोग रहा।
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उझानी स्थित एक बेंकट हाल में आयोजित हुए शिविर का उद्घाटन सुबह करीब 11 बजे मुख्य अतिथि डॉ. नईमउद्दीन ने फीता काटकर किया। सबसे पहले भदवार गर्ल्स इंटर कॉलेज की शिक्षिका दीक्षा छाबड़ा ने महादान किया। इसके बाद रक्तदान का सिलसिला चला जो दोपहर दो बजे तक जारी रहा। इस दौरान गूंज सामाजिक जनकल्याण शिक्षा समिति के उपाध्यक्ष किशनचंद्र शर्मा और सचिव राजन मेंदीरत्ता मौजूद रहे। महादानियों को मानवसेवा की शपथ भी दिलाई गई।
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ये रहे महादानी: प्रांजल वैश्य, संदीप गुप्ता, राम सरन, श्याम, ओमपाल, तिलक कुमार, अनुराग धींगड़ा, मयंक राज, सनी यादव, मधुकर मिश्रा, नीरज कुमार सचदेवा, अमित माथुर, शिवम, सोमिल, पंकज, पारस, मोहित गर्ग, विपुल, रवि थरेजा, शुभम, स्वनिल वर्मा, नितिन गुप्ता, रोहन शर्मा, मीरा यादव और दीक्षा छाबड़ा। अनुराग धींगड़ा ने भी खून दिया। वह अब तक 42 बार रक्तदान कर चुके हैं।
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क्या कहते हैं महादानी
खेलों को बढ़ावा देने में अहम योगदान निभाने वाले मधुकर मिश्र ने रक्तदान को एक ऐसा कार्य बताया जो जरूरतमंद की जिंदगी के लिए अहम साबित होता है। बोले, रक्तदान के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए सामूहिक कोशिश होनी चाहिए। इससे रक्तदाता का आत्मीय सुकून मिलता है।
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व्यापारी नीरज सचदेवा ने बताया कि इंसान को अपने जीवन में रक्तदान करते वक्त यह नहीं सोचना चाहिए कि वह पहले भी रक्तदान कर चुका है। इससे शारीरिक कमजोरी नहीं आती बल्कि रक्तदान करने से शरीर में ताजगी और स्फूर्ति का संचार रहता है। मन में सेवाभाव बरकरार रहना चाहिए।
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युवा समाजसेवी स्वनिल वर्मा ने रक्तदान करने से पहले लोगों को भी मानसेवा के लिए प्रेरित किया। उन्होंने रक्तदान का महादान बताते हुए शिविर के आयोजन कर्ताओं की तारीफ की। कहा- एक बार नहीं बल्कि बार-बार रक्तदान करता रहूंगा। जीवन का बार-बार रक्तदान का सुख मिलेगा।
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शहर के मोहल्ला कल्याण नगर निवासी उमेश चंद्र कश्यप ने कहा कि वह अमर उजाला के लिए नियमित रक्तदान करते आ रहे हैं। हर किसी को रक्तदान अवश्य करना चाहिए।
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अलापुर निवासी रबेल सिंह ने बताया कि उन्होंने पहली बार रक्तदान किया। रक्तदान करने से पहले मन में थोड़ा सा डर था, लेकिन पहली बार रक्तदान करके अपने आप को गौरवांवित महसूस कर रहा हूं।
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मढई चौक निवासी प्रखर सिंह ने बताया कि अब तक उनके पापा राहुल चौबे रक्तदान करते थे। अमर उजाला में रक्तदार शिविर की खबर पड़ने के बाद रक्तदान करने का फैसला लिया। रक्तदान करने के बाद काफी खुश हुई।
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मढई चौक निवासी दिशांत गुप्ता ने बताया कि वह इससे पहले भी रक्तदान कर चुके हैं। अमर उजाला की ओर से लगे शिविर की जानकारी मिली और रक्तदान करने चलाया आया। क्योंकि हमारा दान किया गया रक्त किसी की जान बचा सकता है। यह सबसे बड़ा पुण्य का काम है।