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मिनी कुंभ: ग्रामीणों ने अस्थाई सड़क निर्माण का काम रुकवाया
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मेला ककोड़ा के लिए बनाई जा रही अस्थाई सड़क का काम रुकवाते ग्रामीण। संवाद
- फोटो : BADAUN
कादरचौक। रुहेलखंड के मिनी कुंभ ककोड़ा मेला तक जाने के लिए रविवार को जिला पंचायत ने अस्थायी सड़क का निर्माण शुरू कराया, लेकिन ग्रामीणों ने विरोध करते हुए काम रुकवा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उनके खेतों में फसल खड़ी हैं। वहां से अस्थायी सड़क निकाली जाती है तो फसलों को नुकसान होगा। लिहाजा उन्हें पहले मुआवजा दिया जाए, उसके बाद ही वह काम होने देंगे।
ककोड़ा मेला का आयोजन बदायूं और कासगंज के बीच गंगा तट पर सात से 15 नवंबर के बीच होना है। गंगा तट पर मेला करीब ढाई किमी क्षेत्र में फैला होगा। मेला का पश्चिमी हिस्सा बदायूं और पूर्वी कासगंज जनपद में होगा, लेकिन मेला में सभी व्यवस्थाएं बदायूं जिला पंचायत के जिम्मे होती हैं। शनिवार को जिला पंचायत की टीम ने गंगा तट पर भूमि चिह्नित की थी। मेलास्थल तक जाने के लिए सबसे पहले अस्थायी सड़क बनाई जानी है। रविवार से सड़क बनाने का काम शुरू हुआ, तो गांव ओमनगरिया के किसानों ने विरोध शुरू कर दिया।
काफी संख्या में ग्रामीण लाठियां लेकर मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना है कि अस्थायी सड़क के लिए चिह्नित की गई जमीन पर उनकी फसल खड़ी हैं। सड़क बनाने से फसल बर्बाद हो जाएगी। जिला पंचायत के जेई लालता प्रसाद कश्यप ने बताया कि ग्रामीणों को समझाया जा रहा है। समय से काम पूरा करा लिया जाएगा।
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व्यवस्थाएं पूरी करने को नहीं बचा है ज्यादा समय
मेला काफी विशाल होता है। एक महीने पहले ही मेला स्थल पर व्यवस्थाएं शुरू कर दी जाती हैं। मेला का आयोजन सात नवंबर से शुरू होना है। ऐसे में अस्थायी सड़कें बनाने समेत अन्य व्यवस्थाएं पूरा करने के लिए जिला पंचायत के पास 22 दिन ही बचे हैं। अगर मेला स्थल पर व्यवस्थाएं जल्द शुरू नहीं हो सकीं तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन मुख्य स्नान पर गंगास्नान को आने वाले श्रद्धालुओं को यहां अव्यवस्थाओं का सामना करना होगा। गंगा तट पर कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी होगी।
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ककोड़ा मेला का आयोजन बदायूं और कासगंज के बीच गंगा तट पर सात से 15 नवंबर के बीच होना है। गंगा तट पर मेला करीब ढाई किमी क्षेत्र में फैला होगा। मेला का पश्चिमी हिस्सा बदायूं और पूर्वी कासगंज जनपद में होगा, लेकिन मेला में सभी व्यवस्थाएं बदायूं जिला पंचायत के जिम्मे होती हैं। शनिवार को जिला पंचायत की टीम ने गंगा तट पर भूमि चिह्नित की थी। मेलास्थल तक जाने के लिए सबसे पहले अस्थायी सड़क बनाई जानी है। रविवार से सड़क बनाने का काम शुरू हुआ, तो गांव ओमनगरिया के किसानों ने विरोध शुरू कर दिया।
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काफी संख्या में ग्रामीण लाठियां लेकर मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना है कि अस्थायी सड़क के लिए चिह्नित की गई जमीन पर उनकी फसल खड़ी हैं। सड़क बनाने से फसल बर्बाद हो जाएगी। जिला पंचायत के जेई लालता प्रसाद कश्यप ने बताया कि ग्रामीणों को समझाया जा रहा है। समय से काम पूरा करा लिया जाएगा।
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व्यवस्थाएं पूरी करने को नहीं बचा है ज्यादा समय
मेला काफी विशाल होता है। एक महीने पहले ही मेला स्थल पर व्यवस्थाएं शुरू कर दी जाती हैं। मेला का आयोजन सात नवंबर से शुरू होना है। ऐसे में अस्थायी सड़कें बनाने समेत अन्य व्यवस्थाएं पूरा करने के लिए जिला पंचायत के पास 22 दिन ही बचे हैं। अगर मेला स्थल पर व्यवस्थाएं जल्द शुरू नहीं हो सकीं तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन मुख्य स्नान पर गंगास्नान को आने वाले श्रद्धालुओं को यहां अव्यवस्थाओं का सामना करना होगा। गंगा तट पर कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी होगी।