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चादरों का रंग बदला...कुछ दिन बिछी भी, पर अब बेड से हो गईं लापता, गद्दे भी फटे
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बदायूं। जिला अस्पताल की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। कुछ समय पहले ये हालत थी कि वार्डों में पड़े बेडों पर चादरें तक नहीं बिछाई जाती थीं। जिस मरीज के तीमारदार अपने घर से चादर ले आते थे। कुछ समय पहले सीएमस डॉ. बीबी पुष्कर ने इस पर ध्यान देते हुए रोजाना रंगीन चादरें बिछाए जाने की व्यवस्था की थी। हर रोज चादरों का रंग निर्धारित किया था, ताकि ये पता चल सके कि रोजाना चादरें बदली जा रही हैं या नहीं। कुछ दिन तक ये व्यवस्था ठीक चली, लेकिन अब फिर पुराने ढर्रे पर लौटने लगी है। अब हाल ये है कि अब चादरें हर बेड पर बिछना तो दूर, उनके गद्दे तक फट गए हैं। इससे मरीजों को खासी परेशानी हो रही है।
अस्पताल के वार्डों में ये अव्यवस्था आज भी है कि प्रत्येक मरीज के बेड पर नई चादर नहीं बिछाई जाती है। कोई मरीज नई चादर बिछाने की मांग करता हैं तो ही उसके बेड पर चादर बिछा दी जाती है। वह मरीज इस पर लेटता है और इसके बाद दूसरे मरीज को उसी चादर और बेड पर लिटा दिया जाता है। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से लेकर सर्जिकल, पेइंग, मेडिकल वार्डों का तो बहुत बुरा हाल है। इमरजेंसी वार्ड में ही पीछे बरामदे में एक भी गद्दा साबित नहीं है। बरामदे में जो भी बेड पड़े हैं। उनकी चादरें तो गायब हो ही चुकी हैं, इन पर पड़े गद्दे भी फट चुके हैं। कुछ मरीज पुरानी चादर बिछाये लेटे हैं तो कुछ मरीजों के नीचे नई चादर बिछी हैं। इसमें ये नहीं पता कि ये चादरें कोई और मरीज उपयोग कर चुका है या नहीं।
इ्न्फेक्शन फैले तो किससे कहें
- कहने को अस्पताल में मरीजों का इलाज होता है। उन्हें तमाम सावधानियां बताई जाती हैं। गंदगी न रखें, साफ कपड़े पहने, साबुन से हाथ धोएं, जिससे इन्फेक्शन ने फैले लेकिन गंदी चादरों से चाहें इन्फेक्शन फैले या फिर एक मरीज की बीमारी दूसरे में फैल जाए। इनके लिए बड़ी बात नहीं है। मरीज दो दिन में ठीक होना हो तो चार दिन में ठीक हो, इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता। किसी को इससे कोई फर्क नहीं है।
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दिन भर बेड पर पड़ी रहती हैं गंदी चादरें
- जिला अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड ऐसा है जहां सबसे गंभीर और घायल मरीज भर्ती होते हैं। अक्सर मरीज यहां से रेफर या दूसरे वार्ड में ट्रांसफर होते रहते हैं। जिन घायलों के नीचे चादर बिछाई जाती है, वे खून से लाल हो जाती हैं, फिर भी उसे तुरंत नहीं हटाया जाता। जब तक कि कोई दूसरा मरीज नहीं आ जाता। अगर ज्यादा संख्या में भी मरीज आते हैं तो तुरंत इंतजाम किए जाते हैं। इससे उस बेड पर मरीज लेटना तो दूर उसके पास खड़ा होना तक पसंद नहीं करता।
मैंने साफ तौर पर कह दिया है कि किसी वार्ड में कोई फटा गद्दा या चादर है तो उसे तुरंत बदला जाए। उसे नष्ट करा दो, फिर कार्यालय से नई चादर ले जाओ। ये वार्ड में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों की कमी है। उन्हें सोचना चाहिए कि चादरें बदलनी है या नहीं। मैं इसे चेक करता हूं, जिसकी लापरवाही मिली उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- डॉ. बीबी पुष्कर, सीएमएस जिला अस्पताल
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अस्पताल के वार्डों में ये अव्यवस्था आज भी है कि प्रत्येक मरीज के बेड पर नई चादर नहीं बिछाई जाती है। कोई मरीज नई चादर बिछाने की मांग करता हैं तो ही उसके बेड पर चादर बिछा दी जाती है। वह मरीज इस पर लेटता है और इसके बाद दूसरे मरीज को उसी चादर और बेड पर लिटा दिया जाता है। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से लेकर सर्जिकल, पेइंग, मेडिकल वार्डों का तो बहुत बुरा हाल है। इमरजेंसी वार्ड में ही पीछे बरामदे में एक भी गद्दा साबित नहीं है। बरामदे में जो भी बेड पड़े हैं। उनकी चादरें तो गायब हो ही चुकी हैं, इन पर पड़े गद्दे भी फट चुके हैं। कुछ मरीज पुरानी चादर बिछाये लेटे हैं तो कुछ मरीजों के नीचे नई चादर बिछी हैं। इसमें ये नहीं पता कि ये चादरें कोई और मरीज उपयोग कर चुका है या नहीं।
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इ्न्फेक्शन फैले तो किससे कहें
- कहने को अस्पताल में मरीजों का इलाज होता है। उन्हें तमाम सावधानियां बताई जाती हैं। गंदगी न रखें, साफ कपड़े पहने, साबुन से हाथ धोएं, जिससे इन्फेक्शन ने फैले लेकिन गंदी चादरों से चाहें इन्फेक्शन फैले या फिर एक मरीज की बीमारी दूसरे में फैल जाए। इनके लिए बड़ी बात नहीं है। मरीज दो दिन में ठीक होना हो तो चार दिन में ठीक हो, इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता। किसी को इससे कोई फर्क नहीं है।
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दिन भर बेड पर पड़ी रहती हैं गंदी चादरें
- जिला अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड ऐसा है जहां सबसे गंभीर और घायल मरीज भर्ती होते हैं। अक्सर मरीज यहां से रेफर या दूसरे वार्ड में ट्रांसफर होते रहते हैं। जिन घायलों के नीचे चादर बिछाई जाती है, वे खून से लाल हो जाती हैं, फिर भी उसे तुरंत नहीं हटाया जाता। जब तक कि कोई दूसरा मरीज नहीं आ जाता। अगर ज्यादा संख्या में भी मरीज आते हैं तो तुरंत इंतजाम किए जाते हैं। इससे उस बेड पर मरीज लेटना तो दूर उसके पास खड़ा होना तक पसंद नहीं करता।
मैंने साफ तौर पर कह दिया है कि किसी वार्ड में कोई फटा गद्दा या चादर है तो उसे तुरंत बदला जाए। उसे नष्ट करा दो, फिर कार्यालय से नई चादर ले जाओ। ये वार्ड में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों की कमी है। उन्हें सोचना चाहिए कि चादरें बदलनी है या नहीं। मैं इसे चेक करता हूं, जिसकी लापरवाही मिली उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- डॉ. बीबी पुष्कर, सीएमएस जिला अस्पताल