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ऐसे में मलेरिया तो फैलेगा ही
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मलेरिया विभाग का दफ्तर। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के कारण मलेरिया के मामले अभी से आने शुरू हो गए हैं। बावजूद इसकी रोकथाम के प्रति ग्राम पंचायतें संजीदा नहीं हैं। मच्छरों का लार्वा नष्ट करने में पानी के घोल के साथ छिड़की जाने वाली टेमोफॉस दवा का मलेरिया विभाग के पास पर्याप्त स्टॉक है, जिसको बांटा भी गया है, बावजूद इसके ज्यादातर ग्राम पंचायतें दवा के छिड़काव को लेकर गंभीर नहीं है। ऐसे में मलेरिया को कैसे नियंत्रित किया जाएगा समझा जा सकता है।
मलेरिया के लिहाज से बदायूं के चार ब्लॉक के करीब 165 गांव हाईरिस्क श्रेणी में हैं। 2019 में यहां मलेरिया का व्यापक प्रकोप रहा था। शासन स्तर से पूरा फोकस बदायूं पर किया गया, इसके बाद भी 2020 में मलेरिया के 11 हजार से ज्यादा मामले सामने आए।
हालांकि, 2021 से स्थिति में सुधार होने लगा। अब एक बार फिर जून मध्य से मलेरिया की आशंका अधिक रहेगी। ऐसे में मलेरिया विभाग पहले से ही व्यवस्था में लगा है। स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग ने इस वर्ष भी 165 गांवों को हाईरिस्क श्रेणी में रखा है। पिछले दिनों मलेरिया विभाग को शासन स्तर से मच्छरों का लार्वा नष्ट करने वाली 575 लीटर टेमोफॉस दवा उपलब्ध करा दी गई। 2.50 एमएल दवा को दस लीटर पानी के साथ मिलाकर इसके घोल का छिड़काव किया जाता है।
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मलेरिया विभाग ने समरेर, दातागंज, सैदपुर, जगत, बिनावर, सालारपुर ब्लॉकों को दस-दस लीटर टेमोफॉस उपलब्ध करा दी। पंचायती राज विभाग को भी लिखा है कि ग्राम पंचायतें अपने यहां लार्वा नष्ट करने के लिए जलभराव वाले स्थानों पर छिड़काव के लिए दवा ले सकती हैं, लेकिन इसके लिए ग्राम पंचायतें आगे नहीं आ रहीं। मलेरिया विभाग के पास अब भी स्टॉक में करीब 300 लीटर टेमोफॉस है।
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वर्ष कुल जांच रोगी मिले डेंगू
2019 157248 20339 42
2020 254745 11987 09
2021 157294 1665 417
2022 19115 26 0
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हाईरिस्क श्रेणी में शामिल ब्लॉकों को टेमोफॉस उपलब्ध करा दी गई है। विभाग के पास दवा का पर्याप्त स्टॉक है। ग्राम पंचायतें मलेरिया विभाग से लार्वानाशक दवा लेकर गांव में जलभराव वाले स्थानों पर छिड़काव करा सकती हैं। इस संबंध में पंचायती राज विभाग को भी लिखा गया है, लेकिन ग्राम पंचायतें दवाओं के छिड़काव को लेकर गंभीर नहीं हैं।
-योगेश सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी
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मलेरिया के लिहाज से बदायूं के चार ब्लॉक के करीब 165 गांव हाईरिस्क श्रेणी में हैं। 2019 में यहां मलेरिया का व्यापक प्रकोप रहा था। शासन स्तर से पूरा फोकस बदायूं पर किया गया, इसके बाद भी 2020 में मलेरिया के 11 हजार से ज्यादा मामले सामने आए।
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हालांकि, 2021 से स्थिति में सुधार होने लगा। अब एक बार फिर जून मध्य से मलेरिया की आशंका अधिक रहेगी। ऐसे में मलेरिया विभाग पहले से ही व्यवस्था में लगा है। स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग ने इस वर्ष भी 165 गांवों को हाईरिस्क श्रेणी में रखा है। पिछले दिनों मलेरिया विभाग को शासन स्तर से मच्छरों का लार्वा नष्ट करने वाली 575 लीटर टेमोफॉस दवा उपलब्ध करा दी गई। 2.50 एमएल दवा को दस लीटर पानी के साथ मिलाकर इसके घोल का छिड़काव किया जाता है।
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मलेरिया विभाग ने समरेर, दातागंज, सैदपुर, जगत, बिनावर, सालारपुर ब्लॉकों को दस-दस लीटर टेमोफॉस उपलब्ध करा दी। पंचायती राज विभाग को भी लिखा है कि ग्राम पंचायतें अपने यहां लार्वा नष्ट करने के लिए जलभराव वाले स्थानों पर छिड़काव के लिए दवा ले सकती हैं, लेकिन इसके लिए ग्राम पंचायतें आगे नहीं आ रहीं। मलेरिया विभाग के पास अब भी स्टॉक में करीब 300 लीटर टेमोफॉस है।
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वर्ष कुल जांच रोगी मिले डेंगू
2019 157248 20339 42
2020 254745 11987 09
2021 157294 1665 417
2022 19115 26 0
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हाईरिस्क श्रेणी में शामिल ब्लॉकों को टेमोफॉस उपलब्ध करा दी गई है। विभाग के पास दवा का पर्याप्त स्टॉक है। ग्राम पंचायतें मलेरिया विभाग से लार्वानाशक दवा लेकर गांव में जलभराव वाले स्थानों पर छिड़काव करा सकती हैं। इस संबंध में पंचायती राज विभाग को भी लिखा गया है, लेकिन ग्राम पंचायतें दवाओं के छिड़काव को लेकर गंभीर नहीं हैं।
-योगेश सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी