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आयुष्मान कार्ड जारी करने में फर्जीवाड़ा, रिपोर्ट का आदेश
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बदायूं। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गरीबों को पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही, जिसका प्रमुख कारण योजना के क्रियान्वयन में गड़बड़ी और फर्जीवाड़ा है। एक ओर योजना का पात्रों को लाभ नहीं मिल रहा वहीं दूसरी ओर एक ही मोबाइल नंबर पर कई-कई गोल्डन कार्ड जारी कर दिए गए हैं। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने इस पर रिपोर्ट तलब की है। दूसरी ओर फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ डीएम दीपा रंजन ने एफआईआर का आदेश दिया है।
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना 2018 में शुरू हुई थी। योजना के तहत 2011 की जनगणना के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले 2.44 लाख परिवारों को 11.20 लाख आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जाने थे। इनमें करीब 45 हजार बीपीएल और अन्योदय कार्ड धारक परिवार भी हैं। गौर करने की बात यह है कि चार साल में 2.73 लाख गोल्डन कार्ड ही जारी किए जा सके हैं। बीपीएल और अंत्योदय परिवारों को कार्ड जारी करने का लक्ष्य भी हासिल नहीं किया जा सका है। दूसरी ओर एक ही मोबाइल नंबर पर 150 से ज्यादा गोल्डन कार्ड जारी किए जाने का मामला खुला तो एसएचए और एनएचए ने भी इसका संज्ञान लिया। मामले में जांच का आदेश दिया तो कई परतें खुल गईं। प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया है कि बदायूं सीएमओ कार्यालय में तैनात रहे प्रमोद कुमार संत नाम के कर्मचारी की आईडी से यह कार्ड मध्य प्रदेश के भोपाल में बनाए गए।
प्रमोद कुमार संत की तैनाती अब सिद्धार्थ नगर में है। 2019 में उसका बदायूं से सिद्धार्थ नगर तबादला होने के बाद भी आईडी बंद नहीं की गई। ऐसे में कुछ और लोग भी लपेटे में आ सकते हैं। इस संबंध में एसएचए और एनएचए को रिपोर्ट भेजी जा रही है। दूसरी ओर डीएम दीपा रंजन ने पीएम जन आरोग्य योजना के जिला समन्वयक नितिन वर्मा को तलब कर फर्जीवाड़ा के मामले में एफआईआर का आदेश दिया है। सूत्रों का कहना है कि इस फर्जीवाड़े में योजना से जुड़े कुछ और लोगों की गर्दन भी फंस सकती है।
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आयुष्मान गोल्डन कार्ड में गलतियां सुधारवाने को भटक रहे लोग
जिन करीब 2.73 लाख लोगों को आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए गए हैं उनमें बड़े पैमाने पर गलतियां हैं। गलतियां होने के कारण लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड से पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का लाभ नहीं मिल पा रहा। आधार कार्ड और आयुष्मान गार्ड में भिन्नता का खामियाजा लोग भुगत रहे हैं। वे गलतियां सुधरवाने को अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनको कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
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जांच में सामने आया है कि प्रमोद कुमार संत नाम के कर्मचारी की आईडी से एक ही मोबाइल नंबर पर मध्य प्रदेश में करीब 150 लोगों के नाम आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं। 2019 के अंत में इस कर्मचारी का तबादला बदायूं से सिद्धार्थ नगर हो गया था। फर्जीवाड़े के संबंध में एसएचए और एनएचए ने भी संज्ञान लिया है। डीएम ने फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया है। मामले में कार्रवाई चल रही है।
-नितिन वर्मा, जिला समन्वयक पीएम आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना
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प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना 2018 में शुरू हुई थी। योजना के तहत 2011 की जनगणना के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले 2.44 लाख परिवारों को 11.20 लाख आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जाने थे। इनमें करीब 45 हजार बीपीएल और अन्योदय कार्ड धारक परिवार भी हैं। गौर करने की बात यह है कि चार साल में 2.73 लाख गोल्डन कार्ड ही जारी किए जा सके हैं। बीपीएल और अंत्योदय परिवारों को कार्ड जारी करने का लक्ष्य भी हासिल नहीं किया जा सका है। दूसरी ओर एक ही मोबाइल नंबर पर 150 से ज्यादा गोल्डन कार्ड जारी किए जाने का मामला खुला तो एसएचए और एनएचए ने भी इसका संज्ञान लिया। मामले में जांच का आदेश दिया तो कई परतें खुल गईं। प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया है कि बदायूं सीएमओ कार्यालय में तैनात रहे प्रमोद कुमार संत नाम के कर्मचारी की आईडी से यह कार्ड मध्य प्रदेश के भोपाल में बनाए गए।
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प्रमोद कुमार संत की तैनाती अब सिद्धार्थ नगर में है। 2019 में उसका बदायूं से सिद्धार्थ नगर तबादला होने के बाद भी आईडी बंद नहीं की गई। ऐसे में कुछ और लोग भी लपेटे में आ सकते हैं। इस संबंध में एसएचए और एनएचए को रिपोर्ट भेजी जा रही है। दूसरी ओर डीएम दीपा रंजन ने पीएम जन आरोग्य योजना के जिला समन्वयक नितिन वर्मा को तलब कर फर्जीवाड़ा के मामले में एफआईआर का आदेश दिया है। सूत्रों का कहना है कि इस फर्जीवाड़े में योजना से जुड़े कुछ और लोगों की गर्दन भी फंस सकती है।
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आयुष्मान गोल्डन कार्ड में गलतियां सुधारवाने को भटक रहे लोग
जिन करीब 2.73 लाख लोगों को आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए गए हैं उनमें बड़े पैमाने पर गलतियां हैं। गलतियां होने के कारण लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड से पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का लाभ नहीं मिल पा रहा। आधार कार्ड और आयुष्मान गार्ड में भिन्नता का खामियाजा लोग भुगत रहे हैं। वे गलतियां सुधरवाने को अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनको कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
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जांच में सामने आया है कि प्रमोद कुमार संत नाम के कर्मचारी की आईडी से एक ही मोबाइल नंबर पर मध्य प्रदेश में करीब 150 लोगों के नाम आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं। 2019 के अंत में इस कर्मचारी का तबादला बदायूं से सिद्धार्थ नगर हो गया था। फर्जीवाड़े के संबंध में एसएचए और एनएचए ने भी संज्ञान लिया है। डीएम ने फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया है। मामले में कार्रवाई चल रही है।
-नितिन वर्मा, जिला समन्वयक पीएम आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना