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गंगा एक्सप्रेस-वे: सरकारी जमीन का पुनर्ग्रहण, बड़े धर्मस्थलों को अलग दी जाएगी जमीन
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बदायूं। गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए जिले की चार तहसीलों के 84 गांवों में सरकारी जमीन का पुनर्ग्रहण की कार्रवाई शुरू होने के साथ धर्मस्थलों के लिए भी जमीन की तलाश शुरू हो गई है। बिल्सी और बिसौली तहसील के गांवों में निजी जमीन के अधिग्रहण के लिए बैनामों की प्रक्रिया एक फरवरी से शुरू हो चुकी है। दातागंज और सदर तहसील के गांवों में जमीनों के अधिग्रहण के लिए शासन से स्वीकृति का इंतजार है।
मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाला गंगा एक्सप्रेस-वे जिले में 92 किमी की सीमा तय करेगा। इसके लिए चार तहसीलों के 84 गांवों में जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। बिसौली में 37, दातागंज में 27, सदर में 18 और बिल्सी में दो गांवों में जमीन चिंह्नित करने का काम पूरा करने के बाद बिसौली और बिल्सी में अधिग्रहण शुरू हो चुका है।
दातागंज और तहसील सदर के गांवों की सूची मूल्यांकन को स्वीकृति देने के लिए शासन को गई है। जिन गांवों से होकर एक्सप्रेस-वे निकलेगा वहां काफी जमीन सरकारी भी है। इसके साथ ही यहां कुछ धर्म स्थल भी एक्सप्रेस-वे की राह में आ रहे हैं। निजी जमीनों का तो अधिग्रहण किया जा रहा है। जो सरकारी जमीनें हैं उनको गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए यूपीडा के पक्ष में पुनर्ग्रहीत किया जाना है। इसके लिए प्रक्रिया चालू हो गई है।
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एक्सप्रेस-वे की राह में कुछ छोटे धर्मस्थल हैं, इसके साथ ही दातागंज तहसील में पापड़ गांव के पास एक बड़ा धर्म स्थल भी है। इस धर्मस्थल के लिए जमीन तलाशी जा रही है। हालांकि, छोटे और सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से बने धर्म स्थलों के लिए अलग से जमीन दिए जाने को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है।
लोक निर्माण और सिंचाई विभाग नेे पूरा किया मूल्यांकन का काम
- जिन गांवों में जमीनों के साथ भवनों आदि का अधिग्रहण किया जाना है। इसके लिए सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग ने मूल्यांकन का काम पूरा कर लिया है। गंगा एक्सप्रेस-वे की राह में कुछ भवनों के साथ धर्मस्थल, नलकूप, मेंथा प्लांट भी आ रहे हैं। सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग की ओर से इन सभी संपत्तियों का मूल्यांकन किया जा रहा है। सबसे ज्यादा संपत्तियां बिसौली और दातागंज तहसील में हैं।
गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए सरकारी संपत्तियों और जमीनों का पुनर्ग्रहण किया जा रहा है। जहां भी धर्मस्थल एक्सप्रेस-वे की राह में आ रहा है वहां धर्मस्थल की मान्यता को देखते हुए दूसरे स्थानों पर जमीन की तलाश की जा रही है। मार्च के अंत तक यह काम पूरा कर लिए जाएंगे। जिन निजी संपत्तियों का अधिग्रहण किया जाना है वहां बैनामों की प्रक्रिया चल रही है। - नरेंद्र बहादुर सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाला गंगा एक्सप्रेस-वे जिले में 92 किमी की सीमा तय करेगा। इसके लिए चार तहसीलों के 84 गांवों में जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। बिसौली में 37, दातागंज में 27, सदर में 18 और बिल्सी में दो गांवों में जमीन चिंह्नित करने का काम पूरा करने के बाद बिसौली और बिल्सी में अधिग्रहण शुरू हो चुका है।
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दातागंज और तहसील सदर के गांवों की सूची मूल्यांकन को स्वीकृति देने के लिए शासन को गई है। जिन गांवों से होकर एक्सप्रेस-वे निकलेगा वहां काफी जमीन सरकारी भी है। इसके साथ ही यहां कुछ धर्म स्थल भी एक्सप्रेस-वे की राह में आ रहे हैं। निजी जमीनों का तो अधिग्रहण किया जा रहा है। जो सरकारी जमीनें हैं उनको गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए यूपीडा के पक्ष में पुनर्ग्रहीत किया जाना है। इसके लिए प्रक्रिया चालू हो गई है।
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एक्सप्रेस-वे की राह में कुछ छोटे धर्मस्थल हैं, इसके साथ ही दातागंज तहसील में पापड़ गांव के पास एक बड़ा धर्म स्थल भी है। इस धर्मस्थल के लिए जमीन तलाशी जा रही है। हालांकि, छोटे और सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से बने धर्म स्थलों के लिए अलग से जमीन दिए जाने को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है।
लोक निर्माण और सिंचाई विभाग नेे पूरा किया मूल्यांकन का काम
- जिन गांवों में जमीनों के साथ भवनों आदि का अधिग्रहण किया जाना है। इसके लिए सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग ने मूल्यांकन का काम पूरा कर लिया है। गंगा एक्सप्रेस-वे की राह में कुछ भवनों के साथ धर्मस्थल, नलकूप, मेंथा प्लांट भी आ रहे हैं। सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग की ओर से इन सभी संपत्तियों का मूल्यांकन किया जा रहा है। सबसे ज्यादा संपत्तियां बिसौली और दातागंज तहसील में हैं।
गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए सरकारी संपत्तियों और जमीनों का पुनर्ग्रहण किया जा रहा है। जहां भी धर्मस्थल एक्सप्रेस-वे की राह में आ रहा है वहां धर्मस्थल की मान्यता को देखते हुए दूसरे स्थानों पर जमीन की तलाश की जा रही है। मार्च के अंत तक यह काम पूरा कर लिए जाएंगे। जिन निजी संपत्तियों का अधिग्रहण किया जाना है वहां बैनामों की प्रक्रिया चल रही है। - नरेंद्र बहादुर सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व