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स्वयं के निर्वाह की चिंता परमात्मा पर छोड़ करें परोपकार

Fri, 25 Sep 2015 08:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो ,बदायूं
अमर उजाला ब्यूरो ,बदायूं Updated Fri, 25 Sep 2015 08:27 PM IST
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let go the worries of own livelyhood and live for others
इस अवसर पर संत ने रामायण का प्रसंग सुनाया जिसमें माता जानकी के चरण में जयंत ने अपनी चोंच से प्रहार किया था। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने एक तिनके का तीर बनाकर जयंत को निशाना बनाया, लेकिन वह तीर जयंत के पीछे ही रहा। जयंत शरण लेने के लिए विभिन्न स्थानों पर गया। मगर किसी ने उसकी रक्षा नहीं की। अंत में वह नारद मुनि के कहने पर उसे भगवान राम की शरण में जाना पड़ा। भगवान राम ने उसे एक नेत्र का करके क्षमा कर दिया। अतएव भगवान अपनी शरण में आए हुए प्राणि की सदैव रक्षा करते हैं। भगवान पर यह प्रण है कि मैं अपने शरणागत की रक्षा करता हूं। इस मौके पर सुभाष आहुजा, कवि कुलदीप अंगार, अशोक नांरग, मदन लाल, अशोक राय, श्रीनिवास राजपूत, नरेंद्र गरल, डा.राजाबाबू वार्ष्णेय, नीरज माहेश्वरी, मनोज, सुवीन माहेश्वरी, संजीव, दिनेश चंद्र मौजूद रहे।
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