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Budaun News: मदरसाें के 265 शिक्षकों को मिलने वाला मानदेय बंद
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बदायूं। जिले के 75 मान्यता प्राप्त और दो एडड मदरसों में आधुनिकीकरण योजना के तहत तैनात 265 शिक्षकों को राज्य सरकार की ओर से मिलने वाला मानदेय बंद कर दिया गया है।
मदरसा में दीनी तालीम के साथ-साथ आधुनिक विषय पढ़ाने के लिए भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने आधुनिकीकरण योजना शुरू की थी। इसके लिए हर मदरसे में गणित, विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी और सामाजिक विषय पढ़ाने के लिए मानदेय पर तीन-तीन अध्यापक तैनात किए गए। वर्ष 2008 से इसको मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की योजना (एसपीक्यूईएम) के नाम से संचालित किया जाने लगा। मानदेय पर तैनात शिक्षकों ने बच्चों को आधुनिक विषय की शिक्षा देनी शुरू कर दी। इससे मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे भी दीनी तालीम के साथ-साथ आधुनिक विषय भी पढ़ने लगे।
पहले केंद्र व राज्य सरकार की ओर से 60 और 40 प्रतिशत के अनुपात में मानदेय दिया जाता था, लेकिन तीन साल पहले केंद्र सरकार ने इसको बंद कर दिया। हालांकि प्रदेश सरकार की ओर से मानदेय दिया जा रहा था। प्रदेश सरकार ने भी सत्र समाप्ति के साथ ही राज्यांश नहीं दिया है। ऐसे में राज्यांश नहीं मिलने की वजह से मदरसा शिक्षक परेशान हैं।
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इसके अलावा शहर में दो एडेड मदरसा भी हैं। यहां पर 13 शिक्षक तैनात हैं। इनको भी मानदेय सरकार ने देना बंद कर दिया है। ऐसे में मदरसों में पढ़ाई का संकट खड़ा होने लगा है।
केंद्र सरकार ने आधुनिकीकरण योजना के तहत तीन साल पहले ही शिक्षकों को मानदेय देना बंद कर दिया था। साथ ही अब राज्य सरकार ने भी राज्यांश नहीं दिया है। अभी योजना बंद या शुरू है, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। क्योंकि शासन की तरफ से अभी इसको लेकर कोई स्पष्ट आदेश नहीं आया है। -मोहम्मद खालिद, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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मदरसा में दीनी तालीम के साथ-साथ आधुनिक विषय पढ़ाने के लिए भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने आधुनिकीकरण योजना शुरू की थी। इसके लिए हर मदरसे में गणित, विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी और सामाजिक विषय पढ़ाने के लिए मानदेय पर तीन-तीन अध्यापक तैनात किए गए। वर्ष 2008 से इसको मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की योजना (एसपीक्यूईएम) के नाम से संचालित किया जाने लगा। मानदेय पर तैनात शिक्षकों ने बच्चों को आधुनिक विषय की शिक्षा देनी शुरू कर दी। इससे मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे भी दीनी तालीम के साथ-साथ आधुनिक विषय भी पढ़ने लगे।
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पहले केंद्र व राज्य सरकार की ओर से 60 और 40 प्रतिशत के अनुपात में मानदेय दिया जाता था, लेकिन तीन साल पहले केंद्र सरकार ने इसको बंद कर दिया। हालांकि प्रदेश सरकार की ओर से मानदेय दिया जा रहा था। प्रदेश सरकार ने भी सत्र समाप्ति के साथ ही राज्यांश नहीं दिया है। ऐसे में राज्यांश नहीं मिलने की वजह से मदरसा शिक्षक परेशान हैं।
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इसके अलावा शहर में दो एडेड मदरसा भी हैं। यहां पर 13 शिक्षक तैनात हैं। इनको भी मानदेय सरकार ने देना बंद कर दिया है। ऐसे में मदरसों में पढ़ाई का संकट खड़ा होने लगा है।
केंद्र सरकार ने आधुनिकीकरण योजना के तहत तीन साल पहले ही शिक्षकों को मानदेय देना बंद कर दिया था। साथ ही अब राज्य सरकार ने भी राज्यांश नहीं दिया है। अभी योजना बंद या शुरू है, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। क्योंकि शासन की तरफ से अभी इसको लेकर कोई स्पष्ट आदेश नहीं आया है। -मोहम्मद खालिद, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी