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स्वास्थ्य विभाग बेखबर...डेंगू-वायरल से हाे रही माैतें
सार
स्वास्थ्य विभाग डेंगू से हो रहीं मौतों की सच्चाई से मुंह मोड़ रहा है।इसके अलावा डेंगू से गंभीर तौर पर बीमार होने पर हड्डियों में गंभीर दर्द होता है।-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ शशांक सक्सेना का फाइल फोटो।- फोटो : BADAUN।
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लार्वा नष्ट कराते मलेरिया विभाग के कर्मचारी। संवाद
- फोटो : BADAUN
विस्तार
बदायूं। स्वास्थ्य विभाग डेंगू से हो रहीं मौतों की सच्चाई से मुंह मोड़ रहा है। विभाग की नजर में डेंगू और मलेरिया से इस वर्ष एक भी मौत नहीं हुई है, जबकि आए दिन बुखार से हो रही मौतों में मलेरिया ही नहीं, डेंगू के मरीज भी शामिल हैं। हाल ही में निजी कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर शशांक सक्सेना की इलाज के दौरान बरेली के एक निजी अस्पताल में बृहस्पतिवार रात मौत हो गई। उनको कई दिन से बुखार आ रहा था। जांच में भी डेंगू की पुष्टि हुई थी। पिछले दिनों वजीरगंज ब्लॉक के गांव उरैना में एक के बाद एक छह लोगों की बुखार से मौत हो चुकी है। हाल ही में सैदपुर कस्बे में भी दो लोगों की बुखार से जान जा चुकी है।
शहर के सिविल लाइंस पटेल नगर निवासी 32 वर्षीय शशांक सक्सेना पुत्र स्वर्गीय राजीव सक्सेना को कई दिन से बुखार आ रहा था। परिवार के लोग उनका इलाज शहर केे निजी अस्पताल में करा रहे थे। यहां डॉक्टर ने उनको मलेरिया बताया था, लेकिन शशांक की हालत बिगड़ती जा रही थी। सुधार न होने पर परिवार वालों ने उन्हें बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टर ने उनको डेंगू बताया। इलाज के दौरान बृहस्पतिवार रात शशांक की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि शशांक के शरीर पर चकत्ते पड़ गए थे। उन्हें उल्टियां भी हो रही थीं।
शुक्रवार को लालपुल स्थित श्मशान स्थल पर शशांक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। पटेल नगर में कई अन्य लोग भी बुखार की चपेट में हैं। जिले में वर्तमान में डेंगू के 17 सक्रिय मरीज हैं। इधर, शुक्रवार को जिले में मलेरिया और फैल्सीपेरम के दो-दो मरीज मिले हैं। शुक्रवार को 716 लोगों की मलेरिया और 21 लोगों की एलाइजा जांच कराई गई। जिले में इस सीजन अब तक डेंगू के कुल 59 और मलेरिया के 547 मरीज मिल चुके हैं। कई गांवों में बुखार का भी प्रकोप है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिले में इस वर्ष डेंगू या मलेरिया से कोई मौत नहीं हुई है।
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एलाइजा की रोजाना औसतन हो रहीं 30 जांच
पिछले वर्ष तक जिले में डेंगू की पुष्टि के लिए एलाइजा जांच की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में सैंपल बरेली, लखनऊ और अलीगढ़ भेजे जाते थे। जांच रिपोर्ट आने में कई-कई दिन लग जाते थे। इस वर्ष जिला अस्पताल में एलाइजा टेस्ट की व्यवस्था है। इस साल एक जनवरी से 30 सितंबर तक जिले में 792 लोगों की एलाइजा जांच हो चुकी है। इनमें 59 लोगों को डेंगू पाया गया है। 180417 लोगों की मलेरिया जांच हुई है। इनमें 457 मलेरिया के मरीज मिले हैं। पिछले वर्ष जिले में डेंगू के रिकॉर्ड 417 मरीज मिले थे। डेंगू का सीजन नवंबर के अंत तक रहता है। इन दिनों सीजन के दौरान जिला अस्पताल में रोज औसतन 30 लोगों की एलाइजा जांच हो रही है। शुक्रवार को 21 लोगों की जांच की गई। बृहस्पतिवार को 48, बुधवार को 25, मंगलवार को 37 और सोमवार को 28 लोगों की एलाइजा जांच की गई थी।
बचाव के तरीके
- मच्छरों से बचने के लिए मॉस्क्यूटो रैपिलेंट और मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
- पूरे बाजू के कपड़े, मोजे-जूते पहनें। घर के खिड़की-दरवाजों को बंद रखें।
- घर या आसपास कहीं पानी जमा हो तो उसे साफ कर दें।
- जहां पर पानी साफ करने की व्यवस्था न हो वहां पानी में मिट्टी का तेल, जला हुआ मोबिल ऑयल डाल दें।
- डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर ठहरे हुए साफ पानी पर पनपता है। यह दिन में काटता है।
- बुखार आने पर डॉक्टर की सलाह लें।
ये हैं लक्षण
डेंगू के लक्षणों में तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द और शरीर पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखते हैं। इसके अलावा डेंगू से गंभीर तौर पर बीमार होने पर हड्डियों में गंभीर दर्द होता है। इसे ब्रेकबोन बुखार भी कहा जाता है। उल्टी आना, जोड़ों में दर्द, आंखों में दर्द जैसे डेंगू होने की तरफ इशारा करते हैं। बुखार गंभीर होने पर कई बार उल्टी आने के साथ नाक और होंठों से खून बहना, उल्टी और मल में खून आना, थकावट और बेचैनी महसूस होना डेंगू के गंभीर लक्षण हैं।
