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ककोड़ा मेला : प्रशासन और तकनीकी टीम ने किया मेला स्थल का निरीक्षण
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मेला ककोड़ा स्थल का निरीक्षण करते अधिकारी। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। रुहेलखंड के मिनी कुंभ के नाम से प्रसिद्ध मेला ककोड़ा के आयोजन को लेकर जिला पंचायत ने अनौपचारिक रूप से मेले के आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। मंगलवार को तकनीकी के साथ प्रशासन की टीम ने भी मेला स्थल का निरीक्षण किया। यह टीम अब अपनी रिपोर्ट डीएम को देगी। इसके बाद प्रशासन की ओर से मिलने वाले दिशा निर्देश के अनुसार जिला पंचायत मेला आयोजित करेगा।
ऐतिहासिक मेला ककोड़ा का आयोजन कार्तिक माह में ककोड़ा गंगा तट पर होता है। पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण मेला आयोजन नहीं हो सका था। कार्तिक माह में गंगा तट पर कल्पवास का विशेष महत्व है। इस वर्ष भी मेला आयोजन के लिए शासन ने देर से अनुमति दी है। साथ ही इस बार बेमौसम बारिश के कारण गंगा भी उफान पर है। शासन स्तर से मेला ककोड़ा के आयोजन की अनुमति मिलने के बाद मंगलवार को एसपी सिटी प्रवीन चौहान, सीएमओ डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, बाढ़ खंड अभियंका संधु सिंह, जिला पंचायत अभियंता मासूम अली आदि अधिकारियों ने मेलास्थल पहुंचकर जायजा लिया। जिला पंचायत ने दो दिन पहले शासन से मेला आयोजन की अनुमति मिलने के बाद से ही अनौपचारिक रूप से तैयारियां शुरू कर दी थीं।
हालांकि, मेला आयोजन का क्या स्वरूप होगा यह जिला प्रशासन को तय करना है। कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान 19 नवंबर को है।
मंगलवार को मेला स्थल पहुंचकर प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और तकनीकी टीम ने तटवर्ती इलाकों को देखा। इन दिनों मेला स्थल पर पानी भरा हुआ है। इसके साथ ही गंगा का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। जिन स्थानों पर स्नान के लिए घाट बनाए जाने हैं वहां भी कटान हो रहा है। हालांकि, मेला आयोजन में अभी समय बाकी है। ऐसे में गंगा तट पर हालात सुधरने की पूरी उम्मीद है। इधर, जिला पंचायत के अभियंता मासूम अली का कहना है कि मेला स्थल पर व्यवस्थाओं में भी समय लगेगा। प्रशासन की ओर से जो भी निर्देश मिलने हैं उसके अनुसार काम किया जाएगा।
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प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के साथ जिला पंचायत और बाढ़ खंड की तकनीकी टीम ने मेला स्थल का निरीक्षण किया है। अभी गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है। कुछ स्थानों पर कटान हो रहा है। मेला स्थल की संभावित जगह पर बाढ़ का पानी भी भरा है। प्रशासन की ओर से जो भी निर्देश होंगे, उनके अनुसार मेले का आयोजन किया जाएगा।
-सत्यपाल, एएमए जिला पंचायत
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ऐतिहासिक मेला ककोड़ा का आयोजन कार्तिक माह में ककोड़ा गंगा तट पर होता है। पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण मेला आयोजन नहीं हो सका था। कार्तिक माह में गंगा तट पर कल्पवास का विशेष महत्व है। इस वर्ष भी मेला आयोजन के लिए शासन ने देर से अनुमति दी है। साथ ही इस बार बेमौसम बारिश के कारण गंगा भी उफान पर है। शासन स्तर से मेला ककोड़ा के आयोजन की अनुमति मिलने के बाद मंगलवार को एसपी सिटी प्रवीन चौहान, सीएमओ डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, बाढ़ खंड अभियंका संधु सिंह, जिला पंचायत अभियंता मासूम अली आदि अधिकारियों ने मेलास्थल पहुंचकर जायजा लिया। जिला पंचायत ने दो दिन पहले शासन से मेला आयोजन की अनुमति मिलने के बाद से ही अनौपचारिक रूप से तैयारियां शुरू कर दी थीं।
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हालांकि, मेला आयोजन का क्या स्वरूप होगा यह जिला प्रशासन को तय करना है। कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान 19 नवंबर को है।
मंगलवार को मेला स्थल पहुंचकर प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और तकनीकी टीम ने तटवर्ती इलाकों को देखा। इन दिनों मेला स्थल पर पानी भरा हुआ है। इसके साथ ही गंगा का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। जिन स्थानों पर स्नान के लिए घाट बनाए जाने हैं वहां भी कटान हो रहा है। हालांकि, मेला आयोजन में अभी समय बाकी है। ऐसे में गंगा तट पर हालात सुधरने की पूरी उम्मीद है। इधर, जिला पंचायत के अभियंता मासूम अली का कहना है कि मेला स्थल पर व्यवस्थाओं में भी समय लगेगा। प्रशासन की ओर से जो भी निर्देश मिलने हैं उसके अनुसार काम किया जाएगा।
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प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के साथ जिला पंचायत और बाढ़ खंड की तकनीकी टीम ने मेला स्थल का निरीक्षण किया है। अभी गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है। कुछ स्थानों पर कटान हो रहा है। मेला स्थल की संभावित जगह पर बाढ़ का पानी भी भरा है। प्रशासन की ओर से जो भी निर्देश होंगे, उनके अनुसार मेले का आयोजन किया जाएगा।
-सत्यपाल, एएमए जिला पंचायत