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Budaun News: लापरवाही की मार... हादसों का मुआवजा केवल एफआईआर
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पीडीएफ।
मौके पर लोगों का गुस्सा कम करने के लिए करा दी जाती है औपचारिकता, आज तक नहीं हो सकी कार्रवाई
एक के बाद होते जा रहे हादसे, जिम्मेदार साधे बैठे मौन, प्रशासन भी खामोश
सौरभ सक्सेना
बदायूं। एक के बाद एक हादसे हो रहे हैं, हर बार विभाग की लापरवाही और अनदेखी सामने आ रही है लेकिन कार्रवाई और मुआवजे के नाम पर कुछ नहीं हो रहा। हादसे में जिसका करीबी जाता है, उसके घर में चीखपुकार मचती है, मामला ठंडा करने के लिए कुछ विभागीय लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई जाती है, फिर कुछ दिन बाद सब शांत हो जाता है। ऐसा एक बार नहीं, कई बार हुआ है लेकिन आज तक बात इससे आगे नहीं बढ़ी। अधिकारियों को तो यह तक नहीं पता कि किस घटना में किसे और कितना मुआवजा दिया गया।
बिसौली में जहां हादसा हुआ, वह कस्बे की प्रमुख लाइन है जो इस कॉलोनी से होकर जा रही है। यहां हाईटेंशन लाइन टूटने से तीन मौतों का मामला कोई पहला नहीं है, इससे पहले भी जिले में कहीं हाईटेंशन लाइन का तार टूटने से तो कहीं टूटे पड़े तार पर पैर रखने से कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं लेकिन विभागीय अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
सैदपुर में मुरादाबाद- फर्रुखाबाद हाईवे के पास करीब सात माह पूर्व शादी का टेंट लगा रहे तीन लोग हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गए थे, जिसमें वजीरगंज निवासी मजदूर शान मोहम्मद की मृत्यु हो गई थी। मोहल्ला गिरधरपुर में नल उखाड़ने पर घर के ऊपर से जा रही हाईटेंशन लाइन के छूने से मिस्त्री समय समेत दो लोग घायल हुए। मिस्त्री गोपा मौर्य का हाथ हमेशा के लिए खराब हो गया।
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ऐसा ही हादसा उरैना में हुआ था, जिसमें तीन लोग हाईटेंशन लाइन छूने से घायल हो गए। पता चला था कि इन घरों के ऊपर से हाईटेंशन की लाइन जा रही है जो कई बार शिकायत करने और हादसा होने के बाद भी हटाई नहीं गई। इसी तरह दबतोरी क्षेत्र के ग्राम लक्ष्मीपुर में करीब डेढ़ वर्ष पहले एक युवक की मौत हो गई थी। उसके घर के ऊपर से लाइन इतनी लटक रही थी कि उसका हाथ उससे छू गया था। (संवाद)
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ये भी हुए हादसे
19 जुलाई- 23 - सहसवान के गांव इब्राहिमपुर गढ़ी निवासी रामपाल घर के बाहर टहल रहा था। ऊपर से गुजर रही लाइन का तार उनके ऊपर टूटकर गिर गया और उसकी मौत हो गई।
15 जुलाई-23- मुजरिया क्षेत्र के गांव मूसेपुर में हाईटेंशन लाइन टूटने से आठ वर्षीय शिवानी की मौत हो गई जबकि कई लोग बाल-बाल बच गए।
27 जून- 23- सहसवान में पशुओं को चारा लेने जा रहे गांव रसूलपुर कला निवासी किसान सियाराम (60) की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर मौत हो गई।
तीन नवंबर-22- उझानी के गांव पतौरा निवासी वीरेंद्र का 18 साल का पुत्र सुधीश साइकिल से खेत जाने को निकला था। रास्ते में टूटे पड़े तार की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई।
21 अगस्त- 22 ककराला-अलापुर मार्ग पर रविवार दोपहर 11 हजार वोल्ट का हाईटेंशन तार टूटकर गिर जाने से बाइक सवार किसान कैसर अली (55) और साकिर अली (58) की मौत हो गई थी। दोनों बाइक से अमरूद के बाग में पानी लगाने जा रहे थे।
आठ अगस्त- 22- उसावां थाना क्षेत्र के गांव मरौरी में किसान श्याम पाल की करंट लगने से मौत हो गई थी। वह खेत पर ट्यूबवेल चलाने गए थे।
27 मई- 22- ककराला के वार्ड तीन निवासी रामनिवास शर्मा की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। कस्बे के बाहर तार टूटा पड़ा था जिस पर उनका पैर पड़ गया था।
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इन पर हुई एफआईआर
- बिसौली में हुए हादसे के बाद एक्सईएन, एई, जेई समेत एसएसओ पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इससे पहले मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव मूसेपुर में बच्ची की मौत के मामले में अवर अभियंता और लाइनमैन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। पिछले साल ककराला-अलापुर मार्ग पर हाईटेंशन तार टूटकर गिर जाने से दो बाइक सवार किसानों की मौत के मामले में 10 बिजली कर्मियों पर रिपोर्ट हुई थी। इससे पहले 14 अक्तूबर को मंडी समिति रोड पर पोल पर करंट आने से घोड़े की मौत और उसके मालिक के झुलसने के मामले में एक्सईएन पर मामला दर्ज किया गया था लेकिन आज तक बात एफआईआर से आगे नहीं बढ़ी। दरअसल, एफआईआर दर्ज हाेने के बाद मामला पुलिस के पास चला जाता है और वहां ले देकर दोषी अधिकारी और कर्मचारी बच निकलते हैं। कई बार पदनाम से की गई एफआईआर का लाभ भी ट्रांसफर होने के बाद अधिकारियों को मिल जाता है।
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पशुओं की मौत का तो आंकड़ा ही नहीं
हाईटेंशन लाइन का तार गिरने से जहां तमाम लोगों की जान जा चुकी हैं, वहीं पशुओं की तो मौत का आंकड़ा ही नहीं है। विगत 12 जुलाई को सहसवान के मोहल्ला कटरा में हाईटेंशन लाइन का तार गिरने से एक भैंस व पढि़या की मौत हो गई। पिछले साल अलापुर थाना क्षेत्र के गांव जगत में दो गायों समेत चार मवेशियाें की मौत लाइन टूटने से हो गई थी। उसहैत के गांव चेतननगला में एक किसान की दो भैंसों की मौत गड्ढे में उतरे करंट से हो गई थी। 14 अक्तूबर को सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के मोहल्ला जवाहरपुरी निवासी मोतीलाल अपना घोड़ा बुग्गी लेकर अलापुर रोड पर उपले लेने जा रहे थे। जलभराव से गुजरने के दौरान एक पोल में करंट की चपेट में आने से उनका घोड़ा मर गया जबकि मोतीलाल झुलस गए। इसके अलावा कई जानवरों की करंट लगने से मौत हो चुकी है। अंडरग्राउंड केबल से तो जानवरों की मौतों का तो आंकड़ा ही नहीं है।
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ये है मुआवजे का प्रावधान
पावर कॉरपोरेशन की लापरवाही से हुई मौत के मामले में पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान है लेकिन इसके लिए प्रक्रिया इतनी लंबी है कि पीड़ित की सांसे फूल जाती हैं। दरअसल हादसा होने के बाद विभाग द्वारा इसको सुरक्षा निदेशालय के पोर्टल पर ऑनलाइन जानकारी डालनी होती है। इसके बाद निदेशालय की टीम इस बात की जांच करती है कि हादसा विभाग की लापरवाही से ही हुआ है या नहीं। इसके बाद टीम अपनी रिपोर्ट एसई को देती है। इसके बाद बात आगे बढ़ती है। इसमें भी पीड़ित को पोस्टमार्टम रिपाेर्ट, वारिसान समेत एकाउंट डिटेल आदि जानकारी देनी होती है। अधिकांश मामलों में यह प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाती। खास बात ये कि अधिकारियों तक को इस बात का पता नहीं है कि अब तक किस मामले में किसको कितना मुआवजा दिया गया है। पावर कॉरपोरेशन के एसई अखिलेश कुमार के अनुसार, उन्होंने एक सप्ताह पहले ही कार्यभार संभाला है। किसको कितना मुआवजा मिला, अभी इसकी जानकारी नहीं है। बिसौली में हुए हादसे के पीड़ित परिवार को सहायता मिल सके, इसके लिए रिपोर्ट बनवाई जा रही है।
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आज तक मिला है सिर्फ झूठा आश्वासन
ऐसी घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। कई बार ऐसे हादसे हो चुके हैं पर हर बार अधिकारी झूठा आश्वासन देकर अपना काम निकाल ले जाते हैं। लेकिन इस बार जब तक लाइन की शिफ्टिंग नहीं होगी, लाइन चालू नहीं करने दी जाएगी।
- अमजद अब्बासी
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नगर में जहां जहां हाईटेंशन लाइन हैं वहां आए दिन कोई न कोई हादसा होता रहता है। इसकी शिकायतें भी होती हैं लेकिन फिर भी कोई समाधान नहीं निकलता। अधिकारी खामोश बैठे हैं।
- अबरार
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एक के बाद होते जा रहे हादसे, जिम्मेदार साधे बैठे मौन, प्रशासन भी खामोश
सौरभ सक्सेना
बदायूं। एक के बाद एक हादसे हो रहे हैं, हर बार विभाग की लापरवाही और अनदेखी सामने आ रही है लेकिन कार्रवाई और मुआवजे के नाम पर कुछ नहीं हो रहा। हादसे में जिसका करीबी जाता है, उसके घर में चीखपुकार मचती है, मामला ठंडा करने के लिए कुछ विभागीय लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई जाती है, फिर कुछ दिन बाद सब शांत हो जाता है। ऐसा एक बार नहीं, कई बार हुआ है लेकिन आज तक बात इससे आगे नहीं बढ़ी। अधिकारियों को तो यह तक नहीं पता कि किस घटना में किसे और कितना मुआवजा दिया गया।
बिसौली में जहां हादसा हुआ, वह कस्बे की प्रमुख लाइन है जो इस कॉलोनी से होकर जा रही है। यहां हाईटेंशन लाइन टूटने से तीन मौतों का मामला कोई पहला नहीं है, इससे पहले भी जिले में कहीं हाईटेंशन लाइन का तार टूटने से तो कहीं टूटे पड़े तार पर पैर रखने से कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं लेकिन विभागीय अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
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सैदपुर में मुरादाबाद- फर्रुखाबाद हाईवे के पास करीब सात माह पूर्व शादी का टेंट लगा रहे तीन लोग हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गए थे, जिसमें वजीरगंज निवासी मजदूर शान मोहम्मद की मृत्यु हो गई थी। मोहल्ला गिरधरपुर में नल उखाड़ने पर घर के ऊपर से जा रही हाईटेंशन लाइन के छूने से मिस्त्री समय समेत दो लोग घायल हुए। मिस्त्री गोपा मौर्य का हाथ हमेशा के लिए खराब हो गया।
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ऐसा ही हादसा उरैना में हुआ था, जिसमें तीन लोग हाईटेंशन लाइन छूने से घायल हो गए। पता चला था कि इन घरों के ऊपर से हाईटेंशन की लाइन जा रही है जो कई बार शिकायत करने और हादसा होने के बाद भी हटाई नहीं गई। इसी तरह दबतोरी क्षेत्र के ग्राम लक्ष्मीपुर में करीब डेढ़ वर्ष पहले एक युवक की मौत हो गई थी। उसके घर के ऊपर से लाइन इतनी लटक रही थी कि उसका हाथ उससे छू गया था। (संवाद)
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ये भी हुए हादसे
19 जुलाई- 23 - सहसवान के गांव इब्राहिमपुर गढ़ी निवासी रामपाल घर के बाहर टहल रहा था। ऊपर से गुजर रही लाइन का तार उनके ऊपर टूटकर गिर गया और उसकी मौत हो गई।
15 जुलाई-23- मुजरिया क्षेत्र के गांव मूसेपुर में हाईटेंशन लाइन टूटने से आठ वर्षीय शिवानी की मौत हो गई जबकि कई लोग बाल-बाल बच गए।
27 जून- 23- सहसवान में पशुओं को चारा लेने जा रहे गांव रसूलपुर कला निवासी किसान सियाराम (60) की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर मौत हो गई।
तीन नवंबर-22- उझानी के गांव पतौरा निवासी वीरेंद्र का 18 साल का पुत्र सुधीश साइकिल से खेत जाने को निकला था। रास्ते में टूटे पड़े तार की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई।
21 अगस्त- 22 ककराला-अलापुर मार्ग पर रविवार दोपहर 11 हजार वोल्ट का हाईटेंशन तार टूटकर गिर जाने से बाइक सवार किसान कैसर अली (55) और साकिर अली (58) की मौत हो गई थी। दोनों बाइक से अमरूद के बाग में पानी लगाने जा रहे थे।
आठ अगस्त- 22- उसावां थाना क्षेत्र के गांव मरौरी में किसान श्याम पाल की करंट लगने से मौत हो गई थी। वह खेत पर ट्यूबवेल चलाने गए थे।
27 मई- 22- ककराला के वार्ड तीन निवासी रामनिवास शर्मा की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। कस्बे के बाहर तार टूटा पड़ा था जिस पर उनका पैर पड़ गया था।
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इन पर हुई एफआईआर
- बिसौली में हुए हादसे के बाद एक्सईएन, एई, जेई समेत एसएसओ पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इससे पहले मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव मूसेपुर में बच्ची की मौत के मामले में अवर अभियंता और लाइनमैन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। पिछले साल ककराला-अलापुर मार्ग पर हाईटेंशन तार टूटकर गिर जाने से दो बाइक सवार किसानों की मौत के मामले में 10 बिजली कर्मियों पर रिपोर्ट हुई थी। इससे पहले 14 अक्तूबर को मंडी समिति रोड पर पोल पर करंट आने से घोड़े की मौत और उसके मालिक के झुलसने के मामले में एक्सईएन पर मामला दर्ज किया गया था लेकिन आज तक बात एफआईआर से आगे नहीं बढ़ी। दरअसल, एफआईआर दर्ज हाेने के बाद मामला पुलिस के पास चला जाता है और वहां ले देकर दोषी अधिकारी और कर्मचारी बच निकलते हैं। कई बार पदनाम से की गई एफआईआर का लाभ भी ट्रांसफर होने के बाद अधिकारियों को मिल जाता है।
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पशुओं की मौत का तो आंकड़ा ही नहीं
हाईटेंशन लाइन का तार गिरने से जहां तमाम लोगों की जान जा चुकी हैं, वहीं पशुओं की तो मौत का आंकड़ा ही नहीं है। विगत 12 जुलाई को सहसवान के मोहल्ला कटरा में हाईटेंशन लाइन का तार गिरने से एक भैंस व पढि़या की मौत हो गई। पिछले साल अलापुर थाना क्षेत्र के गांव जगत में दो गायों समेत चार मवेशियाें की मौत लाइन टूटने से हो गई थी। उसहैत के गांव चेतननगला में एक किसान की दो भैंसों की मौत गड्ढे में उतरे करंट से हो गई थी। 14 अक्तूबर को सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के मोहल्ला जवाहरपुरी निवासी मोतीलाल अपना घोड़ा बुग्गी लेकर अलापुर रोड पर उपले लेने जा रहे थे। जलभराव से गुजरने के दौरान एक पोल में करंट की चपेट में आने से उनका घोड़ा मर गया जबकि मोतीलाल झुलस गए। इसके अलावा कई जानवरों की करंट लगने से मौत हो चुकी है। अंडरग्राउंड केबल से तो जानवरों की मौतों का तो आंकड़ा ही नहीं है।
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ये है मुआवजे का प्रावधान
पावर कॉरपोरेशन की लापरवाही से हुई मौत के मामले में पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान है लेकिन इसके लिए प्रक्रिया इतनी लंबी है कि पीड़ित की सांसे फूल जाती हैं। दरअसल हादसा होने के बाद विभाग द्वारा इसको सुरक्षा निदेशालय के पोर्टल पर ऑनलाइन जानकारी डालनी होती है। इसके बाद निदेशालय की टीम इस बात की जांच करती है कि हादसा विभाग की लापरवाही से ही हुआ है या नहीं। इसके बाद टीम अपनी रिपोर्ट एसई को देती है। इसके बाद बात आगे बढ़ती है। इसमें भी पीड़ित को पोस्टमार्टम रिपाेर्ट, वारिसान समेत एकाउंट डिटेल आदि जानकारी देनी होती है। अधिकांश मामलों में यह प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाती। खास बात ये कि अधिकारियों तक को इस बात का पता नहीं है कि अब तक किस मामले में किसको कितना मुआवजा दिया गया है। पावर कॉरपोरेशन के एसई अखिलेश कुमार के अनुसार, उन्होंने एक सप्ताह पहले ही कार्यभार संभाला है। किसको कितना मुआवजा मिला, अभी इसकी जानकारी नहीं है। बिसौली में हुए हादसे के पीड़ित परिवार को सहायता मिल सके, इसके लिए रिपोर्ट बनवाई जा रही है।
आज तक मिला है सिर्फ झूठा आश्वासन
ऐसी घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। कई बार ऐसे हादसे हो चुके हैं पर हर बार अधिकारी झूठा आश्वासन देकर अपना काम निकाल ले जाते हैं। लेकिन इस बार जब तक लाइन की शिफ्टिंग नहीं होगी, लाइन चालू नहीं करने दी जाएगी।
- अमजद अब्बासी
नगर में जहां जहां हाईटेंशन लाइन हैं वहां आए दिन कोई न कोई हादसा होता रहता है। इसकी शिकायतें भी होती हैं लेकिन फिर भी कोई समाधान नहीं निकलता। अधिकारी खामोश बैठे हैं।
- अबरार

पीडीएफ।

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