फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   In the BSA office, husband, wife, mother and brother tried to self-abuse

बीएसए आफिस में पति-पत्नी, मां और भाई ने की आत्मदाह की कोशिश

Wed, 06 Sep 2017 01:15 AM IST
बदायूं।
बदायूं। Updated Wed, 06 Sep 2017 01:15 AM IST
विज्ञापन
In the BSA office, husband, wife, mother and brother tried to self-abuse
आत्मदाह - फोटो : अमर उजाला
- मृतक आश्रित में लिपिक की नौकरी पाने को वर्षों से भटक रहा है दिव्यांग
विज्ञापन

- केरोसिन में दरोगा की वर्दी भी भीगी, पुलिस चारों को पकड़कर थाने ले गई 

बीएसए कार्यालय में मृतक आश्रित में लिपिक के पद पर नौकरी न मिलने से खफा एक दिव्यांग, उसकी पत्नी, भाई और मां ने मंगलवार को आत्मदाह करने की कोशिश की। उन्हें अपने ऊपर मिट्टी का तेल उड़ेलते देख मौजूद पुलिस कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। पुलिस वालों ने किसी तरह उन्हें बचाया और थाने पहुंचाया। दरोगा की ओर से चारों के खिलाफ आत्मदाह की कोशिश करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है। बीएसए कार्यालय पर करीब डेढ़ घंटे तक अफरा-तफरी मची रही।
 दिव्यांग दिवाकर शर्मा के पिता प्रेमपाल शर्मा गौतरा पट्टी धौनी थाना उसावां के रहने वाले हैं। प्रेमपाल प्राथमिक विद्यालय कैलोठा में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थे। दिवाकर शर्मा के मुताबिक 27 जनवरी 2010 को पिता प्रेमपाल का निधन हो गया था। इसके बाद दिवाकर ने एक अक्तूबर 2011 को मृतक आश्रित कोटे में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति को आवेदन किया, लेकिन तत्कालीन बीएसए रहे कृपाशंकर वर्मा ने उन्हें नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया। शिक्षक पद पर नियुक्ति नहीं मिलने के बाद उसने लिपिक पद पर नियुक्ति को कहा। इस पद पर भी नियुक्ति नहीं की गई। जबकि दूसरे व्यक्ति को लिपिक पद पर नियुक्त दे दी गई। वह लगातार चक्कर काट रहा है। उसने न्याय के लिए राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में भी फरियाद की। साथ ही प्रदेश की बेसिक शिक्षामंत्री अनुपमा जायसवाल को भी शिकायती पत्र दिया और स्वयं भी मिला लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब उसने धमकी दी थी कि उसकी नियुक्ति लिपिक पद पर नहीं की गई तो वह पांच सितंबर शिक्षक दिवस के मौके पर बीएसए कार्यालय पर पूरे परिवार के साथ आत्मदाह करेगा।
विज्ञापन

कोट
दिवाकर शर्मा की सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति के लायक उस समय  शैक्षिक योग्यता नहीं थी। इन्हें तत्कालीन बीएसए ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का नियुक्ति पत्र दिया था। इस पर इन्होंने ज्वाइन नहीं किया। फिर यह कोर्ट चले गए। शासन से बीच-बीच में लिपिक की नियुक्ति के लिए आदेश आते रहे, उन पर नियुक्ति हो गई। इसके बाद इनका मामला कोर्ट से खारिज हो गया। अब मृतक आश्रित के पद पर अनुकंपा के तौर पर दी जाने वाली नौकरी का निर्धारित समय पांच साल का पूरा हो गया। लिहाजा, इस मामले से शासन को अवगत करा दिया गया है।      
विज्ञापन
विज्ञापन

-प्रेमचंद्र यादव, बीएसए, बदायूं
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed