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बदायूं: गंगा से दो सौ किसानों की तीन सौ हेक्टेयर भूमि प्रभावित, सैकड़ों बीघा नदी में समाई

Tue, 01 Sep 2026 06:01 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Published by: Mukesh Kumar Updated Tue, 01 Sep 2026 06:01 PM IST
सार

बदायूं के उसहैत क्षेत्र में गंगा नदी के कटान से 35 गांवों के करीब 200 किसानों की तीन सौ हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है। गन्ना, धान और बाजरा जैसी फसलें गंगा में समा गई हैं। गांव कदमनगला, रैपुरा और भुनडी जैसे गांवों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। 

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Three hundred hectares of land belonging to two hundred farmers affected by the Ganga
खेतों में भरा बाढ़ का पानी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

बदायूं के उसहैत क्षेत्र में गंगा नदी के डूब क्षेत्र के 35 गांवों के किसानों की भूमि का कटान हुआ है। 200 किसानों की गन्ना, धान, बाजरा खेती वाली भूमि गंगा में समा गई। खेती के कटान के संबंध में प्रशासन ने अभी सर्वे नहीं कराया है, लेकिन तीन सौ हेक्टेयर भूमि गंगा से प्रभावित होने की बात सामने आई है। कुछ गांवों में अभी भू-कटान जारी है।

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गंगा नदी के जलस्तर से कदमनगला, रैपुरा, भुनडी, असमय रफतपुर, जटा में फसलों की सबसे ज्यादा बर्बादी देखने को मिली है। कदमनगला गांव इस वर्ष सबसे ज्यादा तबाह हुआ है। बारिश के साथ ही गंगा की धार का रुख बदला, जिसके बाद इस गांव में कटान शुरू हुआ, जो एक महीने बाद भी जारी है। कटान इतना तेज था कि बाढ़ खंड के अधिकारियों ने भी हाथ खड़े कर दिए और कटान को रोकने का कोई उपाय न किया जा सका। 
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जमीन के साथ फसलें भी बर्बाद 
पहले तो लगभग 500 बीघा खेती की जमीन गंगा में समा गई, जिससे गांव के लगभग 28 किसानों को बड़ा नुकसान हुआ। खेतों में बाजरा, मक्का, धान, शकरकंद के साथ ही यूकेलिप्टस के पेड़ भी थे, गंगा में समा गए। ग्राम भुनडी में भी लगभग 70 बीघा जमीन गंगा में समा चुकी है। यहां करीब 30 बीघा जमीन पर खेती पर नहीं होती है, शेष 40 बीघा जमीन पर धान, बाजरा और यूकेलिप्टस की खेती हो रही थी। पिछले 15 दिन से यहां कटान शुरू हुआ है, जो अभी चल रहा है। 

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रैपुरा गांव भी कटान की जद में चल रहा है। यहां करीब 100 बीघा खेती की जमीन गंगा में समा चुकी है। गांव के छविराम ने बताया कि 10 बीघा खेती की जमीन जिस पर धान की खेती थी गंगा में समा चुकी है। वहीं असमया रफतपुर में गंगा में कटान नहीं हुआ, लेकिन एक महीने से खेतों में लगातार पानी भरा रहा। इससे फसल बर्बाद हो चुकी हैं। गांव जाने वाले मार्ग पर भी गंगा का पानी चल रहा था। लगभग 80 किसानों की 600 बीघा खेती पर शकरकंद, धान, बाजरा, मक्का की खेती बर्बाद हुई है। ग्राम असमय रफतपुर के रमेश कुमार ने बताया कि 40 बीघा जमीन पर धान और बाजरा की खेती में पानी भरा रहने से बर्बाद हुई।

इन गांवों में हुआ कटान
गंगा नदी के डूब क्षेत्र प्रेमीनगला, जटा, जसवंत नगला, ठाकुरी नगला, रैपुरा, दलनगला, कदम नगला, कमलैयापुर, असमया रफतपुर, अहमद नगर बछौरा, बल्ले नगला, भुनडी, कमलू नगला, बेहटी, भकरी, चेतराम नगला, कोनका नगला, टिकाई खाम, द्विकली खाम आदि शामिल हैं।

क्या कहते हैं बाढ़ के पीड़ित किसान
किसान भंवर पाल ने बताया कि उनकी 8 बीघा खेती पानी भरा रहने से खराब हो गई, उनके खेतों में बाजरा और धान लगा हुआ था। खेती खराब होने के बाद मुआवजे के संबंध में कोई मदद अभी तक नहीं मिली है।

भुनडी गांव के राम सिंह ने बताया कि 18 बीघा का खेत था, जिसमें धान और यूकेलिप्टस की खेती हो रही थी, रात में पानी खेतों में घुस आया और कटान शुरू कर दिया, जिसके बाद सिंचाई का बोरिंग और इंजन भी कटान में चला गया, लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली है।

कदमनगला गांव के अमित कुमार ने बताया कि 40 बीघा जमीन गंगा में समा गई, जमीन पर बाजार, धान और यूकेलिप्टस के पेड़ थे। खेती के बाद 140 गज में बना पक्का मकान भी गंगा में समा गया। मकान में 5 परिवार रहते थे, बाढ़ और कटान से लाखों का नुकसान हुआ है, प्रशासन की ओर से मकान के मुआवजे की प्रकिया चल रही है। खेती के नुकसान की भरपाई के बारे में अभी कोई सूचना नहीं है।

एसडीएम दातागंज विनोद कुमार ने बताया कि गंगा नदी के डूब क्षेत्र में अभी तक लगभग 300 हेक्टेयर खेती प्रभावित हुई है, ग्रामीणों को उनके नुकसान का सही मुआवजा मिल सके इसके लिए सर्वे कराया जाएगा।

डीएम ने बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र का किया निरीक्षण, कटान का सर्वे करने के निर्देश
डीएम अवनीश राय ने अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) महेन्द्र श्रीवास्तव, दातागंज तहसील के एसडीम विनोद कुमार, एई बाढ़ खंड नेशपाल सिंह को साथ लेकर बाढ़ ग्रस्त कदम नगला, रैपुरा का दौरा किया। डीएम ने अधिकारियों को कटान को रोकने के इंतजाम करने व ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाने एवं बाढ़ के नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे कराने के निर्देश दिए। साथ ही ग्रामीणों से परेशानियों की जानकारी ली।
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