{"_id":"62eec43c1e2e6c3ac97c45d9","slug":"health-badaun-news-bly4937453177","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेई से मरने वाले बच्चे की नहीं मिल रही ट्रैवेल हिस्ट्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जेई से मरने वाले बच्चे की नहीं मिल रही ट्रैवेल हिस्ट्री
विज्ञापन
भवानीपुर खल्ली में दवा का छिड़काव करते मलेरिया विभाग के कर्मचारी। संवाद
- फोटो : BADAUN
बदायूं। दहगवां ब्लॉक के गांव भवानीपुर खल्ली में जापानी इंसेफेलाइटिस का वायरस कैसे पहुंचा यह पता लगाना स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। जापानी इंसेफेलाइटिस पीड़ित छह माह के इस बच्चे ने शुक्रवार रात इलाज के दौरान अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया। करीब छह माह पहले भी ककराला के पास गांव अली नगला में पांच साल के बच्चे को जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई थी। इस मामले में भी ट्रैवेल और केस हिस्ट्री अप तक नहीं मिल सकी है।
भगवानीपुर खल्ली निवासी शमशाद के आठ बच्चे हैं। शमशाद दिल्ली में रहकर पेंटिंग का काम करता है। उसके छह माह के बेटे अदनान को 23 जुलाई को बुखार आया था। गांव और फिर मुख्यालय पर इलाज कराया, लेकिन फायदा नहीं हुआ। ऐसे में परिवार के लोगों ने अदनान को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। यहां अदनान को 30 जुलाई को जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई थी। शुक्रवार रात उसकी मौत हो गई। जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस का वायरस मिलने से स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग का काम बढ़ गया है। शनिवार को भी स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की टीमें गांव पहुंचीं। बच्चे के परिवार के लोगों से बात की तो मालूम चला कि परिवार का कोई सदस्य करीब 25 दिन से कहीं नहीं गया है।
जापानी इंसेफेलाइटिस से बच्चे की मौत के बाद स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग के सामने इसकी हिस्ट्री तलाश करना चुनौती बना हुआ है। गौर करने की बात यह है कि 17 फरवरी को अली नगला में जिस बच्चे को जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई थी उसके बारे में भी अब तक कोई हिस्ट्री नहीं मिल सकी है।
विज्ञापन
-
आठ किमी तक उड़ता है मच्छर
मलेरिया निरीक्षक तनवीर सिंह ने बताया कि मच्छर खून की तलाश में आठ किमी तक उड़ सकता है। भवानीपुर खल्ली में सूअर नहीं हैं। मच्छर में यह वायरस सुअर से पहुंचता है। एक दो केस हर वर्ष मिलना सामान्य बात है, लेकिन इसकी पड़ताल की जा रही है कि जापानी इंसेफेलाइटिस का वायरस बदायूं तक कैसे पहुंच रहा है। जापानी इंसेफेलाइटिस प्रकोप पूर्वांचल और पूर्वोत्तर के राज्यों में ज्यादा रहता है।
-
शनिवार को भी स्वास्थ्य विभाग की टीम भवानीपुर खल्ली पहुंची थी। बच्चे को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई थी। उसके परिवार वालों से बात की गई है। परिवार के लोगों ने करीब एक महीने से कोई यात्रा नहीं की है। वायरस यहां कैसे पहुंचा इसकी जांच की जा रही है।
-डॉ. कौशल गुप्ता, प्रभारी संक्रामक रोग नियंत्रण सेल
विज्ञापन
भगवानीपुर खल्ली निवासी शमशाद के आठ बच्चे हैं। शमशाद दिल्ली में रहकर पेंटिंग का काम करता है। उसके छह माह के बेटे अदनान को 23 जुलाई को बुखार आया था। गांव और फिर मुख्यालय पर इलाज कराया, लेकिन फायदा नहीं हुआ। ऐसे में परिवार के लोगों ने अदनान को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। यहां अदनान को 30 जुलाई को जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई थी। शुक्रवार रात उसकी मौत हो गई। जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस का वायरस मिलने से स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग का काम बढ़ गया है। शनिवार को भी स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की टीमें गांव पहुंचीं। बच्चे के परिवार के लोगों से बात की तो मालूम चला कि परिवार का कोई सदस्य करीब 25 दिन से कहीं नहीं गया है।
विज्ञापन
जापानी इंसेफेलाइटिस से बच्चे की मौत के बाद स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग के सामने इसकी हिस्ट्री तलाश करना चुनौती बना हुआ है। गौर करने की बात यह है कि 17 फरवरी को अली नगला में जिस बच्चे को जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई थी उसके बारे में भी अब तक कोई हिस्ट्री नहीं मिल सकी है।
विज्ञापन
-
आठ किमी तक उड़ता है मच्छर
मलेरिया निरीक्षक तनवीर सिंह ने बताया कि मच्छर खून की तलाश में आठ किमी तक उड़ सकता है। भवानीपुर खल्ली में सूअर नहीं हैं। मच्छर में यह वायरस सुअर से पहुंचता है। एक दो केस हर वर्ष मिलना सामान्य बात है, लेकिन इसकी पड़ताल की जा रही है कि जापानी इंसेफेलाइटिस का वायरस बदायूं तक कैसे पहुंच रहा है। जापानी इंसेफेलाइटिस प्रकोप पूर्वांचल और पूर्वोत्तर के राज्यों में ज्यादा रहता है।
-
शनिवार को भी स्वास्थ्य विभाग की टीम भवानीपुर खल्ली पहुंची थी। बच्चे को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई थी। उसके परिवार वालों से बात की गई है। परिवार के लोगों ने करीब एक महीने से कोई यात्रा नहीं की है। वायरस यहां कैसे पहुंचा इसकी जांच की जा रही है।
-डॉ. कौशल गुप्ता, प्रभारी संक्रामक रोग नियंत्रण सेल