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Budaun News: जिले में बन रहीं चार नई गोशालाएं, 1200 गोवंशों को मिलेगा आश्रय
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बदायूं। जिले में बढ़ती छुट्टा गोवंश की समस्या को देखते हुए पशुपालन विभाग गोशाला का निर्माण करा रहा है। सड़क, गलियों और किसानों के खेतों में घूम रहे छूट्टा गोवंश से हो रही दिक्कतों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। विभाग का लक्ष्य है कि इन गोशालाओं को वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरी तरह तैयार कर लिया जाए।
जिले में दहगवां क्षेत्र के ताहिरपुर जाहिदपुर गांव में गोशाला का निर्माण चल रहा है। इसके साथ ही समरेर के गदरौली, म्याऊं के कोड़ा जयकरण और वजीरगंज के गुठौला भी वृह्द गो संरक्षण केंद्र बनाया गया है। प्रत्येक गो संरक्षण केंद्र 1.60 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है। प्रत्येक में 300-300 गोवंशों को रखने की क्षमता है।
ऐसे में इन चारों के बन जाने पर लगभग 1200 गोवंशों को सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकेगा। इससे न सिर्फ शहर और गांव की सड़कों पर घूम रहे पशुओं की संख्या कम होगी, बल्कि किसानों के खेतों को भी छुट्टा पशुओं से होने वाले नुकसान से राहत मिलेगी। पिछले कुछ वर्षों से जिले में छुट्टा गोवंश की संख्या लगातार बढ़ रही है। सड़क दुर्घटनाओं में इन जानवरों के कारण बढ़ोतरी हुई है और किसानों की फसलें भी भारी रूप से प्रभावित हो रही हैं। कई बार किसान रात-रात भर फसल की रखवाली को मजबूर होते हैं।
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नई गोशालाओं के निर्माण से इन समस्याओं में काफी हद तक कमी आने की उम्मीद है। वहीं, पशुपालन विभाग का कहना है कि गोशालाओं में गोवंशों के लिए चारा, पानी, शेड और सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए बजट भी स्वीकृत कर दिया गया है। इसके अलावा इन गोशालाओं के संचालन की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों के सहयोग से तय की जाएगी, ताकि व्यवस्था नियमित रूप से सुचारू चल सके।
जिले में चार गोशालाओं को बनाने का काम चल रहा है। इस वित्तीय वर्ष में यह चारों गो आश्रय स्थल बनकर तैयार हो जाएंगे। -समदर्शी सरोज, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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जिले में दहगवां क्षेत्र के ताहिरपुर जाहिदपुर गांव में गोशाला का निर्माण चल रहा है। इसके साथ ही समरेर के गदरौली, म्याऊं के कोड़ा जयकरण और वजीरगंज के गुठौला भी वृह्द गो संरक्षण केंद्र बनाया गया है। प्रत्येक गो संरक्षण केंद्र 1.60 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है। प्रत्येक में 300-300 गोवंशों को रखने की क्षमता है।
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ऐसे में इन चारों के बन जाने पर लगभग 1200 गोवंशों को सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकेगा। इससे न सिर्फ शहर और गांव की सड़कों पर घूम रहे पशुओं की संख्या कम होगी, बल्कि किसानों के खेतों को भी छुट्टा पशुओं से होने वाले नुकसान से राहत मिलेगी। पिछले कुछ वर्षों से जिले में छुट्टा गोवंश की संख्या लगातार बढ़ रही है। सड़क दुर्घटनाओं में इन जानवरों के कारण बढ़ोतरी हुई है और किसानों की फसलें भी भारी रूप से प्रभावित हो रही हैं। कई बार किसान रात-रात भर फसल की रखवाली को मजबूर होते हैं।
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नई गोशालाओं के निर्माण से इन समस्याओं में काफी हद तक कमी आने की उम्मीद है। वहीं, पशुपालन विभाग का कहना है कि गोशालाओं में गोवंशों के लिए चारा, पानी, शेड और सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए बजट भी स्वीकृत कर दिया गया है। इसके अलावा इन गोशालाओं के संचालन की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों के सहयोग से तय की जाएगी, ताकि व्यवस्था नियमित रूप से सुचारू चल सके।
जिले में चार गोशालाओं को बनाने का काम चल रहा है। इस वित्तीय वर्ष में यह चारों गो आश्रय स्थल बनकर तैयार हो जाएंगे। -समदर्शी सरोज, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी