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शीतलहर से दिल और दमा के रोगियों की बढ़ रही मुश्किल

Wed, 22 Dec 2021 01:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 22 Dec 2021 01:33 AM IST
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Increasing difficulty of heart and asthma patients in cold wave
जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी लाइन। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। सर्दी में इजाफा होने के साथ ही हृदय रोगियों और अस्थमा के रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल की ओपीडी के साथ निजी अस्पतालों में भी रोगियों की लाइन लग रही है। ऐसे में जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट और चेस्ट रोग विशेषज्ञ न होने से रोगियों को परेशानी हो रही है। मंगलवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में एक हजार से ज्यादा रोगी पहुंचे। गौर करने की बात यह है कि रोगियों में सांस और अस्थमा संबंधी रोगियों की संख्या आधे से ज्यादा थी।
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हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद कुमार गुप्ता का कहना है कि सर्दी के सीजन में अस्थमा और हृदय की बीमारी से बचने के लिए लोगों को एहतियात बरतनी चाहिए। हृदय रोग की समस्या अब व्यापक हो रही है। जीवन शैली बदलने के कारण युवाओं को भी हृदय रोग संबंधी समस्याएं घेर रहीं हैं। गौर करने की बात यह है कि 40 वर्ष से कम आयु के युवाओं को भी हृदय रोग घेर रहा है। खासकर बुजुर्गों को सर्दियों में हार्ट अटैक की आशंका ज्यादा बढ़ जाती है। उन्हें ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। सुबह सर्दी ज्यादा होने पर गर्म कपड़े पहनकर ही खुले में निकलें।
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प्रतिदिन व्यायाम करें और धूप निकलने पर टहलें जरूर। उन्होंने कहा कि एक बड़ी समस्या धुम्रपान भी है। बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू का इस्तेमाल हृदय रोग के साथ सांस संबंधी रोगों को भी बढ़ावा दे रहा है।
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वायु प्रदूषण से बढ़ रही सांस, अस्थमा की समस्या
सांस और अस्थमा संबंधी रोगियों की संख्या में इजाफा होने का सबसे बड़ा कारण वायु प्रदूषण है। सर्दियों के सीजन में वायु की गुणवत्ता ज्यादा खराब हो जाती है। आमतौर पर खांसी-जुकाम होने पर यह दवा लेने के बाद यह तीन से चार दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन इन दिनों स्थिति बदली हुई है। जिला अस्पताल के डॉ. अलंकार सिंह का कहना है कि सर्दी-जुकाम, खांसी ठीक होने पर इन दिनों एक से दो सप्ताह तक का समय लग रहा है। सर्दियों के सीजन में सांस संबंधी समस्या वाले रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। इन दिनों गर्म पानी के सेवन के साथ पूरे शरीर को गर्म कपड़ों से ढक कर रखना चाहिए।
डायबिटीज और ब्लड प्रेशर पर नजर जरूरी
बेहद जरूरी है कि डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की समय-समय पर जांच कराते रहें। व्यायाम और टहलना भी बेहद जरूरी है, लेकिन ज्यादा सर्द मौसम में मार्निंग वॉक से बचें। टहलने से मोटापा कम होता है और डायबिटीज भी नियंत्रित होती है। डायबिटीज के रोगी तेल और घी का प्रयोग कम से कम करें। ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कराएं। सीने में जरा भी दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह लें। टहलने के समय अगर सीने में दर्द महसूस हो तो कुछ देर बैठकर आराम करें। सीने में दर्द होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह पर दवा जरूर लें।

डॉक्टर की बात
इन दिनों हृदय रोगियों की संख्या बढ़ गई है। तीन दिन पहले ही एक करीब 30 साल का युवा आया था। उसके सीने में दर्द की शिकायत थी। जांच में पता लगा कि वह हृदय रोग का शिकार है। बदली जीवनशैली में अब युवाओं को भी हृदय संबंधी बीमारियां घेर रहीं हैं। इसका एक कारण धुम्रपान भी है। गले या जबड़े में दर्द, चक्कर आना, बांह में दर्द, पेट में दर्द, जी मिचलाना, सीने में जलन, थकान, अचानक पसीना आना, सिर घूमना, सांस लेने में दिक्कत हो तो विशेषज्ञ डॉक्टर को जरूर दिखाएं। इसके साथ ही सर्दी से बचकर रहें, नमक का सेवन कम करें, वसा युक्त भोजन करने से परहेज करें। सिगरेट शराब का सेवन न करें। भरपूर नींद लें, धूप में अवश्य बैठें, ठंड में सुबह जल्दी टहलने न जाएं, नियमित परीक्षण कराएं।
- डॉ. शरद कुमार गुप्ता, हृदय रोग विशेषज्ञ
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