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Budaun News: पिछले साल भी दिसंबर में हुई थी 40 नवजात की मौत...पर नहीं जागा स्वास्थ्य महकमा
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जिला महिला अस्पताल। संवाद
बदायूं। जिला महिला अस्पताल में सीपैप मशीनों व वेंटिलेटर के अभाव में हर माह लगभग 25-30 नवजात की मौत हो रही है। पिछले साल भी दिसंबर में 40 नवजात की मौत पर मामला शासन तक पहुंचा था, इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार नहीं जागे। अब शनिवार को चार बच्चों की मौत ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
बता दें कि शासन से तीन साल पहले मिले 20 लाख रुपयों से चार सीपैप मशीनें खरीदी गईं थी। जो अब कबाड़ होने के कगार पर हैं। विभाग ने अब तक इनको एसएनसीयू में लगाने की जहमत नहीं उठाई है। जिस कारण आए दिन किसी न किसी नवजात की मौत हो रही है।
वेंटिलेटर के अभाव में एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबार्न केयर यूनिट) में सीपैप मशीन लगाकर भी नवजात के उपचार को सुगम बनाया जा सकता है। लापरवाही का आलम यह है कि 20 लाख से खरीदी गईं सीपैप मशीनें अब तक नहीं लग सकीं हैं। मशीन अब तक क्यों नहीं लगाई गईं इसका किसी के पास जवाब नहीं है। (संवाद)
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एडी हेल्थ ने स्टाफ को प्रशिक्षित कराने के दिए थे निर्देश
पिछले साल भी दिसंबर में 40 नवजात की मौत हुई तो मामला शासन तक पहुंचा था। इसपर तत्कालीन एडी हेल्थ डॉ. पुष्पा पंत ने सीएमएस डॉ. इंदुकांत वर्मा को स्टाफ को प्रशिक्षित कर सीपैप मशीनें लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन आज तक स्टाफ को प्रशिक्षित नहीं किया गया।
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यह है सीपैप मशीन का कार्य
एसएनसीयू के डॉक्टर संदीप कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि जो बच्चे कम समय में जन्म लेते हैं, उनके फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते। उनको सांस लेने में दिक्कत होती है। ऐसे बच्चों को सीपैप मशीन या वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है। सांस लेने में दिक्कत होने पर सीपैप मदद करता है।
वहीं, महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. इंदुकांत वर्मा ने बताया कि करीब तीन साल पहले चार सीपैप मशीनें खरीदी गईं थीं। इनको चलाने के लिए स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाना था। कई बार पत्राचार किया गया लेकिन अब तक ट्रेनिंग नहीं कराई गई। जब तक स्टाफ प्रशिक्षित नहीं होगा तब तक सीपैप मशीनें संचालित नहीं की जा सकतीं।
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बता दें कि शासन से तीन साल पहले मिले 20 लाख रुपयों से चार सीपैप मशीनें खरीदी गईं थी। जो अब कबाड़ होने के कगार पर हैं। विभाग ने अब तक इनको एसएनसीयू में लगाने की जहमत नहीं उठाई है। जिस कारण आए दिन किसी न किसी नवजात की मौत हो रही है।
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वेंटिलेटर के अभाव में एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबार्न केयर यूनिट) में सीपैप मशीन लगाकर भी नवजात के उपचार को सुगम बनाया जा सकता है। लापरवाही का आलम यह है कि 20 लाख से खरीदी गईं सीपैप मशीनें अब तक नहीं लग सकीं हैं। मशीन अब तक क्यों नहीं लगाई गईं इसका किसी के पास जवाब नहीं है। (संवाद)
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एडी हेल्थ ने स्टाफ को प्रशिक्षित कराने के दिए थे निर्देश
पिछले साल भी दिसंबर में 40 नवजात की मौत हुई तो मामला शासन तक पहुंचा था। इसपर तत्कालीन एडी हेल्थ डॉ. पुष्पा पंत ने सीएमएस डॉ. इंदुकांत वर्मा को स्टाफ को प्रशिक्षित कर सीपैप मशीनें लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन आज तक स्टाफ को प्रशिक्षित नहीं किया गया।
यह है सीपैप मशीन का कार्य
एसएनसीयू के डॉक्टर संदीप कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि जो बच्चे कम समय में जन्म लेते हैं, उनके फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते। उनको सांस लेने में दिक्कत होती है। ऐसे बच्चों को सीपैप मशीन या वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है। सांस लेने में दिक्कत होने पर सीपैप मदद करता है।
वहीं, महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. इंदुकांत वर्मा ने बताया कि करीब तीन साल पहले चार सीपैप मशीनें खरीदी गईं थीं। इनको चलाने के लिए स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाना था। कई बार पत्राचार किया गया लेकिन अब तक ट्रेनिंग नहीं कराई गई। जब तक स्टाफ प्रशिक्षित नहीं होगा तब तक सीपैप मशीनें संचालित नहीं की जा सकतीं।