पटेल नगर में युवक की मौत किस कारण से हुई, स्वास्थ्य टीम को भेजकर जांच कराई जाएगी। बिना एलाइजा जांच के डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती। हो सकता है कि युवक को डेंगू जैसे लक्षण रहे हों। प्लेटलेट्स सामान्य बुखार में भी कम हो जाती हैं। मच्छरजनित बीमारियों पर नियंत्रण को स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की टीमें लगातार काम कर रही हैं। -डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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शहर के सिविल लाइंस पटेल नगर निवासी 32 वर्षीय शशांक सक्सेना पुत्र स्वर्गीय राजीव सक्सेना को कई दिन से बुखार आ रहा था। परिवार के लोग उनका इलाज शहर केे निजी अस्पताल में करा रहे थे। यहां डॉक्टर ने उनको मलेरिया बताया था, लेकिन शशांक की हालत बिगड़ती जा रही थी। सुधार न होने पर परिवार वालों ने उन्हें बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टर ने उनको डेंगू बताया। इलाज के दौरान बृहस्पतिवार रात शशांक की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि शशांक के शरीर पर चकत्ते पड़ गए थे। उन्हें उल्टियां भी हो रही थीं।
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शुक्रवार को लालपुल स्थित श्मशान स्थल पर शशांक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। पटेल नगर में कई अन्य लोग भी बुखार की चपेट में हैं। जिले में वर्तमान में डेंगू के 17 सक्रिय मरीज हैं। इधर, शुक्रवार को जिले में मलेरिया और फैल्सीपेरम के दो-दो मरीज मिले हैं। शुक्रवार को 716 लोगों की मलेरिया और 21 लोगों की एलाइजा जांच कराई गई। जिले में इस सीजन अब तक डेंगू के कुल 59 और मलेरिया के 547 मरीज मिल चुके हैं। कई गांवों में बुखार का भी प्रकोप है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिले में इस वर्ष डेंगू या मलेरिया से कोई मौत नहीं हुई है।
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एलाइजा की रोजाना औसतन हो रहीं 30 जांच
पिछले वर्ष तक जिले में डेंगू की पुष्टि के लिए एलाइजा जांच की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में सैंपल बरेली, लखनऊ और अलीगढ़ भेजे जाते थे। जांच रिपोर्ट आने में कई-कई दिन लग जाते थे। इस वर्ष जिला अस्पताल में एलाइजा टेस्ट की व्यवस्था है। इस साल एक जनवरी से 30 सितंबर तक जिले में 792 लोगों की एलाइजा जांच हो चुकी है। इनमें 59 लोगों को डेंगू पाया गया है। 180417 लोगों की मलेरिया जांच हुई है। इनमें 457 मलेरिया के मरीज मिले हैं। पिछले वर्ष जिले में डेंगू के रिकॉर्ड 417 मरीज मिले थे। डेंगू का सीजन नवंबर के अंत तक रहता है। इन दिनों सीजन के दौरान जिला अस्पताल में रोज औसतन 30 लोगों की एलाइजा जांच हो रही है। शुक्रवार को 21 लोगों की जांच की गई। बृहस्पतिवार को 48, बुधवार को 25, मंगलवार को 37 और सोमवार को 28 लोगों की एलाइजा जांच की गई थी।
बचाव के तरीके
- मच्छरों से बचने के लिए मॉस्क्यूटो रैपिलेंट और मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
- पूरे बाजू के कपड़े, मोजे-जूते पहनें। घर के खिड़की-दरवाजों को बंद रखें।
- घर या आसपास कहीं पानी जमा हो तो उसे साफ कर दें।
- जहां पर पानी साफ करने की व्यवस्था न हो वहां पानी में मिट्टी का तेल, जला हुआ मोबिल ऑयल डाल दें।
- डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर ठहरे हुए साफ पानी पर पनपता है। यह दिन में काटता है।
- बुखार आने पर डॉक्टर की सलाह लें।
ये हैं लक्षण
डेंगू के लक्षणों में तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द और शरीर पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखते हैं। इसके अलावा डेंगू से गंभीर तौर पर बीमार होने पर हड्डियों में गंभीर दर्द होता है। इसे ब्रेकबोन बुखार भी कहा जाता है। उल्टी आना, जोड़ों में दर्द, आंखों में दर्द जैसे डेंगू होने की तरफ इशारा करते हैं। बुखार गंभीर होने पर कई बार उल्टी आने के साथ नाक और होंठों से खून बहना, उल्टी और मल में खून आना, थकावट और बेचैनी महसूस होना डेंगू के गंभीर लक्षण हैं।
पटेल नगर में युवक की मौत किस कारण से हुई, स्वास्थ्य टीम को भेजकर जांच कराई जाएगी। बिना एलाइजा जांच के डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती। हो सकता है कि युवक को डेंगू जैसे लक्षण रहे हों। प्लेटलेट्स सामान्य बुखार में भी कम हो जाती हैं। मच्छरजनित बीमारियों पर नियंत्रण को स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की टीमें लगातार काम कर रही हैं। -डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ

शशांक सक्सेना का फाइल फोटो।- फोटो : BADAUN