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इस्लामगर नगर पंचायत : एक बार फिर पत्नियों, पुत्रवधुओं के सहारे वर्चस्व कायम रखने की होड़

Fri, 14 Apr 2023 01:07 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 14 Apr 2023 01:07 AM IST
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Islamgar Nagar Panchayat: Once again the competition to maintain supremacy with the help of wives, daughters-in-law
इस्लामगर नगर पंचायत : एक बार फिर पत्नियों, पुत्रवधुओं के सहारे वर्चस्व कायम रखने की होड़
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अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। इस्लामनगर नगर पंचायत का अध्यक्ष पद इस बार भी महिला के लिए आरक्षित है। लिहाजा नगर के कद्दावर नेता फिर से अपनी पत्नियों या पुत्रवधुओं के सहारे वर्चस्व कायम रखने की जुगत में हैं। अभी कुछ ही प्रत्याशियों के नाम सामने आए हैं। हालांकि सपा ने चेयरमैन रहे स्वर्गीय वाहिद खान के परिवार से किसी महिला को चुनाव मैदान में उतारने की मंशा जाहिर कर दी है। बसपा से निवर्तमान चेयरमैन निशात मुशाहिद का लड़ना भी तय है, लेकिन भाजपा से खुलकर कोई नाम सामने नहीं आया है।
जिले की 120 साल पुरानी इस नगर पंचायत के अध्यक्ष पद का चुनाव कई दशक से हिंदू-मुस्लिम आधार पर ही लड़ा जाता रहा है। पिछले चुनाव में भाजपा ने यहां से अपना प्रत्याशी ही चुनाव मैदान में नहीं उतारा था। उस वक्त भी महिला के लिए आरक्षित होने के बावजूद पुराने सियासतदान ने अपना वर्चस्व बनाए रखने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। इस बार भी नगर पंचायत का ताज किसी महिला के सिर ही सजना है। भाजपा से टिकट पाने के लिए यूं तो पार्टी से सीधे तौर पर जुड़ीं एक-दो महिला ही हैं, लेकिन पतियों और ससुर की राजनीतिक जमीन पर अपनी जीत की इमारत तामीर करने के लिए कई सामने आ रही हैं।
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वर्ष 2017 के चुनाव परिणाम की बात करें तो बसपा प्रत्याशी निशात मुशाहिद 5428 वोट पाकर विजयी रही थीं। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी भावना गुप्ता को 1294 मतों के अंतर से हराया था। भावना को 4134 मत मिले थे। सपा प्रत्याशी जाहिदा बेगम को 3763 मत मिले थे। निशात मुशाहिद पूर्व विधायक मुशर्रत अली उर्फ हाजी बिट्टन के भाई की पत्नी हैं, जबकि भावना पूर्व चेयरमैन वीरेंद्र गुप्ता उर्फ लीडर की पुत्रवधू और जाहिदा बेगम पूर्व चेयरमैन स्वर्गीय वाहिद खां की बहन हैं।
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तमगा 120 साल पुरानी नगर पंचायत का... सहूलियतें-सुविधाएं कुछ भी नहीं
इस्लामनगर में तमाम मुद्दे ऐसे हैं जो यहां की जनता के लिए दुखती नस बने हुए हैं। यहां की नगर पंचायत को भले ही 120 साल पुरानी होने का तमगा हासिल हो, लेकिन सहूलियतें और सुविधाएं कुछ खास नहीं हैं। पिछले वर्षों में यहां के लोगों से चिकित्सा सुविधा तक छिन गई। यहां स्थित 100 साल पुरानी पीएचसी को रुदायन भेज दिया गया।
दूसरी सबसे बड़ी समस्या यहां बस स्टैंड का न होना है। बदायूं , बरेली, दिल्ली के लिए यहां से तमाम रोडवेज और प्राइवेट बसें जाती हैं, लेकिन न तो यहां रोडवेज बस स्टैंड है और न प्राइवेट बस अड्डा। इस्लामनगर से बिसौली, बिल्सी ,बदायूं, सहसवान और बहजोई जाने वाली निजी बसों की मुख्य मार्गों पर लंबी कतारें लगी रहती हैं। नगर क्षेत्र में कोई पार्क भी नहीं है, जहां हरियाली के बीच बच्चे कुछ देर खेलकर अपना मन बहला सकें। सड़कों पर इस कदर अतिक्रमण है कि चार पहिया वाहनों का मुख्य बाजार तक पहुंचना ही मुश्किल हो जाता है।
संभल में शामिल करने के लिए किया था अनशन
पड़ोसी जनपद संभल का मुख्यालय बहजोई में बन जाने पर बीते दिनों यहां के लोगों ने 100 दिन अनशन करके इस्लामनगर को संभल में शामिल करने की मांग की थी। जनसमस्याओं के प्रति अनदेखी, अपेक्षित विकास न हो पाने और यहां से जिला मुख्यालय 60 किलोमीटर दूर होने से यहां के लोग संभल से जुड़ना चाहते हैं। इतना ही नहीं सरकारी इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, टेक्निकल कॉलेज के साथ ही उन्नत बाजार का भी अभाव है।
बूढ़ी नगर पंचायत को आस... नगर परिषद के रूप में मिले नया जन्म
एक सौ बीस साल की बुढि़या हो चुकी यहां की नगर पंचायत को अब नगर पालिका परिषद के रूप में नए जन्म की आस है, लेकिन यह भी पूरी होती नहीं दिख रही है। यह नगर पंचायत अब तक 13 चेयरमैनों का कार्यकाल देख चुकी हैं। इनमें दो महिलाएं भी शामिल रही हैं। 29 साल यह सुपर सीट रही। यहां के लोग भी कहते हैं कि अब जो भी चेयरमैन होगा, उससे यही उम्मीद रहेगी कि वह इस बूढ़ी नगर पंचायत को जवान नगर पालिका परिषद बनवाए, ताकि यहां के विकास को नई गित मिल सके।

अब तक रहे चैयरमैन नाम कार्यकाल ठा. हेत सिंह 1903 से 1913 ठा. भोला सिंह 1913 से 1922 ठा. जमुना सिंह 1922 से 1925
सुपर सीट 1925 से 1937
पं. छत्रपाल मिश्र 1937 से 1942
लाला राजेंद्र प्रसाद 1942 से 1947
कृष्णस्वरूप 1947 से 1952
पं. वेदप्रकाश 1952 से 1957
सुपर सीट 1957 से 1962
राजेंद्र प्रसाद 1962 से 1972
अब्दुल जब्बार 1972 से 1977
इदरीश वेग 1977 (छह माह, कार्यवाहक)
सुपर सीट 1977 से 1989
लाला राजेंद्र प्रसाद 1989 से 1995 रिजवाना फजल 1995 से 2000
वाहिद खान 2000 से 2011
वीरेंद्र गुप्ता (लीडर) 2011 से 2017 निशात मुशाहिद 2017 से 2022
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