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Budaun News: बालक का अपहरण कर हत्या करने के मामले में तीन को आजीवन कारावास
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बदायूं। फिरौती के लिए अपहरण करके मासूम की हत्या करने के सात साल पुराने मामले में स्पेशल डकैती कोर्ट के न्यायाधीश इश्त्याक अली ने तीन अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उन पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
थाना कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले जूता व्यापारी खालिद अली ने 18 जनवरी 2016 को अपने सात वर्षीय बेटे उसैदुल के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अगले ही दिन उसका शव बस्तरा के जंगल से बरामद हुआ था। पुलिस को जांच में पता चला कि उसैदुल को बाइक पर मोहल्ले के ही तीन युवकों के साथ देखा गया था।
ये तीनों खालिद के पड़ोसी थे। 17 जनवरी की रात खालिद के पास फोन आया। फोन करने वाले ने उसैदुल के बदले 10 लाख की फिरौती की मांग करते हुए रकम का जल्द इंतजाम करने को कहा। खालिद ने यह नंबर पुलिस को दे दिया। नंबर को सर्विलांस पर लगाने के बाद फरहान, जोएब और लब्बू पुलिस के निशाने पर आ गए। पुलिस ने तीनों से सख्ती से पूछताछ की तो सच सामने आ गया।
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तीनों ने पुलिस को उसैदुल की हत्या कर लाश बस्तरा के जंगल में फेंकने की बात बताई। यह भी बताया कि उन्होंने उसैदुल का फिरौती के लिए अपहरण किया था। पकड़े जाने के डर से उसे पहले ही गला दबाकर मार दिया। बाद में पहचान मिटाने के लिए शव को जंगल में फेंक दिया। उन्होंने शव को जलाने की भी कोशिश की थी। पुलिस ने तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया।
इस पूरे मामले की विवेचना तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार ने की। साक्ष्य संकलन की कार्रवाई करते हुए प्राप्त साक्ष्यों एवं गवाहों के बयान के आधार पर विवेचक ने आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। बृहस्पतिवार को तीनों अभियुक्तों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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हत्या के बाद जमकर हुआ था बबाल
- उसैदुल की हत्या के बाद जब ये खबर जब चौधरी सराय मोहल्ले में पहुंची तो वहां उपद्रव शुरू हो गया। परिवार और उनके रिश्तेदारों ने जोएब के घर पर धावा बोलकर आग लगा दी। फरहान और लब्बू के घरों में तोड़फोड़ की। चौधरी सराय में करीब तीन घंटे तक उपद्रव होता रहा था। भारी तादाद में पहुंची पुलिस और पीएसी को भी हालात काबू करने में पसीने छूट गए। पुलिस और प्रशासन के कई अधिकारी चौधरी सराय में जमे रहे। जेसे तैसे बवाल शांत किया गया था।
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थाना कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले जूता व्यापारी खालिद अली ने 18 जनवरी 2016 को अपने सात वर्षीय बेटे उसैदुल के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अगले ही दिन उसका शव बस्तरा के जंगल से बरामद हुआ था। पुलिस को जांच में पता चला कि उसैदुल को बाइक पर मोहल्ले के ही तीन युवकों के साथ देखा गया था।
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ये तीनों खालिद के पड़ोसी थे। 17 जनवरी की रात खालिद के पास फोन आया। फोन करने वाले ने उसैदुल के बदले 10 लाख की फिरौती की मांग करते हुए रकम का जल्द इंतजाम करने को कहा। खालिद ने यह नंबर पुलिस को दे दिया। नंबर को सर्विलांस पर लगाने के बाद फरहान, जोएब और लब्बू पुलिस के निशाने पर आ गए। पुलिस ने तीनों से सख्ती से पूछताछ की तो सच सामने आ गया।
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तीनों ने पुलिस को उसैदुल की हत्या कर लाश बस्तरा के जंगल में फेंकने की बात बताई। यह भी बताया कि उन्होंने उसैदुल का फिरौती के लिए अपहरण किया था। पकड़े जाने के डर से उसे पहले ही गला दबाकर मार दिया। बाद में पहचान मिटाने के लिए शव को जंगल में फेंक दिया। उन्होंने शव को जलाने की भी कोशिश की थी। पुलिस ने तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया।
इस पूरे मामले की विवेचना तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार ने की। साक्ष्य संकलन की कार्रवाई करते हुए प्राप्त साक्ष्यों एवं गवाहों के बयान के आधार पर विवेचक ने आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। बृहस्पतिवार को तीनों अभियुक्तों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
हत्या के बाद जमकर हुआ था बबाल
- उसैदुल की हत्या के बाद जब ये खबर जब चौधरी सराय मोहल्ले में पहुंची तो वहां उपद्रव शुरू हो गया। परिवार और उनके रिश्तेदारों ने जोएब के घर पर धावा बोलकर आग लगा दी। फरहान और लब्बू के घरों में तोड़फोड़ की। चौधरी सराय में करीब तीन घंटे तक उपद्रव होता रहा था। भारी तादाद में पहुंची पुलिस और पीएसी को भी हालात काबू करने में पसीने छूट गए। पुलिस और प्रशासन के कई अधिकारी चौधरी सराय में जमे रहे। जेसे तैसे बवाल शांत किया गया था।