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Budaun News: बाढ़ से बचाव के इंतजाम अभी अधूरे, मानसून को लेकर 30 गांवों में बेचैनी
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बदायूं। मानसून सिर पर है, बावजूद इसके जिन 30 गांवों में गंगा और रामगंगा हर साल तबाही मचाती हैं, वहां बाढ़ से बचाव के इंतजाम अब तक नहीं किए गए हैं या अधूरे हैं। बाढ़ से होने वाली इस तबाही को लेकर संबंधित गांवों के लोगों में बेचैनी है। उनका कहना है कि 20 जून के बाद लगभग हर साल ही मानसून प्रभावी हो जाता है। बाढ़ खंड के यही इंतजाम रहे तो इस बार भी हजारों की संख्या में लोगों को बाढ़ का दंश झेलना पड़ सकता है। वहीं विभागीय अफसरों का दावा है कि बाढ़ बचाव के कार्य 90 प्रतिशत तक पूरे करा लिए गए हैं। शेष कार्य एक सप्ताह के भीतर पूरे हो जाएंगे।
जिले से होकर गंगा और रामगंगा नदी बह रही हैं। इन नदियों में आने वाली बाढ़ हर साल जिले में भारी तबाही मचाती है। पिछले साल करीब दो माह तक गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बहती रही। इसकी वजह से गंगा नदी के ठकुरी नगला, जटा, तौफिया नगला, औरंगाबाद टप्पा, जामिनी, कोतल नगला आदि गांव चपेट में आ गए थे।
वहीं, रामगंगा नदी में आई बाढ़ से नगरिया खनू का मजरा कटकोरा, बेलाडांडी का मजरा देवरनियां, कटक, गढिया पैगंबरपुर, नवादा बदन आदि गांव चपेट में आ गए थे। इस बार ज्यादा बारिश होने की आशंका पहले से मौसम वैज्ञानिक जता चुके हैं। ऐसे में बाढ़ आने की आशंका ज्यादा बनी हुई है।
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बाढ़ बचाव के इंतजाम अधूरे रहने की वजह से ग्रामीणों में डर का माहौल है। हालात यह हैं कि अभी गंगा नदी पर सहसवान में गंगा-महावा तटबंध के पास जमुनी पर काम चल रहा है, जहां पिछली बार बाढ़ ने काफी तबाही मचाई थी। उसहैत के गांव अस्मिया रफतपुर पर भी बाढ़ खंड की ओर से बचाव का काम जारी है। रामगंगा पर गोटिया, उरैना पुख्ता गांव के पास काम अभी पूरा नहीं हुआ है
शासन से आई टीम ने तटबंधों की मौजूदा स्थिति देखी
जिले में गंगा और रामगंगा नदी निकल रही हैं। इस कारण जिला प्रदेश में संवेदनशील जनपदों में शुमार है। ऐसे में शासन की ओर से गठित टीम ने जनपद में चल रहे कटान निरोधक कामों का जायजा लिया। टीम में मेरठ के मुख्य अभियंता (गंगा) ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, मेरठ के सिंचाई कार्य प्रथम मंडल के अधीक्षण अभियंता रमेश चंद्र ने निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने गोटिया, उरैना पुख्ता में जाकर कटान को रोकने के लिए हो रहे कार्य का भी जायजा लिया।
जिले में कटान निरोधक काम लगभग पूरे हो चुके हैं। कुछ जगहों पर काम चल रहा है। एक सप्ताह में वह भी पूरा हो जाएगा। शासन से आई टीम ने भी निरीक्षण किया है, बाढ़ से किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होने देंगे। -उमेश चंद्र, एक्सईएन बाढ़ खंड
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जिले से होकर गंगा और रामगंगा नदी बह रही हैं। इन नदियों में आने वाली बाढ़ हर साल जिले में भारी तबाही मचाती है। पिछले साल करीब दो माह तक गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बहती रही। इसकी वजह से गंगा नदी के ठकुरी नगला, जटा, तौफिया नगला, औरंगाबाद टप्पा, जामिनी, कोतल नगला आदि गांव चपेट में आ गए थे।
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वहीं, रामगंगा नदी में आई बाढ़ से नगरिया खनू का मजरा कटकोरा, बेलाडांडी का मजरा देवरनियां, कटक, गढिया पैगंबरपुर, नवादा बदन आदि गांव चपेट में आ गए थे। इस बार ज्यादा बारिश होने की आशंका पहले से मौसम वैज्ञानिक जता चुके हैं। ऐसे में बाढ़ आने की आशंका ज्यादा बनी हुई है।
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बाढ़ बचाव के इंतजाम अधूरे रहने की वजह से ग्रामीणों में डर का माहौल है। हालात यह हैं कि अभी गंगा नदी पर सहसवान में गंगा-महावा तटबंध के पास जमुनी पर काम चल रहा है, जहां पिछली बार बाढ़ ने काफी तबाही मचाई थी। उसहैत के गांव अस्मिया रफतपुर पर भी बाढ़ खंड की ओर से बचाव का काम जारी है। रामगंगा पर गोटिया, उरैना पुख्ता गांव के पास काम अभी पूरा नहीं हुआ है
शासन से आई टीम ने तटबंधों की मौजूदा स्थिति देखी
जिले में गंगा और रामगंगा नदी निकल रही हैं। इस कारण जिला प्रदेश में संवेदनशील जनपदों में शुमार है। ऐसे में शासन की ओर से गठित टीम ने जनपद में चल रहे कटान निरोधक कामों का जायजा लिया। टीम में मेरठ के मुख्य अभियंता (गंगा) ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, मेरठ के सिंचाई कार्य प्रथम मंडल के अधीक्षण अभियंता रमेश चंद्र ने निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने गोटिया, उरैना पुख्ता में जाकर कटान को रोकने के लिए हो रहे कार्य का भी जायजा लिया।
जिले में कटान निरोधक काम लगभग पूरे हो चुके हैं। कुछ जगहों पर काम चल रहा है। एक सप्ताह में वह भी पूरा हो जाएगा। शासन से आई टीम ने भी निरीक्षण किया है, बाढ़ से किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होने देंगे। -उमेश चंद्र, एक्सईएन बाढ़ खंड