फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Gandhi ji

बदायूं में दो बार आए थे बापू, स्वतंत्रता आंदोलन को दी थी धार

Sun, 30 Jan 2022 12:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jan 2022 12:21 AM IST
विज्ञापन
Gandhi ji
गुलड़िया में नमक बनाते क्रांतिकारी। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का बदायूं से जुड़ाव रहा है। वह जिले में दो बार आए थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को धार दी थी। उन्हीं की प्रेरणा से जिले के क्रांतिकारियों ने गुलड़िया कस्बे में नमक कानून तोड़ा था। गांधी जी के आने पर जिले की महिलाओं ने आजादी के आंदोलन को तेज करने के लिए अपने जेवर और बचत के पैसे भी निकालकर उन्हें दे दिए थे।
विज्ञापन

स्वतंत्रता सेनानी व सांसद रहे बाबू रघुवीर सहाय की पुस्तक बदायूं के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास के मुताबिक एक मार्च 1921 को महात्मा गांधी पहली बार बदायूं आए थे। गांधीजी के बदायूं आने पर हिंदू मुस्लिम एकता और मजबूत हुई। साथ ही सभी धर्म व जातियों के लोग एकजुट होकर अंग्रेजों के विरोध में उठ खड़े हुए। गांधी जी जब ट्रेन से बदायूं रेलवे स्टेशन पहुंचे तो उत्साही स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने उनका स्वागत करने के लिए ट्रेन के डिब्बे के पास कार लगा दी।
विज्ञापन

पहली बार जिले में गांधी जी का आना अनायास नहीं था। वह खिलाफत आंदोलन के अग्रणी नेता मौलाना अब्दुल माजिद बदायूंनी के जोशीले भाषणों से काफी प्रभावित थे। माजिद बदायूंनी ने अपने भाषणों से देशव्यापी ख्याति प्राप्त कर ली थी। उन्हीं के आग्रह पर महात्मा गांधी पहली बार बदायूं आए। तब मौलाना शौकत अली, डॉ. सैफुद्दीन किचलू, कस्तूरबा गांधी, खिलाफत कमेटी के प्रांतीय सेक्रेटरी सैयद मोहम्मद हुसैन, मौलाना सलामुल्ला, फिरंगी महली, मोहम्मद निसार अहमद कानपुरी भी उनके साथ थे। महात्मा गांधी यहां कादरी मंजिल में ठहरे। यह उस समय की सबसे शानदार कोठियों में शुमार थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस दौरान गांधीजी की सभा के दौरान आंधी आने से शामियाने उखड़ गए और लोग उनका भाषण ठीक से नहीं सुन सके। इसके बाद गांधीजी ने पार्वती आर्य कन्या इंटर कॉलेज में महिलाओं की एक सभा को संबोधित किया। महिलाएं उनके भाषण से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने महात्मा गांधी को धन की थैलियां और अपने पहने हुए जेवर उतारकर भेंट कर दिए।
-
उझानी के रामलीला मैदान में हुई थी सभा
दूसरी बार महात्मा गांधी वर्ष 1929 में उझानी कस्बे में आए। वहां उन्होंने उस बाग में सभा की जहां रामलीला का मंचन किया जाता था। सभास्थल पर भारी भीड़ जुटी थी। यहां गांधी जी ने लोगों से आह्वान किया कि वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताकर अंग्रेजी शासन को उखाड़ फेंकने का काम करें।
-
गुलड़िया में क्रांतिकारियों ने नमक बनाकर तोड़ा कानून
मूसाझाग। गांधी जी जब दूसरी बार जिले में आए तभी नमक कानून तोड़ने के विरोध की नींव पड़ गई। बदायूं शहर से 10 किलोमीटर दूर बसे गुलड़िया में नमक बनाया गया जिस पर अंग्रेजी सरकार ने कर लगा दिया था। गुलड़िया के स्वतंत्रता सेनानी मुंशी हेतराम सिंह व अन्य कई स्वतंत्रता सेनानियों के साथ मिलकर सन 1930 में गुलड़िया से शुरू हुए नमक तोड़ो आंदोलन को हवा दी गई। सन 1930 में महात्मा गांधी ने गुजरात के दांडी जाते समय क्रांतिकारियों को कहा था कि 6 से 13 अप्रैल तक पूरे देश भर में यह कानून भंग किया जाए। गुलड़िया के क्रांतिकारियों के साथ मिलकर मुंशी हेतराम सिंह ने कानून तोड़ने में अहम भूमिका निभाई थी। गुलड़िया के रणवीर सिंह के खेत मे स्वतंत्रता के क्रांतिकारियों ने इस ऐतिहासिक कार्य को अंजाम दिया।
-
ऐसे बनाया था नमक
गुलड़िया में नमक बनाने के लिए रस्सियों से घेरकर एक बाड़ा बनाया गया था। उसके अंदर क्यारी बनाकर नूनखुरी मिट्टी जमाकर उस पर पानी छिड़क दिया गया। पानी रिसकर नीचे नाली द्वारा निकलता था जो बाद मे जमकर बड़े-बड़े कड़ाहों में उबाला जाता था। कड़ाहों में पपड़ी नीचे रह जाती थी जो इकट्ठी कर ली जाती थी। यही नमक होता था। कानून भंग करने के समय लगभग दस से पंद्रह हजार महिला पुरुष गुलड़िया के उस खेत में मौजूद थे। सारे जिले से लोग यहां आए थे। पुलिस भी वहां पहुंच गई थी। संवाद

-
गांधी जी की प्रेरणा से रियासत छोड़ आंदोलन में कूदे थे कुंवर रुकुम सिंह
बदायूं। वैदिक इंटर कॉलेज नगला के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. विष्णु प्रकाश मिश्र के मुताबिक जिले के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर रुकुम सिंह राठौर अग्रणी पंक्ति के नेता थे। उनका जन्म 1889 में नगलापूर्वी में पहलवान कुंवर केहरी सिंह राठौर के घर में हुआ था। जब वह स्वतंत्रता आंदोलन में कूदे तब मध्यप्रदेश की देवास रियासत के महामंत्री पद पर थे। संपत्ति और पद को भी तिलांजलि देकर गांधी जी के आह्वान पर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद गए थे। गांधी जी से मार्गदर्शन लेकर राठौर ने क्विट इंडिया मूवमेंट और नमक आंदोलन में अति सक्रियता से भाग लिया। पाकिस्तान बनने पर बदायूं आए शरणार्थियों को धन, वस्त्र व भोजन देने के लिए उन्होंने पत्नी के आभूषण तक बेच दिए थे। आजादी के बाद शिक्षा के प्रचार को नगलापूर्वी में वैदिक जूनियर हाईस्कूल स्थापित किया जो 1965 में इंटर कॉलेज बना। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed