{"_id":"602d6a598ebc3ee95f32333d","slug":"kasganj-kand-badaun-news-bly437621142","type":"story","status":"publish","title_hn":"कादरचौक के मुस्कारा में तीन दिन रुका था कासगंज के सिपाही का हत्यारा मोती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कादरचौक के मुस्कारा में तीन दिन रुका था कासगंज के सिपाही का हत्यारा मोती
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बदायूं/ कादरचौक। कासगंज जिले के धीमर नगला में पुलिस टीम पर हमला कर सिपाही की हत्या करने के बाद एक लाख का इनामी मोती कादरचौक इलाके में तीन दिन ठहरा था। यहां गांव मुस्कारा में उसकी ननिहाल है। सर्विलांस लोकेशन के आधार पर उसे तलाशती आई कासगंज पुलिस को फिलहाल निराशा हाथ लगी है।
नौ फरवरी की रात कासगंज जिले के सिढ़पुरा थाना क्षेत्र के गांव धीमर नगला में एसआई अशोक कुमार ने शराब माफिया मोती की तलाश में दबिश दी थी। मोती ने अपने साथियों के साथ पुलिस पर हमला कर दिया और सिपाही देवेंद्र सिंह की हत्या कर दी, जबकि अशोक कुमार घायल हो गए थे। दूसरे दिन मोती का सगा भाई अहलकार मुठभेड़ में मारा गया था, लेकिन मुख्य हत्यारोपी मोती का कुछ पता नहीं चला। इस दौरान कासगंज के अलावा आसपास के जिलों में भी पुलिस को अलर्ट कर दिया गया था।
पंद्रह फरवरी को कासगंज एसओजी टीम को मोती की लोकेशन कादरचौक थाना क्षेत्र के गांव मुस्कारा के पास मिली थी। इससे एसओजी ने करीब 40 पुलिसकर्मियों के साथ इलाके में डेरा डाल दिया। सभी पुलिस कर्मी ग्रामीण बनकर इलाके में सर्च अभियान चलाते रहे। मंगलवार रात मोती ने भी अपना मोबाइल बंद कर लिया। इससे तलाशी अभियान रुक गया है। अभी पुलिस इलाके में उसे तलाश कर रही है। बताते हैं कि मोती का ममेरा भाई गुड्डू उसे खाना पहुंचाता था। मंगलवार रात वह मानकपुर नगरिया के जंगल में पकड़ा गया। उसकी निशानदेही पर उसका मौसा रामेश्वर पकड़ा गया। उनसे काफी पूछताछ की गई, लेकिन उन्होंने मोती का पता नहीं बताया।
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कादरचौक इलाके का मुस्कारा गांव के आसपास कीकड़ का बड़ा जंगल है। इससे सिपाही के हत्यारोपी को छुपने में मदद मिली। उसकी लोकेशन पड़ोसी गांव धौरेरा और पचौरी नगला के जंगल में भी मिली थी। उसके आसपास भी कीकड़ का जंगल है। वहीं मोती रहता था। मंगलवार रात से उसकी लोकेशन पता नहीं चल रही है। उधर, कादरचौक के कच्चे रास्ते से कछला सहसवान होते हुए बसें निकलती हैं। करीब तीन दिन तक पुलिस ने इन रोडवेज बसों में तलाशी ली। इनके अलावा प्राइवेट वाहन भी तलाशे गए।
अक्सर ननिहाल आता था मोती
-मोती की ननिहाल मुस्कारा गांव में है। वह अक्सर ननिहाल आता था और कई दिन रुककर जाता था। इससे वह इलाके से पूरी तरह वाफिक था। उसे गांव के लोग भी अच्छी तरह से जानते हैं। बताते हैं कि वह पिछले तीन दिन से अकेला यहां नहीं रह रहा था। उसके साथ उसके दो भाई भी बताए जा रहे हैं।
पुलिस से मजबूत है मोती का सूचना तंत्र
-कासगंज जिले में सिपाही के हत्यारोपी की तलाश में पुलिस सूचना तंत्र का उपयोग कर रही है। उससे कहीं ज्यादा हत्यारोपी का सूचना तंत्र मजबूत है। बताते हैं कि पुलिस उसकी तलाश में लगी थी और मोती पुलिस की लोकेशन पर चल रहा था। चर्चा है कि गांव के बच्चे तक उसे पुलिस की लोकेशन बता रहे थे। इससे वह पुलिस के हाथ नहीं आया।
-कासगंज जिले में सिपाही का हत्यारोपी कादरचौक इलाके में आया था, इसकी मेरे पास सूचना नहीं है। अगर आया होता तो जरूर पकड़ा जाता। हम स्वयं उसे तलाश कराते या फिर थाना पुलिस को कासगंज पुलिस ने सूचना नहीं दी होगी। वह स्वयं तलाश कर रहे होंगे। - संजय कुमार रेड्डी, सीओ उझानी
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नौ फरवरी की रात कासगंज जिले के सिढ़पुरा थाना क्षेत्र के गांव धीमर नगला में एसआई अशोक कुमार ने शराब माफिया मोती की तलाश में दबिश दी थी। मोती ने अपने साथियों के साथ पुलिस पर हमला कर दिया और सिपाही देवेंद्र सिंह की हत्या कर दी, जबकि अशोक कुमार घायल हो गए थे। दूसरे दिन मोती का सगा भाई अहलकार मुठभेड़ में मारा गया था, लेकिन मुख्य हत्यारोपी मोती का कुछ पता नहीं चला। इस दौरान कासगंज के अलावा आसपास के जिलों में भी पुलिस को अलर्ट कर दिया गया था।
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पंद्रह फरवरी को कासगंज एसओजी टीम को मोती की लोकेशन कादरचौक थाना क्षेत्र के गांव मुस्कारा के पास मिली थी। इससे एसओजी ने करीब 40 पुलिसकर्मियों के साथ इलाके में डेरा डाल दिया। सभी पुलिस कर्मी ग्रामीण बनकर इलाके में सर्च अभियान चलाते रहे। मंगलवार रात मोती ने भी अपना मोबाइल बंद कर लिया। इससे तलाशी अभियान रुक गया है। अभी पुलिस इलाके में उसे तलाश कर रही है। बताते हैं कि मोती का ममेरा भाई गुड्डू उसे खाना पहुंचाता था। मंगलवार रात वह मानकपुर नगरिया के जंगल में पकड़ा गया। उसकी निशानदेही पर उसका मौसा रामेश्वर पकड़ा गया। उनसे काफी पूछताछ की गई, लेकिन उन्होंने मोती का पता नहीं बताया।
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कादरचौक इलाके का मुस्कारा गांव के आसपास कीकड़ का बड़ा जंगल है। इससे सिपाही के हत्यारोपी को छुपने में मदद मिली। उसकी लोकेशन पड़ोसी गांव धौरेरा और पचौरी नगला के जंगल में भी मिली थी। उसके आसपास भी कीकड़ का जंगल है। वहीं मोती रहता था। मंगलवार रात से उसकी लोकेशन पता नहीं चल रही है। उधर, कादरचौक के कच्चे रास्ते से कछला सहसवान होते हुए बसें निकलती हैं। करीब तीन दिन तक पुलिस ने इन रोडवेज बसों में तलाशी ली। इनके अलावा प्राइवेट वाहन भी तलाशे गए।
अक्सर ननिहाल आता था मोती
-मोती की ननिहाल मुस्कारा गांव में है। वह अक्सर ननिहाल आता था और कई दिन रुककर जाता था। इससे वह इलाके से पूरी तरह वाफिक था। उसे गांव के लोग भी अच्छी तरह से जानते हैं। बताते हैं कि वह पिछले तीन दिन से अकेला यहां नहीं रह रहा था। उसके साथ उसके दो भाई भी बताए जा रहे हैं।
पुलिस से मजबूत है मोती का सूचना तंत्र
-कासगंज जिले में सिपाही के हत्यारोपी की तलाश में पुलिस सूचना तंत्र का उपयोग कर रही है। उससे कहीं ज्यादा हत्यारोपी का सूचना तंत्र मजबूत है। बताते हैं कि पुलिस उसकी तलाश में लगी थी और मोती पुलिस की लोकेशन पर चल रहा था। चर्चा है कि गांव के बच्चे तक उसे पुलिस की लोकेशन बता रहे थे। इससे वह पुलिस के हाथ नहीं आया।
-कासगंज जिले में सिपाही का हत्यारोपी कादरचौक इलाके में आया था, इसकी मेरे पास सूचना नहीं है। अगर आया होता तो जरूर पकड़ा जाता। हम स्वयं उसे तलाश कराते या फिर थाना पुलिस को कासगंज पुलिस ने सूचना नहीं दी होगी। वह स्वयं तलाश कर रहे होंगे। - संजय कुमार रेड्डी, सीओ उझानी