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Budaun News: कहीं सपोर्ट स्टॉफ चला रहा स्वास्थ्य केंद्र तो कई में एंबुलेंस जाने का रास्ता नहीं
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शाहबाजपुर में खाली पड़ी डाॅक्टर की कुर्सी। संवाद
- फोटो : samvad
बदायूं। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल बेहाल है। बृहस्पतिवार को शहर के स्वास्थ्य केंद्रों की पड़ताल में अव्यवस्था सामने आई। कहीं सपोर्ट स्टॉफ स्वास्थ्य केंद्र चला रहा है तो कई में एंबुलेंस जाने का रास्ता नहीं है। ऐसी अव्यवस्था के बीच बेहतर इलाज का दावा किया जा रहा है। तीन केंद्रों पर दोपहर में डॉक्टर ही नहीं मिले।
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केस एक
नेकपुर मोहल्ले में एक मीटर चौड़ी सड़क के अंदर नगरीय पीएचसी है। दोपहर 12:56 बजे अंदर सपोर्टिंग स्टॉफ व स्टॉफ नर्स थीं। पहली मंजिल में मीटिंग चल रही थी। वहां तैनात महिला डॉक्टर ने बताया कि प्रसव की सुविधा अभी नहीं है। एंबुलेंस से आने वाले मरीज को गली के बाहर जाकर देखा जाएगा। अभी तक एंबुलेंस से कोई मरीज आया नहीं है।
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केस दो
नाहर खां सराय स्थित नगरीय पीएचसी में दोपहर 1:33 बजे डॉ. कैलाश कुमार और दो सपोर्टिंग स्टॉफ मिला। इस आरोग्य मंदिर को जाने वाली सड़क एक मीटर ही चौड़ी है। एंबुलेंस आने की जगह नहीं थी। यहां पर प्रसव शुरु होने हैं, लेकिन पीएचसी तक एंबुलेंस पहुंचने की जगह नहीं थी।
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केस तीन
ऊपरपारा स्थित नगरीय पीएचसी में दोपहर 1.45 बजे डाॅक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स व अन्य स्टाफ मौजूद था। यहां के डॉ. आशीष राठौर ने बताया कि कुछ दिन पहले एक एंबुलेंस मरीज लेकर आ रही थी। रास्ते में वह फंस गई तो मरीज को वहां से उठाकर पीएचसी तक लाएं, फिर उपचार किया। सड़क की चौड़ाई बहुत कम है।
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केस चार
चौधरी सरायं नगरीय पीएचसी में दोपहर दो बजे स्टॉफ नर्स व सपोर्टिंग स्टाफ मिला। डॉ. प्रशांत पटेल नहीं थे। कर्मचारियों ने बताया कि धरने में उनकी ड्यूटी लगी हुई है। स्टाफ नर्स ही दवा बांट रही थीं। यहां पर मरीजों को सीढि़यों से चढ़कर जाना पड़ता है। इससे मरीजों को दिक्कत होती है।
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केस पांच
नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कबूलपुरा में दोपहर 2:08 बजे डॉक्टर नहीं थे। उनका कमरा बंद था। स्टाफ नर्स और दो सपोर्टिंग स्टाफ मौजूद था। प्रसव कराने का सामान कमरे के अंदर रखा हुआ था। स्टॉफ नर्स का कहना था कि डॉक्टर मीटिंग में गए हुए हैं।
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केस छह
नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शाहबाजपुर में दोपहर 2:23 बजे एक सपोर्टिंग स्टाफ था। यहां पर सप्ताह में दो दिन डॉ. रेशमा आती हैं। बृहस्पतिवार को वह सीएमओ कार्यालय में मीटिंग में गई थीं। स्वास्थ्य केंद्र सपोर्टिंग स्टाफ के भरोसे चल रहा था। डॉक्टर ने बताया कि यहां नियमित रूप से तैनात डॉक्टर ने 11 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया है।
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नगरीय पीएचसी में होती हैं सुविधा
ओपीडी, डे-केयर इंडोर (ओपीडी के समय में मरीज भर्ती), पैथालॉजी सेवा, टीकाकरण, गर्भावस्था की जांच, सामान्य प्रसव।
