तीन राजमार्ग होंगे फोरलेन, दो के ब्लू प्रिंट तैयार
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जिले से गुजरने वाले तीन राजमार्गों का चौड़ीकरण कर फोरलेन बनाए जाने की तैयारी गुपचुप तरीके से हो रही है। इसके लिए मध्य प्रदेश की एक कंपनी को ठेका दिया गया है। कंपनी सर्वे कर अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि का ब्योरा पीडब्ल्यूडी के माध्यम से शासन को भेजेगी। इसमें से उसने दो राजमार्गों का ब्लू प्रिंट तैयार जमा भी कर दिए हैं। अभी तीसरे राजमार्ग का ब्योरा तैयार करने में जुटी है। इस कार्य को कंपनी बेहद गोपनीयता के साथ कर रही है। अधिकारियों को भी सर्वे के संबंध में खामोश रहने की हिदायत दी गई है। यही वजह है कि कंपनी के अधिकारी खुलकर कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं।
जिले में विकास के रास्ते राजमार्गों के माध्यम से ही खुले हैं। इन राजमार्गों में से पीलीभीत-बरेली-मथुरा-भरतपुर हाईवे में केवल बदायूं और बरेली के मध्य 54 किमी फोरलेन का काम चल रहा है। अब जिले को छूने वाले राजमार्गों में बदायूं-बिजनौर, पीलीभीत-बरेली-मथुरा-भरतपुर, मुरादाबाद-फर्रुखाबाद राजमार्गों को फोरलेन बनाए जाने के प्रयास हो रहे हैं। इन मार्गों को कितनी भूमि चाहिए? जिसका अधिग्रहण किया जा सकता है। इसके लिए मध्य प्रदेश की कृष्णा सेक्नो कंसलटेंट प्रालि और जेवी विड आईकॉन इंजीनियरिंग प्रावि, भोपाल को कमान सौंपी गई है। बदायूं में इस कार्य का नेतृत्व रिटायर्ड राजस्व अधिकारी और एक अन्य अधिकारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह कार्य अति गोपनीय है। सीधा प्रदेश सरकार से जुड़ा है। इसलिए इस संबंध में वह कोई बात उजागर नहीं कर सकते हैं।
सूत्रों की मानें तो इस कंपनी ने पीलीभीत-बरेली-मथुरा- भरतपुर मार्ग और मुरादाबाद-फर्रुखाबाद मार्ग को भूमि अधिग्रहण की जरूरत का सर्वे कर पीडब्ल्यूडी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। मार्च में बदायूं-बिजनौर राजमार्ग की रिपोर्ट भी सौंपनी थी, लेकिन मार्च में इसमें कोई प्रगति नहीं हो सकी। माना जा रहा है कि जल्दी ही इस मार्ग की भी रिपोर्ट भी भेज दी जाएगी।
फोरलेन से जोड़ने की सीएम ने की थी घोषणा
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस जिले को अन्य जिलों के फोरलेन से जोड़ने की घोषणा की थी। इस आधार पर बदायूं-बरेली के बीच फोरलेन का काम चल रहा है। यहां बता दें कि बदायूं-संभल और मुरादाबाद-फर्रुखाबाद और बदायूं-कासगंज इस घोषणा में वैसे ही फोरलेन की श्रेणी में आ जाते हैं। जिन राजमार्गों को फोरलेन के लिए सर्वे चल रहा है। उससे मुख्यमंत्री की घोषणा भी पूरी होती दिख रही है।
...इसलिए चल रहा गुपचुप काम
जिले से जुड़े तीन राजमार्गों के फोरलेन करने को जमीन अधिग्रहण को सर्वे कर अपनी रिपोर्ट देने वाली मध्य प्रदेश की कंपनी इसलिए चुप्पी साधे है कि कहीं किसानों में इसे लेकर कोई प्रतिक्रिया न होने लगे। यहां बता दें कि जिले के किसानों ने मेडिकल कॉलेज हो या रोडवेज डिपो की बात, कभी विकास कार्यों का विरोध नहीं किया। बसपा शासन में गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए भी अपनी जमीन देने में कोई आनाकानी नहीं की। हालांकि यहां एक्सप्रेस-वे निर्माण का प्लान खत्म हो गया। सर्वे कर्ता चुप्पी साधकर किसानों में भ्रम पैदा कर रहे हैं।