Budaun: गमलों में गोलमाल... किसने रखवाए, पालिका को पता नहीं, पर शाम को उठा ले गए कर्मचारी
आखिर गमले रखवाए किसने। यह चर्चा शुरू होते ही पालिका के कुछ कर्मचारी ट्रॉली लेकर आ गए और सारे गमले भर लिए। कर्मचारियों से पूछा गया तो उन्होंने कोई जानकारी होने से इनकार कर दिया।
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बदायूं में कुछ दिनों पूर्व स्टेशन रोड के डिवाइडर पर सौ से अधिक गमले रखवाए गए थे, जिनमें पौधे भी लगे थे। धीरे-धीरे कुछ गमले गायब होने लगे। किसी माध्यम से जब यह बात नगर पालिका के अधिकारी तक पहुंची तो शुक्रवार की शाम गमले हटाए जाने लगे। खास यह कि उन्हें यह जानकारी ही नहीं पालिका की देखरेख वाले क्षेत्र में गमले किसने रखवाए।
नगर पालिका ने इंदिरा चौक से लेकर एसके कॉलेज तक डिवाइडर बनवाया गया है। इस डिवाइडर का निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही विवाद शुरू हो गया था। पालिका इसे मॉडल सड़क के रूप में विकसित कर रही थी लेकिन कुछ लोगों ने सड़क की चौड़ाई कम होने पर डिवाइडर का विरोध कर दिया था। अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मामला सुलझा लिया गया। बाद में निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए। खैर किसी तरह निर्माण पूरा हुआ। अब सौंदर्यीकरण को लेकर वहां रखे गमलों पर सवाल खड़ा हो गया है। आखिर गमले रखवाए किसने। चर्चा शुरू होते पालिका के कुछ कर्मचारी ट्रॉली लेकर आ गए और सारे गमले भर लिए। कर्मचारियों से पूछा गया तो उन्होंने कोई जानकारी होने से इनकार कर दिया।
मुझे नहीं पता कि गमले किसने रखवाए हैं। शायद किसी संस्था ने गमले रखवाए होंगे। -डॉ. दीप कुमार, ईओ नगर पालिका
किसी संस्था ने गमले नहीं रखवाए। ईओ ने यह बताया था कि पालिका ने गमले रखवाए हैं। उनकी अनुमति से पीडब्ल्यूडी के किसा ठेकेदार ने गमले रखवाए। -दीपमाला गोयल, निवर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष
‘गमला घोटाला’ होने की आशंका
डिवाइडर पर जो गमले लगवाकर हटवाए गए हैं, वे बड़े हैं। जानकारों के अनुसार एक गमले की कीमत कम से कम चार सौ रुपये तो होगी ही। सौ से ऊपर गमले रखे रखवाए गए हैं। बताते हैं कि पालिका में इन गमलों की खरीदारी के लिए कोई टेंडर नहीं पड़ा। कोई संस्था ये गमले लगवाती तो पहले वो अपना प्रचार करती, साथ में अपना नाम पर चस्पा करवाती। पालिका से अनुमति भी ली लेती। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। ऐसे में यह सवाल वाजिब है कि कि गमलों को लेकर घोटाला हो सकता है।