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जगह न मिलने की वजह से गलियों में नगरीय स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं। जैसे ही अच्छी जगह मिल जाएगी। जहां एंबुलेंस की आवाजाही हो सके, तुरंत बदल देंगे। जहां पर डॉक्टर नहीं मिले हैं। उनसे स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा।
- डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ
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केस एक
नेकपुर मोहल्ले में एक मीटर चौड़ी सड़क के अंदर नगरीय पीएचसी है। दोपहर 12:56 बजे अंदर सपोर्टिंग स्टॉफ व स्टॉफ नर्स थीं। पहली मंजिल में मीटिंग चल रही थी। वहां तैनात महिला डॉक्टर ने बताया कि प्रसव की सुविधा अभी नहीं है। एंबुलेंस से आने वाले मरीज को गली के बाहर जाकर देखा जाएगा। अभी तक एंबुलेंस से कोई मरीज आया नहीं है।
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केस दो
नाहर खां सराय स्थित नगरीय पीएचसी में दोपहर 1:33 बजे डॉ. कैलाश कुमार और दो सपोर्टिंग स्टॉफ मिला। इस आरोग्य मंदिर को जाने वाली सड़क एक मीटर ही चौड़ी है। एंबुलेंस आने की जगह नहीं थी। यहां पर प्रसव शुरु होने हैं, लेकिन पीएचसी तक एंबुलेंस पहुंचने की जगह नहीं थी।
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केस तीन
ऊपरपारा स्थित नगरीय पीएचसी में दोपहर 1.45 बजे डाॅक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स व अन्य स्टाफ मौजूद था। यहां के डॉ. आशीष राठौर ने बताया कि कुछ दिन पहले एक एंबुलेंस मरीज लेकर आ रही थी। रास्ते में वह फंस गई तो मरीज को वहां से उठाकर पीएचसी तक लाएं, फिर उपचार किया। सड़क की चौड़ाई बहुत कम है।
केस चार
चौधरी सरायं नगरीय पीएचसी में दोपहर दो बजे स्टॉफ नर्स व सपोर्टिंग स्टाफ मिला। डॉ. प्रशांत पटेल नहीं थे। कर्मचारियों ने बताया कि धरने में उनकी ड्यूटी लगी हुई है। स्टाफ नर्स ही दवा बांट रही थीं। यहां पर मरीजों को सीढि़यों से चढ़कर जाना पड़ता है। इससे मरीजों को दिक्कत होती है।
केस पांच
नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कबूलपुरा में दोपहर 2:08 बजे डॉक्टर नहीं थे। उनका कमरा बंद था। स्टाफ नर्स और दो सपोर्टिंग स्टाफ मौजूद था। प्रसव कराने का सामान कमरे के अंदर रखा हुआ था। स्टॉफ नर्स का कहना था कि डॉक्टर मीटिंग में गए हुए हैं।
केस छह
नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शाहबाजपुर में दोपहर 2:23 बजे एक सपोर्टिंग स्टाफ था। यहां पर सप्ताह में दो दिन डॉ. रेशमा आती हैं। बृहस्पतिवार को वह सीएमओ कार्यालय में मीटिंग में गई थीं। स्वास्थ्य केंद्र सपोर्टिंग स्टाफ के भरोसे चल रहा था। डॉक्टर ने बताया कि यहां नियमित रूप से तैनात डॉक्टर ने 11 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया है।
नगरीय पीएचसी में होती हैं सुविधा
ओपीडी, डे-केयर इंडोर (ओपीडी के समय में मरीज भर्ती), पैथालॉजी सेवा, टीकाकरण, गर्भावस्था की जांच, सामान्य प्रसव।
जगह न मिलने की वजह से गलियों में नगरीय स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं। जैसे ही अच्छी जगह मिल जाएगी। जहां एंबुलेंस की आवाजाही हो सके, तुरंत बदल देंगे। जहां पर डॉक्टर नहीं मिले हैं। उनसे स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा।
- डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ

शाहबाजपुर में खाली पड़ी डाॅक्टर की कुर्सी। संवाद- फोटो : samvad

शाहबाजपुर में खाली पड़ी डाॅक्टर की कुर्सी। संवाद- फोटो : samvad

शाहबाजपुर में खाली पड़ी डाॅक्टर की कुर्सी। संवाद- फोटो : samvad