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हत्या के मामले में पिता और दो बेटों को उम्रकैद
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Fri, 23 Sep 2016 11:41 PM IST
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सजा
- फोटो : amar ujala
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कोर्ट ने प्रत्येक पर 13,500 रुपये का जुर्माना ठोंका
क्रास केस में कोर्ट ने एक पक्ष के तीन लोगों को बरी किया
फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय ने हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए पिता और उसके दो बेटों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर 13500-13500 रुपये का जुर्माना लगाया है। दूसरे पक्ष की ओर से भी तीन लोगों के खिलाफ कातिलाना हमले का मुकदमा दर्ज कराया गया था, लेकिन कोर्ट ने सबूतों के अभाव में दूसरे पक्ष के तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। फौजदारी की यह वारदात करीब आठ साल पहले बिसौली कोतवाली के गांव सलेमपुर में हुई थी।
बरेली के थाना फतेहगंज पूर्वी के गांव धनतिया निवासी मुन्ने पुत्र उमर ने 12 अक्तूबर 2008 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह शमशाद के मुकदमे के सिलसिले में बिसौली आया था। शमशाद का एक प्लाट को लेकर मोहर सिंह निवासी सलेमपुर से चल रहा था। शमशाद को मालूम पड़ा कि मोहर सिंह प्लाट का निर्माण करा रहा है। वह मुन्ने, शमशाद और ओमपाल के साथ मौके पर पहुंचा। यहां शमशाद ने मोहर सिंह से काम रोकने को कहा। इस पर मोहर सिंह, उसके लड़के मुनेश और ज्ञान सिंह ने नाजायज असलहों से फायरिंग कर दी। इसमें वादी समेत मुन्ने, शमशाद और ओमपाल जख्मी हो गए थे। इलाज के दौरान शमशाद की मौत हो गई थी। फौजदारी में दोनों पक्षों के लोग घायल हुए थे।
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इधर, मोहर सिंह पक्ष की ओर से दिलशाद, ओमपाल और आस मोहमद के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। मोहर सिंह के मुताबिक वह अपने प्लाट पर निर्माण करा रहा था। शमशाद पक्ष के लोग हथियारों से लैस होकर पहुंचे। इन लोगों ने पहले लाठी-डंडों से पीटा बाद में फायरिंग की। इसमें वह और उसके बेटे घायल हो गए थे। मोहर सिंह की तहरीर पर पुलिस ने दिलशाद, ओमपाल और आस मोहम्मद के खिलाफ कातिलाना हमले का मुकदमा दर्ज कर लिया था।
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विद्वान न्यायाधीश सोनिका चौधरी ने पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन और दोनों पक्षों के गवाहों की जिरह के बाद मोहर सिंह, मुनेश और ज्ञान सिंह को शमशाद की हत्या में दोषी करार दिया। तीनों को उम्रकैद और जुर्माना की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी एडीजीसी बिलालउद्दीन ने की। इधर, मोहर सिंह पक्ष के लोग कोर्ट में अपनी चोटों को साबित नहीं कर सके। दूसरे पक्ष के खिलाफ सबूत भी नहीं दे सके। ऐसे में कोर्ट ने दिलशाद, ओमपाल और आस मोहम्मद को बरी कर दिया।
पास-पास थे दोनों लोगों के प्लाट
बदायूं। शमशाद और मोहरपाल के प्लाट पास-पास थे। शमशाद का आरोप था कि मोहर सिंह पक्ष के लोग उसकी जगह पर निर्माण करा रहे थे। जब विरोध किया तो फायरिंग कर दी। दोनों पक्षों ने एक ही व्यक्ति से प्लाटों का बैनामा भी कराया था।