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Budaun News: सिर्फ आरती तक सिमटे...कैसे मिलेगा पर्यटन को बढ़ावा
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कछला में गंगा किनारे कच्चा घाट। संवाद
उझानी/ कछला। गंगाघाट के कायाकल्प की स्थानीय स्तर से हुई पहल लखनऊ तक सुनाई देने के बाद दिल्ली में सिमटकर रह गई। तीर्थस्थल के साथ घाट को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किए जाने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री और नगर पंचायत प्रशासन की ओर से प्रस्ताव भेजे गए। बावजूद इसके घाट का विकास महाआरती से आगे नहीं बढ़ सका।
कछला घाट के विकास के लिए कवायद करीब एक दशक से चल रही है। तमाम प्रयासों के बाद घाट पर 2019 में वाराणसी की तर्ज पर आरती शुरू हुई। इसके बाद केंद्र और प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने घाट का कायाकल्प कराने दावा किया। हालांकि इससे पहले कछला नगर पंचायत की ओर से कछला घाट को विकसित करने के लिए 51 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था।
दो बार डीपीआर तैयार हुई, फिर भी प्रस्ताव मंजूर नहीं हो पाया। इसके बाद गंगाघाट के जीर्णोद्धार के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने पहल की तो पत्रावली आगे बढ़नी शुरू हुई। प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने केंद्रीय राज्यमंत्री को 19 करोड़ रुपये का प्रस्ताव सौंपा, जो प्रदेश के जल शक्ति मंत्रालय से स्वीकृत होकर दिल्ली में नमामि गंगे के मुख्यालय तक पहुंच चुका है।
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अब घाट को नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत ही विकसित किया जाएगा, लेकिन नमामि गंगे योजना के तहत गंगा घाट के विकास के लिए बजट जारी नहीं किया जा रहा है। इसे लेकर कछला नगर पंचायत अध्यक्ष जगदीश सिंह ने बताया कि नमामि गंगे से धनराशि अवमुक्त कराने के लिए वह शुक्रवार को दिल्ली में थे। अफसरों से बातचीत हुई है।
उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि 51 करोड़ रुपये का प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद पूरी धनराशि अवमुक्त हो जाए तो पक्के घाट, पार्क, प्रकाश व्यवस्था, गेस्ट हाउस और श्रद्धालुओं के अनुरूप अन्य सुविधाएं बढ़ें। बता दें कि कछला घाट पर राजस्थान, मध्यप्रदेश के अलावा आगरा, मथुरा, कासगंज, बदायूं, बरेली, पीलीभीत जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं। पूर्णिमा समेत विशेष स्नान पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं।
सुविधाओं के अभाव में हुए हादसों में जा चुकी है कई श्रद्धालुओं की जान
कछला गंगाघाट पर सुविधाओं के अभाव में कई बार हादसे हुए हैं। अप्रैल से जुलाई 2024 के बीच तो हादसों की बाढ़ ही आ गई थी। पूर्णिमा और विशेष स्नान पर्वों पर डुबकी लगाने आए बिहार के बेगूसराय, मथुरा के दतिया, दिल्ली के मंगोलपुरी, आगरा के सहायगंज और कुबेरपुर, कासगंज आदि के 11 श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है। इससे पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के पांच छात्र भी बह गए थे। इसमें तीन की मौत हो गई थी। हर हादसे के बाद पक्के घाट बनवाने की आवाज बुलंद हुई, लेकिन योजना परवान नहीं चढ़ पाई।
नमामि गंगे परियोजना के तहत ही कछला घाट को विकसित किया जाना है। जल्द ही डीपीआर तैयार करेंगे। बजट जारी करके काम कराया जाएगा। - मनीष सिंह, पर्यटन निरीक्षक
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कछला घाट के विकास के लिए कवायद करीब एक दशक से चल रही है। तमाम प्रयासों के बाद घाट पर 2019 में वाराणसी की तर्ज पर आरती शुरू हुई। इसके बाद केंद्र और प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने घाट का कायाकल्प कराने दावा किया। हालांकि इससे पहले कछला नगर पंचायत की ओर से कछला घाट को विकसित करने के लिए 51 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था।
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दो बार डीपीआर तैयार हुई, फिर भी प्रस्ताव मंजूर नहीं हो पाया। इसके बाद गंगाघाट के जीर्णोद्धार के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने पहल की तो पत्रावली आगे बढ़नी शुरू हुई। प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने केंद्रीय राज्यमंत्री को 19 करोड़ रुपये का प्रस्ताव सौंपा, जो प्रदेश के जल शक्ति मंत्रालय से स्वीकृत होकर दिल्ली में नमामि गंगे के मुख्यालय तक पहुंच चुका है।
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अब घाट को नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत ही विकसित किया जाएगा, लेकिन नमामि गंगे योजना के तहत गंगा घाट के विकास के लिए बजट जारी नहीं किया जा रहा है। इसे लेकर कछला नगर पंचायत अध्यक्ष जगदीश सिंह ने बताया कि नमामि गंगे से धनराशि अवमुक्त कराने के लिए वह शुक्रवार को दिल्ली में थे। अफसरों से बातचीत हुई है।
उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि 51 करोड़ रुपये का प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद पूरी धनराशि अवमुक्त हो जाए तो पक्के घाट, पार्क, प्रकाश व्यवस्था, गेस्ट हाउस और श्रद्धालुओं के अनुरूप अन्य सुविधाएं बढ़ें। बता दें कि कछला घाट पर राजस्थान, मध्यप्रदेश के अलावा आगरा, मथुरा, कासगंज, बदायूं, बरेली, पीलीभीत जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं। पूर्णिमा समेत विशेष स्नान पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं।
सुविधाओं के अभाव में हुए हादसों में जा चुकी है कई श्रद्धालुओं की जान
कछला गंगाघाट पर सुविधाओं के अभाव में कई बार हादसे हुए हैं। अप्रैल से जुलाई 2024 के बीच तो हादसों की बाढ़ ही आ गई थी। पूर्णिमा और विशेष स्नान पर्वों पर डुबकी लगाने आए बिहार के बेगूसराय, मथुरा के दतिया, दिल्ली के मंगोलपुरी, आगरा के सहायगंज और कुबेरपुर, कासगंज आदि के 11 श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है। इससे पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के पांच छात्र भी बह गए थे। इसमें तीन की मौत हो गई थी। हर हादसे के बाद पक्के घाट बनवाने की आवाज बुलंद हुई, लेकिन योजना परवान नहीं चढ़ पाई।
नमामि गंगे परियोजना के तहत ही कछला घाट को विकसित किया जाना है। जल्द ही डीपीआर तैयार करेंगे। बजट जारी करके काम कराया जाएगा। - मनीष सिंह, पर्यटन निरीक्षक